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अम्बिकापुर@ एक तरफ नशे के खिलाफ ‘ऑपरेशन क्लीन’,दूसरी तरफ सवालों की लंबी सूची

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  • सुपरमैन रंजीत गुप्ता की टीम की लगातार कार्रवाई जारी… कोरिया में महुआ शराब पर भी शिकंजा,क्या कार्रवाई से खत्म होगा पूरा अवैध कारोबार?
  • नशीले इंजेक्शन से लेकर महुआ शराब तक अभियान तेज, 50 से ज्यादा प्रकरणों के बाद भी सरगुजा संभाग में अवैध नशे का नेटवर्क क्यों सक्रिय?


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,25 जून 2026 (घटती-घटना)।
सरगुजा संभागीय आबकारी उड़नदस्ता प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता की टीम लगातार अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। नशीले इंजेक्शनों के मामलों में सप्लायरों तक पहुंचने के बाद अब टीम ने कोरिया जिले में महुआ शराब के अवैध कारोबार पर बड़ी कार्रवाई की है। 25 जून को कोरिया जिले के चरचा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए आबकारी उड़नदस्ता टीम ने 21 लीटर महुआ शराब और करीब 250 किलो महुआ लाहन जब्त किया। मामले में पंडोपारा चरचा निवासी दिलमोहन तिर्की को गिरफ्तार कर आबकारी अधिनियम की धाराओं के तहत जेल दाखिल किया गया। विभाग इसे बड़ी सफलता बता रहा है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा है—क्या कार्रवाई के बाद अवैध नशे का कारोबार वास्तव में खत्म हो रहा है या सिर्फ नए मामलों के रूप में सामने आ रहा है?
मुखबिर से मिली सूचना,घर बना था शराब बनाने का अड्डा : आबकारी विभाग के अनुसार मदिरा दुकान चरचा के निरीक्षण के दौरान टीम को सूचना मिली कि पंडोपारा निवासी दिलमोहन तिर्की अपने घर में महुआ शराब बनाकर बिक्री करता है। सूचना की पुष्टि के लिए पहले आरोपी के घर से एक लीटर महुआ शराब खरीदी गई। इसके बाद टीम ने दबिश दी। तलाशी के दौरान एक कमरे में महुआ शराब बनाने की व्यवस्था मिली। वहां प्लास्टिक के डिब्बों में करीब 250 किलो महुआ लाहन और 20 लीटर तैयार महुआ शराब बरामद हुई। मौके पर महुआ लाहन नष्ट कर 21 लीटर शराब जब्त की गई और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
कार्रवाई पर सवाल नहीं,लेकिन नेटवर्क पर सवाल बरकरार : सुपरमैन रंजीत गुप्ता की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। कभी नशीले इंजेक्शन बेचने वालों पर कार्रवाई। कभी सप्लायरों की गिरफ्तारी। कभी अवैध शराब बनाने वालों पर छापेमारी।
लेकिन इन कार्रवाइयों के बीच जनता का सवाल यह है कि आखिर अवैध नशे का कारोबार बार-बार नए रूप में सामने क्यों आ रहा है?
यदि एक क्षेत्र में कार्रवाई होती है तो दूसरे क्षेत्र में नया मामला सामने आ जाता है। यानी समस्या केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती है।
नशीले इंजेक्शन मामले में भी यही सवाल : हाल ही में वाहिद अंसारी, मोशीम अंसारी और लुंड्रा क्षेत्र से कथित नशीले इंजेक्शन सप्लायरों की गिरफ्तारी हुई। सैकड़ों इंजेक्शन जब्त किए गए। आबकारी विभाग ने कार्रवाई को सफलता बताया।
लेकिन अब भी सवाल कायम है कि…
इन इंजेक्शनों की सप्लाई का मूल स्रोत कौन है?
बड़े सप्लायर कहां हैं?
कौन लोग इस कारोबार को आर्थिक रूप से चला रहे हैं?

गढ़वा कनेक्शन और संसाधनों की मजबूरी : सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता ने खुद बताया था कि नशीले इंजेक्शनों की सप्लाई गढ़वा क्षेत्र से जुड़ी हुई है,लेकिन वहां तक पहुंचने में विभाग को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने विभाग के पास सीमित संसाधन,साइबर सेल और तकनीकी सुविधाओं की कमी का भी उल्लेख किया। यहीं से सवाल उठता है कि यदि अवैध नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर फैला है तो क्या केवल स्थानीय स्तर की कार्रवाई पर्याप्त होगी? क्या पुलिस, ड्रग विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ संयुक्त रणनीति जरूरी नहीं है?
महुआ शराब से लेकर इंजेक्शन तक… चुनौती बड़ी : अवैध शराब और नशीली दवाइयों का कारोबार अलग-अलग जरूर दिखता है,लेकिन दोनों मामलों में एक बात समान है…
मांग और सप्लाई का नेटवर्क।
एक तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ शराब का अवैध निर्माण जारी है।
दूसरी तरफ शहरी क्षेत्रों में नशीले इंजेक्शन पहुंच रहे हैं।
ऐसे में केवल गिरफ्तारियां नहीं बल्कि पूरे सप्लाई सिस्टम पर प्रहार जरूरी माना जा रहा है।

जनता के सवाल…
क्या गिरफ्तार आरोपियों के पीछे मौजूद लोगों तक जांच पहुंचेगी?
क्या अवैध कारोबार से जुड़े आर्थिक नेटवर्क की जांच होगी?
क्या बार-बार सामने आने वाले क्षेत्रों में स्थायी निगरानी व्यवस्था बनेगी?
क्या आबकारी, पुलिस और ड्रग विभाग मिलकर संयुक्त अभियान चलाएंगे?
क्या केवल केस दर्ज होंगे या अवैध कारोबार की जड़ पर कार्रवाई होगी?

जनहित में ज्वलंत सवाल…?
रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में आबकारी उड़नदस्ता टीम की कार्रवाई लगातार जारी है। कोरिया में महुआ शराब पर कार्रवाई हो या सरगुजा में नशीले इंजेक्शनों के खिलाफ अभियान—विभाग अपनी सक्रियता दिखा रहा है।
लेकिन जनहित का सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—
यदि कार्रवाई लगातार हो रही है, तो अवैध नशे का कारोबार खत्म क्यों नहीं हो रहा?
असली सफलता तब मानी जाएगी जब केवल छोटे कारोबारी नहीं, बल्कि उनके पीछे खड़ी पूरी सप्लाई चेन कानून के शिकंजे में आए।


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