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अम्बिकापुर@कार्रवाई रायपुर में,सवाल सरगुजा में…निजी बसों का ‘लगेज नेटवर्क’ कब आएगा जांच के दायरे में?

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रायपुर में 350 बसों पर कार्रवाई,लेकिन रायपुर-बिलासपुर-बनारस-रांची-झारखंड रूट की बसों पर अब भी खामोशी
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,13 जून 2026 (घटती-घटना)। राजधानी रायपुर में परिवहन विभाग द्वारा हाल ही में 350 बसों की जांच कर अवैध स्लाइडर हटाने और करीब 5.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि यदि विभाग चाहे तो नियमों के उल्लंघन पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। लेकिन इसी कार्रवाई के बाद सरगुजा संभाग सहित रायपुर, बिलासपुर,बनारस,रांची और झारखंड रूट पर संचालित निजी बसों में कथित अवैध लगेज कारोबार को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्र में लंबे समय से चर्चा है कि कई निजी बसों में यात्री परिवहन से अधिक महत्व पार्सल और व्यावसायिक सामान ढुलाई को दिया जा रहा है। आरोप है कि बसों की डिक्की, सीटों के नीचे,गैलरी और कई बार छत तक माल भर दिया जाता है, जिससे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा दोनों प्रभावित होती हैं।
कार्रवाई हुई तो फिर यहां क्यों नहीं?
रायपुर में हुई व्यापक जांच के बाद आम लोगों का सवाल है कि यदि परिवहन विभाग अवैध स्लाइडर, ओवरलोडिंग और नियम उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई कर सकता है, तो फिर सरगुजा से गुजरने वाले प्रमुख रूटों की बसों में कथित लगेज कारोबार की जांच अब तक क्यों नहीं हुई? स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टैंडों और प्रमुख मार्गों पर रोजाना बड़ी मात्रा में पार्सल लोड और अनलोड होते दिखाई देते हैं। इसके बावजूद किसी संयुक्त जांच अभियान की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
रात में सक्रिय होने की चर्चा…
व्यापारिक और स्थानीय सूत्रों के अनुसार रात के समय बस एजेंटों के माध्यम से बड़े पैमाने पर पार्सल बुकिंग की जाती है। इलेक्ट्रॉनिक सामान,कपड़े, कॉस्मेटिक सामग्री,दवाइयां, किराना और अन्य व्यावसायिक सामग्री नियमित रूप से विभिन्न शहरों तक भेजी जाती है। चर्चा यह भी है कि कई मामलों में सामान के साथ आवश्यक दस्तावेज, जीएसटी बिल या ई-वे बिल की पर्याप्त जांच नहीं होती। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन यदि ऐसा है तो यह केवल परिवहन नियमों का ही नहीं बल्कि कर व्यवस्था का भी गंभीर विषय बन सकता है।
छोटे वाहनों पर सख्ती,
बड़े नेटवर्क पर नरमी?

स्थानीय लोगों के बीच यह धारणा भी बन रही है कि छोटे वाहन चालकों और सामान्य परिवहनकर्ताओं पर नियम उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े बस नेटवर्क के मामलों में वैसी सक्रियता दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि अब सवाल केवल अवैध लगेज ढुलाई का नहीं, बल्कि विभागीय निगरानी और कार्रवाई की समानता का भी बन गया है।
टैक्स चोरी की आशंका पर भी चर्चा : कर विशेषज्ञों का कहना है कि व्यावसायिक माल के परिवहन के लिए निर्धारित दस्तावेजों का होना आवश्यक है। यदि बड़े पैमाने पर माल परिवहन हो रहा है और उसके दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया जा रहा,तो इससे शासन को राजस्व हानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि किसी भी प्रकार की कर चोरी या अवैध परिवहन की पुष्टि केवल विभागीय जांच के बाद ही संभव है।
यात्री बस या पार्सल सेवा?
यात्रियों का आरोप है कि कई बसों में गैलरी तक सामान भर दिया जाता है। लंबी दूरी की यात्रा में यात्रियों को अपने सामान रखने तक में परेशानी होती है। आपात स्थिति में निकासी मार्ग बाधित होने का भी खतरा बना रहता है। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यात्री बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक माल लोडिंग सुरक्षा मानकों के विपरीत है। दुर्घटना की स्थिति में यही अतिरिक्त सामान यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
झारखंड रूट पर विशेष चर्चा
स्थानीय व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि झारखंड और रांची रूट पर पार्सल गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देती हैं। कुछ लोगों ने यह भी आशंका जताई है कि बिना पर्याप्त जांच के संदिग्ध पैकेटों की ढुलाई की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि ऐसे दावों की पुष्टि केवल सक्षम जांच एजेंसियां ही कर सकती हैं।
अब क्या होना चाहिए?
स्थानीय नागरिकों,व्यापारियों और यात्रियों ने मांग की है कि परिवहन विभाग,जीएसटी विभाग और पुलिस प्रशासन संयुक्त अभियान चलाकर
– प्रमुख बस स्टैंडों पर आकस्मिक जांच करें।
– बसों में लोड पार्सलों के दस्तावेजों की जांच करें।
– ई-वे बिल और जीएसटी रिकॉर्ड का सत्यापन करें।
– सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें।
– झारखंड, रांची, बनारस और रायपुर रूट की बसों की विशेष निगरानी करें।
सवाल बरकरार
रायपुर में 350 बसों पर कार्रवाई यह बताती है कि नियमों के पालन के लिए विभागीय इच्छाशक्ति मौजूद है। अब देखना यह है कि सरगुजा और उससे जुड़े प्रमुख रूटों पर कथित लगेज कारोबार, ओवरलोडिंग और दस्तावेजविहीन माल परिवहन के आरोपों की जांच कब शुरू होती है। जब तक जांच नहीं होती, तब तक यह सवाल बना रहेगा कि क्या यात्री बसें वास्तव में यात्रियों की सुविधा के लिए चल रही हैं, या फिर वे धीरे-धीरे ‘चलता-फिरता पार्सल गोदाम’ बनती जा रही हैं?


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