जब तक संरक्षण की चर्चाओं पर विराम नहीं और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं,तब तक राजस्व का रिसाव रुकना मुश्किल
- अंबिकापुर में ‘आधा बिल-आधा बिना बिल’ के कारोबार की चर्चाएं ट्रांसपोर्ट से खुदरा बाजार तक कर चोरी के तरीकों पर उठ रहे सवाल
- राज्य में एफआईआर के निर्देश,लेकिन स्थानीय स्तर पर कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल
अंबिकापुर,25 जून 2026 (घटती-घटना)।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने का उद्देश्य पूरे देश में एक पारदर्शी और जवाबदेह कर व्यवस्था स्थापित करना था,ताकि व्यापारिक लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रहे और कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके,लेकिन जमीनी हकीकत पर नजर डालें तो कई व्यापारिक क्षेत्रों में आज भी जीएसटी चोरी की चर्चाएं खुलेआम होती हैं। व्यापारियों,उपभोक्ताओं और कर सलाहकारों के बीच लंबे समय से यह चर्चा है कि कई जगहों पर माल की वास्तविक खरीद-बिक्री और बिलिंग में बड़ा अंतर रहता है,सवाल यह है कि क्या इस पूरे तंत्र से विभाग अनजान है,या फिर जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही? हाल ही में प्रदेश में जीएसटी चोरी के एक मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए,जिससे यह उम्मीद जगी कि अब बड़े स्तर पर कर चोरी के खिलाफ अभियान चलेगा,लेकिन दूसरी ओर अंबिकापुर जैसे शहर में लंबे समय से उठ रहे सवालों के बावजूद कार्रवाई का अभाव लोगों के मन में संदेह पैदा कर रहा है,आखिर ऐसा क्यों है कि कुछ मामलों में विभाग सक्रिय दिखाई देता है और कुछ मामलों में वर्षों तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आता?
ट्रांसपोर्ट से दुकान तक…
हर चरण पर जांच की जरूरत
जीएसटी चोरी केवल दुकान पर बिल न देने तक सीमित नहीं मानी जाती,कर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कहीं अनियमितता होती है तो उसकी शुरुआत माल की आपूर्ति से ही हो जाती है, सवाल यह भी है कि ट्रांसपोर्ट के दौरान भेजे गए माल और बिल में कितना मेल है? ई-वे बिल और वास्तविक माल का मिलान नियमित रूप से होता है या नहीं? बड़े गोदामों और थोक व्यापारियों का जोखिम आधारित ऑडिट कितनी बार किया जाता है? क्या विभाग डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध लेन-देन की पहचान कर रहा है? यदि इन सभी स्तरों पर प्रभावी निगरानी हो तो कर चोरी की संभावनाएं काफी हद तक कम हो सकती हैं।
केवल एक प्रतिष्ठान नहीं,पूरे बाजार की होनी चाहिए निष्पक्ष जांच-अंबिकापुर में पूर्व में एक इलेक्टि्रकल प्रतिष्ठान को लेकर जीएसटी संबंधी सवाल सार्वजनिक रूप से उठ चुके हैं, उस मामले में शिकायतें भी सामने आईं और बाजार में काफी चर्चा हुई,लेकिन व्यापारिक वर्ग का एक बड़ा हिस्सा यह मानता है कि यदि जांच निष्पक्ष और व्यापक हो तो मामला किसी एक प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं रहेगा,स्थानीय लोगों का कहना है कि कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बिलिंग और वास्तविक कारोबार के बीच अंतर की जांच आवश्यक है, यदि विभाग निष्पक्ष अभियान चलाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
क्या जीएसटी कार्यालय के सामने ही हो रहा खेल?-अंबिकापुर में जीएसटी विभाग का कार्यालय मौजूद है,इसके बावजूद यदि बाजार में लगातार कर चोरी की चर्चाएं होती रहें तो स्वाभाविक रूप से विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठते हैं, क्या विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं? यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों सीमित दिखाई देती है? क्या नियमित निरीक्षण पर्याप्त नहीं हैं? क्या जोखिम वाले व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सूची तैयार कर विशेष जांच की जा रही है? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर विभाग को देना चाहिए।
राजस्व का नुकसान केवल सरकार का नहीं,जनता का भी-जीएसटी से प्राप्त राजस्व ही सड़कों,अस्पतालों,स्कूलों,पेयजल योजनाओं और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं पर खर्च होता है,यदि कर चोरी होती है तो उसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ता है,यानी नुकसान केवल सरकारी खजाने का नहीं बल्कि पूरे समाज का होता है,इसलिए जीएसटी चोरी केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि सार्वजनिक हित से जुड़ा विषय भी है।
‘आधा बिल-आधा नगद’ का मॉडल,बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा इसी की…
व्यापारिक जगत में सबसे अधिक जिस तरीके की चर्चा होती है,वह है ‘आधा बिल-आधा बिना बिल’ का कथित कारोबार,बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि कई बार व्यापारी जितना माल वास्तव में खरीदते हैं, उसका पूरा बिल नहीं लिया जाता,उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यापारी ने 50 लाख रुपये का माल खरीदा,तो आरोप है कि केवल 25 लाख रुपये का बिल जारी कराया जाता है,जबकि शेष माल का भुगतान नगद या अन्य माध्यमों से कर दिया जाता है,ऐसी स्थिति में जीएसटी केवल बिल वाले हिस्से पर जमा होता है, जबकि बाकी कारोबार कर व्यवस्था से बाहर रह जाता है,यदि ऐसा हो रहा है तो यह केवल कर चोरी नहीं,बल्कि सरकारी राजस्व को सीधा नुकसान पहुंचाने का मामला है।
जहां बैंकिंग लेन-देन,वहीं जीएसटी… बाकी ‘उचंती’ में?
