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लेख@भारत के सर्वदलीय सांसदों द्वारा विदेशी धरती पर आतंक और आतंकिस्तान को बेनकाब

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भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक¸त इसकी विविधता और सर्वदलीय एकता है, विशेषकर जब बात आती है राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद जैसे विषयों की। बीते वर्षों में,भारत को लगातार सीमा पार आतंकवाद का सामना करना पड़ा है। ऐसे में भारत के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों ने जब विदेशी धरती पर एक साथ मिलकर आतंक और आतंकिस्तान (आतंकवाद को समर्थन देने वाला देश) को बेनकाब किया,तो वह न सिर्फ¸ कूटनीतिक दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक कदम था,बल्कि यह भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता का भी प्रमाण था।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज
संयुक्त राष्ट्र,यूरोपीय संसद, अमेरिका की कांग्रेस,ब्रिटिश पार्लियामेंट और अन्य वैश्विक फोरम्स पर भारतीय सांसदों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि आतंकवाद केवल भारत का नहीं, बल्कि समस्त विश्व का दुश्मन है। भारत ने विशेष रूप से पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की नीति का पर्दाफाश किया।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से यह प्रस्तुत किया किः पाकिस्तान की धरती पर आतंकी संगठनों के प्रशिक्षण शिविर संचालित होते हैं। 26/11 मुंबई हमला, पठानकोट और पुलवामा जैसे आतंकी कृत्यों में पाकिस्तान की संलिप्तता सिद्ध हो चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को पाकिस्तान सरकार की मूक सहमति या प्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है।
सर्वदलीय एकता का संदेश
इस मुद्दे पर भारतीय सांसदों ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर यह सिद्ध किया कि जब राष्ट्र की सुरक्षा और गरिमा की बात आती है, तब भारत एक है। भारतीय जनता पार्टी,कांग्रेस,तृणमूल कांग्रेस,समाजवादीपार्टी, बसपा,आप और अन्य दलों के सांसदों ने संयुक्त रूप से विश्व बिरादरी को संबोधित किया।
इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने तीन प्रमुख संदेश दिएः
भारत आतंकवाद के विरुद्ध
शून्य सहिष्णुता की नीति
अपनाता है।
आतंक का समर्थन करने
वाले देशों को आर्थिक और
कूटनीतिक रूप से अलग-
थलग किया जाना चाहिए।
वैश्विक आतंकवाद से लड़ने
के लिए साझा प्रयास
आवश्यक हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
भारत के इस संगठित प्रयास का विश्व मंच पर व्यापक स्वागत हुआ। अमेरिका, फ्रांस,ब्रिटेन,जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों ने भारत के दृष्टिकोण का समर्थन किया। कई देशों ने पाकिस्तान से यह पूछा कि वह अब भी आतंकवादियों को संरक्षण क्यों दे रहा है।यूरोपीय यूनियन के सांसदों ने विशेष सत्र में भारत की प्रस्तुति के बाद आतंक को पालने वाले देशों के विरुद्ध सख्त प्रतिबंधों की मांग भी उठाई।
मीडिया और जनमत पर प्रभाव
इस पहल ने वैश्विक मीडिया में भारत की छवि को एक पीडि़त नहीं, बल्कि नेता के रूप में प्रस्तुत किया। सीएनएन, बीबीसी,अल जजीरा,और रियूचर्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया हाउस ने इस प्रतिनिधिमंडल की सराहना करते हुए लिखा कि इंडिया यूनीटाईस टू फ ाईट टेरोरिज्म-बियोंड बॉर्डस ऑफ पॉलिटिक्स। भारत के सर्वदलीय सांसदों द्वारा आतंकवाद और आतंकिस्तान के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एकजुट होकर आवाज़ उठाना भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और परिपम्ता का प्रतीक है। इस पहल ने वैश्विक मंच पर भारत को न केवल आतंकवाद पीडि़त राष्ट्र के रूप में पहचान दिलाई,बल्कि यह भी दिखा दिया कि जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की होती है, तो भारत की समस्त राजनीतिक शक्तियाँ एक स्वर में बोलती हैं। आतंक के विरुद्ध यह भारत की हुंकार है शांति, विकास और न्याय की पुकार है।


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