Breaking News

संपादकीय

लेख@पचास के बाद पेरेंट्स और बच्चे का भविष्य

देर से संतान,जल्दी चिंताएँ? विज्ञान ने मानव जीवन को अनेक सुविधाएँ और संभावनाएँ प्रदान की हैं। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति ने उन दंपतियों के लिए भी माता-पिता बनने का मार्ग खोल दिया है,जो किसी कारणवश प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्ति में सक्षम नहीं थे। आईव्हीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) जैसी तकनीक ने हजारों परिवारों को संतान सुख दिया है। निःस्संदेह यह …

Read More »

लेख@फर्जी डिग्रियां और टूटता भरोसा

भारत आज दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। यद्ध ही युवा शक्ति ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी मानी जाती है। देश के लाखों विद्यार्थी हर वर्ष कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं,विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रमों और व्यावसायिक प्रशिक्षणों से गुजरते हैं। वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। परिवार अपनी बचत,समय और उम्मीदें उनकी शिक्षा पर …

Read More »

लेख@बेगुनाह जिंदगियों से खेलता भ्रष्ट तंत्र और दिल्ली के अंतहीन अग्निकांड

हर अग्निकांड के बाद एक ही सवाल : जिम्मेदार कौन? पिछले दिनों दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौजरानी क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हमारे यहां हादसे अचानक नहीं होते बल्कि उन्हें पैदा किया जाता है। 21 लोगों की दर्दनाक मौत,दर्जनों घायल, धुएं में घुटती सांसें,तीसरी मंजिल से जान बचाने के लिए …

Read More »

लेख@पुनर्वास पट्टे की भूमि का हस्तांतरण

सरगुजा में कानूनी सवाल,फर्जीवाड़े के आरोप और आजीविका सुरक्षा का संकट रगुजा जिले में पुनर्वास पट्टे से प्राप्त भूमि के क्रय-विक्रय एवं पंजीयन पर लगाई गई रोक ने एक बार फिर उस गंभीर प्रश्न को सामने ला दिया है,जिस पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। पुनर्वास के उद्देश्य से दी गई भूमि,जिसे प्रभावित परिवारों की आजीविका और सामाजिक …

Read More »

लेख@जैव-विविधता संरक्षण में भारत की बड़ी उपलब्धि

2.76 लाख से अधिक जैव-विविधता समितियां बनीं,2.72 लाख रजिस्टर तैयारकानून,समुदाय और तकनीक के समन्वय से मजबूत हो रहा संरक्षण तंत्र,2030 तक वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने पर फोकस जैव-विविधता संरक्षण के क्षेत्र में भारत लगातार मजबूत कदम बढ़ा रहा है। राष्ट्रीय स्तर से लेकर गांवों और शहरों तक विकसित त्रि-स्तरीय व्यवस्था के माध्यम से देश जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके …

Read More »

लेख@कई फायदों वाली प्लास्टिक मुद्रा

युपीआई और डिजिटल पेमेंट की क्रांति ने निःसंदेह भारत के वित्तीय परिदृश्य को नया रूप दिया है। आज देश भर में हर महीने लगभग 20 अरब से अधिक लोग यूपीआई का प्रयोग करते हैं,वहीं दूसरी ओर ऐसा भारत भी है, जहां किसान,मजदूर,स्थानीय बाजार,छोटे दुकानदार से लेकर ग्रामीण समुदाय आदि लेनदेन नकद में ही करते हैं। इससे नकद मुद्रा की मांग …

Read More »

लेख@लोकतंत्र का व्यंग्य या लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर संकट?

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह केवल मतदान की व्यवस्था नहीं, बल्किसंवाद,सहमति,असहमति, संवैधानिक मर्यादाओं और सामाजिक उत्तरदायित्वों का एक सशक्त तंत्र है। लोकतंत्र की शक्ति विरोध में निहित है, लेकिन उसकी गरिमा विरोध की शैली, उद्देश्य और मर्यादा से निर्धारित होती है। हाल के दिनों में चर्चित हुई तथाकथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’(सीजेपी) इसी संदर्भ में गंभीर विमर्श की …

Read More »

लेख@आधुनिक दुनिया और इंसानियत की पुकार

कभी-कभी बैठकर मैं सोचती हूँ कि वक्त के साथ यह दुनिया कितनी बदल सी गई है। बाहर से देखें तो सब कुछ आधुनिक सा हो गया है — ऊँची इमारतें, तेज इंटरनेट,चाँद-मंगल तक पहुँचने के सपने। लेकिन इंसान के अंदर की सोच? वो अब भी पुरानी जंजीरों में जकड़ी हुई है,आज भी एक इंसान की पहचान जाति-धर्म,रंग-रूप, ऊंच-नीचे से किया …

Read More »

लेख@कॉकरोच जनता पार्टी का बिगुल जंतर मंतर का आंदोलन

भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है। जिसमें जनता द्वारा चुने गए जनता के प्रतिनिधि जनता के लिए काम करते हैं। लोकतंत्र के अंतर्गत देश के प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्र रूप से अभि व्यक्ति,अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का अधिकार है। ये अधिकार और प्रणाली देश की जनता को सशक्त करती है । सुप्रीम कोर्ट के जज द्वारा की गई एक टिप्पणी …

Read More »

लेख@किधर जाएं बेचारे बूढ़े मां-बाप

हमारे शास्त्रों में माता-पिता को परमात्मा से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है। कोई जमाना था जब लोग श्री रामचंद्र जी द्वारा पिता दशरथ की आज्ञा मानकर 14 वर्ष बनवास जाने की बात कह कर गर्व महसूस किया करते थे। और वह भी क्या जमाना था जब श्रवण कुमार द्वारा अपने अंधे माता-पिता को कावड़ में बिठाकर तीर्थ स्थानों‌ …

Read More »