-संवाददाता-
अम्बिकापुर,13 जून 2026 (घटती-घटना)। रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति द्वारा आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम में पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव ने रामगढ़ और हसदेव क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजनाओं को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक संसाधनों की लूट शुरू हो चुकी है और लगातार नई कोयला,बॉक्साइट तथा लौह अयस्क खदानों को मंजूरी दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस क्षेत्र में पहले सीमित खनन की अनुमति थी, वहां अब कई नई खदानों का रास्ता खोल दिया गया है,जिससे रामगढ़ का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। सिंहदेव ने कहा कि सरकार द्वारा रामगढ़ में नया भव्य मंदिर बनाने की पहल इस बात का संकेत है कि ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में चट्टानों में दरारें आने की आशंका को देखते हुए सरकार स्वयं चेतावनी बोर्ड लगवा रही है। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों की लड़ाई केवल स्थानीय लोगों की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की लड़ाई है और सभी जिलों को इसके लिए एकजुट होना होगा। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जब भी आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर संकट आया है, तब संघर्ष की नई धारा पैदा हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगातार खदानें खोली जा रही हैं और शांतिपूर्ण विरोध करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने लोगों से लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने और बस्तर से सरगुजा तक चल रहे आंदोलनों में एकजुट होने की अपील की। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा ने कहा कि देश की संपदा पर किसी कंपनी का नहीं, बल्कि जनता का अधिकार है। उन्होंने कहा कि संसाधनों से समृद्ध क्षेत्रों के लोगों में अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष का साहस दिखाई दे रहा है और यही एकजुटता भविष्य में परिवर्तन ला सकती है। सर्व आदिवासी समाज के विनोद नागवंशी ने कहा कि खनिज संपदा से भरपूर क्षेत्र के लोग आज भी बेरोजगारी और विस्थापन की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के सामाजिक कार्यकर्ता रमाकांत ने कहा कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई का असर आने वाले समय में जल संकट के रूप में सामने आ सकता है। हसदेव बचाओ आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता आलोक शुक्ला ने कहा कि केते एक्सटेंशन परियोजना के तहत हजारों एकड़ क्षेत्र में लाखों पेड़ों की कटाई का खतरा है। उन्होंने दावा किया कि यदि प्रस्तावित खनन परियोजनाएं लागू होती हैं तो कई जल स्रोत और प्राकृतिक धरोहरें प्रभावित होंगी। परिचर्चा में रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के सिद्धार्थ सिंहदेव, राजनाथ सिंह, ओमप्रकाश सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता गंगाराम पैंकरा, सुनीता पोर्ते सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न संभागों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं, आंदोलनकारियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। आयोजन के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में हो रहे हवाई सर्वेक्षण को लेकर भी चिंता जताई और संभावित खनन विस्तार की आशंका व्यक्त की।
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