आज दुनिया भर में मनुष्य के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी दुनिया के देशों को समय-समय पर चेतावनी देता रहता है। कुछ वर्ष पूर्व आई कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। मगर वैज्ञानिकों की तत्परता से वैक्सीन निर्माण होने के चलते वह नियंत्रण में आ गई थी। …
Read More »संपादकीय
लेख@ दम तोड़ती प्याऊ की परंपरा
किसी समाज या समूह में लंबे समय से चली आ रही किसीपरंपरा का अंत हो जाना कई बार खुशियां देता है,पर कई बार यह भीतर से रुला देता है। परंपराओं का प्रारंभ और अंत विकासशील समाज के लिए आवश्यक भी है। परंपराएं टूटने के लिए ही होती हैं, पर कुछ परंपराएं ऐसी होती हैं, जिनका टूटना मन को दुखी कर …
Read More »@घुमंतू गीत सीरीज@कहानी@ स्वयं सिद्धा
ट्रेन की खिड़की से आती गर्म हवा दिल्ली की ओर बढ़ते सफर की थकान को थोड़ा कम कर रही थी। मैं अपनी सीट पर शांत बैठी थी—मन में अगले दिन के सरकारी काव्यपाठ और सम्मान समारोह की हल्की-सी तैयारी और उतनी ही सहजता। तभी एक महिला मेरे सामने वाली सीट पर आकर बैठीं। उम्र रही होगी कोई सत्तर के आस-पास। …
Read More »लेख@ शिक्षा में अर्थ स्वावलंबन अनिवार्य
किसी भी देश की सामाजिक आर्थिक और मानवीय विकास का मूल उस देश की शिक्षा और शिक्षा नीति होती है। शिक्षा का विकास उस देश की संस्कृति और सभ्यता से होती है पर हमारे भारत का विडम्बना है की आज भी हमारे भारतीय शिक्षा पद्धति पर लार्ड मैकाले का प्रभाव नहीं गया है। मैकाले अच्छी तरह जानता था की किसी …
Read More »लेख@ केसीसी के नाम पर चालबाज़ी:निजीबैंकों की शिकारी पूँजी और किसानों की लूट
निजी बैंक किसानों को केसीसी योजना के तहत ऋण देते समय बीमा और पॉलिसियों के नाम पर चुपचाप उनके खातों से पैसे काट लेते हैं। हाल ही में राजस्थान में एक्सिस बैंक की ऐसी ही करतूत उजागर हुई जब एक किसान ने वीडियो बनाकर सच्चाई सामने रखी। यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे बैंकिंग तंत्र में फैली एक भयावह …
Read More »लेख@ क्या सचमुच सिमट रही है दामन की प्रतिष्ठा?
समय के साथ परिधान और समाज की सोच में बदलाव आया है। पहले दामन केवल वस्त्र का टुकड़ा नहीं, बल्कि मर्यादा और संस्कृति का प्रतीक माना जाता था। पारंपरिक वस्त्रों—साड़ी, घाघरा, अनारकली—को महिलाओं की गरिमा से जोड़ा जाता था। दामन की प्रतिष्ठा अब भी बनी हुई है, परंतु उसकी परिभाषा बदल चुकी है। परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाए …
Read More »लेख@ वैश्विक शांति में आतंकवाद एक बड़ा अवरोध
विस्तारवाद के नेपथ्य में आतंकवादसमग्र रूप से वैश्विक स्तर पर देखें तो आतंकवाद कई देशों के लिए बड़ा नासूर बन चुका है। भारत में पहलगाम घटना को लिया जाए तो निर्दोष 27 भारतीय पर्यटकों की निर्मम हत्या इसका एक बड़ा उदाहरण है। वैश्विक परिपेक्ष में देखें तो वैश्विक शांति के लिए आतंकवाद बहुत बड़ा अवरोध और बड़ी रुकावट है। इसका …
Read More »लेख@ हिन्दी की गिनतियों को सरल बनाने,सुधार किया जाना आवश्यक है…
आजादी के बाद भारत सरकार ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के स्थान पर राजभाषा घोषित कर संसद में 15 वर्षों में अंगेजी के स्थान पर हिन्दी का स्थान लिए जाने की बात कर विधान की धारा 351 के अनुसार सभी सरकारों पर हिन्दी ओर देवनागरी लिपि को विशेष प्रकार से उन्नयन करने का दायित्व लेने के बाद आज तक हिन्दी को …
Read More »लेख@ मैनेजमेंट के मखमली पर्दे के पीछे दम तोड़ती पत्रकारिता
पीआर मैनेजमेंट के चंगुल में फंसा आज का कलमकार, मैनेजर जी रहे लग्जरी लाइफ, पत्रकार टूटी बाइक पर…आज की पत्रकारिता एक गहरे संकट से गुजर रही है,जहाँ कलमकार हाशिए पर हैं और पीआर मैनेजमेंट का बोलबाला है। पत्रकार,जो कभी सच की आवाज थे,अब टूटी बाइक पर सवार होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं,जबकि मैनेजरों की जिंदगी लग्जरी में …
Read More »लेख@हिंसा और नफरत की बुनियाद पर बैठा पाकिस्तान
पाकिस्तान के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्हकिसी बात से असहमत होना और उसका हिंसात्मक विरोध करना दोनों अलग-अलग पहलू है। पर पाकिस्तान ऐसा देश है जिसकी पैदाइश ही नफरत और हिंसा के आधार पर हुई है। स्वतंत्रता के बाद जिन्ना ने पाकिस्तान में आतंकवाद का बीज बोया था। पाकिस्तान का यह बड़ा दुर्भाग्य रहा है कि वहां 18 निर्वाचित प्रधानमंत्री में …
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