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार कई स्थानों पर बैंकिंग माध्यम से किए गए लेन-देन पर तो विधिवत जीएसटी बिल जारी किए जाते हैं,लेकिन नगद भुगतान वाले लेन-देन में पूरी पारदर्शिता नहीं रहती,यही वह जगह है जहां राजस्व को सबसे अधिक नुकसान होने की आशंका जताई जाती है,यदि वास्तविक कारोबार और बिलिंग के बीच बड़ा अंतर है,तो इसका सीधा प्रभाव सरकार के कर संग्रह पर पड़ता है।
अब केवल कार्रवाई
नहीं,पारदर्शिता भी जरूरी
जीएसटी विभाग की विश्वसनीयता तभी मजबूत होगी जब कार्रवाई निष्पक्ष,पारदर्शी और बिना किसी भेदभाव के होगी,यदि बाजार में कर चोरी की चर्चाएं निराधार हैं तो विभाग को तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए,यदि कहीं अनियमितताएं हैं तो उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, कानून का भय तभी स्थापित होगा जब नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे,जीएसटी व्यवस्था का मूल उद्देश्य कर संग्रह बढ़ाना ही नहीं, बल्कि व्यापार में पारदर्शिता लाना भी है, इसलिए अब समय आ गया है कि विभाग केवल शिकायतों पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक जोखिम विश्लेषण,नियमित ऑडिट और तकनीकी निगरानी के माध्यम से यह विश्वास दिलाए कि छत्तीसगढ़ में कर चोरी करने वाला चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है।
ज्वाइंट कमिश्नर राखी अग्रवाल का कहना…
ज्वाइंट कमिश्नर राखी अग्रवाल ने बताया कि बंसल इलेक्टि्रकल्स से संबंधित समाचार प्रकाशन के बाद संबंधित मामले को गंभीरता से लिया गया है,उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं,जांच के दौरान यदि यह पाया जाता है कि किसी व्यापारी द्वारा बिना वैध जीएसटी बिल के सामान का क्रय-विक्रय किया जा रहा है अथवा जीएसटी नियमों का उल्लंघन किया गया है,तो ऐसे व्यापारियों के विरुद्ध जीएसटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डिप्टी कमिश्नर एस.आर. भगत का कहना
डिप्टी कमिश्नर एस.आर. भगत ने कहा कि जीएसटी चोरी किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी,यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी व्यापारी द्वारा कर चोरी,बिना बिल कारोबार अथवा अन्य प्रकार की जीएसटी संबंधी अनियमितता की गई है,तो संबंधित व्यापारी के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी,विभाग कर चोरी के मामलों पर लगातार निगरानी रख रहा है और प्राप्त शिकायतों तथा तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ईमानदार व्यापारी भी होते हैं प्रभावित
बाजार में बड़ी संख्या ऐसे व्यापारियों की भी है जो हर लेन-देन का विधिवत बिल जारी करते हैं और समय पर जीएसटी जमा करते हैं, लेकिन यदि कुछ लोग कर चोरी कर अनुचित लाभ प्राप्त करते हैं तो इसका सबसे अधिक नुकसान उन्हीं ईमानदार व्यापारियों को होता है, क्योंकि उन्हें असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, इसलिए निष्पक्ष कार्रवाई ईमानदार व्यापारियों के हित में भी आवश्यक है।
जनता पूछ रही है…
द्द क्या अंबिकापुर में व्यापक जीएसटी ऑडिट होगा?
द्द क्या बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों की विशेष जांच होगी?
द्द क्या ई-वे बिल और वास्तविक स्टॉक का मिलान कराया जाएगा?
द्द क्या बिना बिल बिक्री पर विशेष अभियान चलेगा?
द्द क्या विभाग केवल शिकायत मिलने पर कार्रवाई करेगा या स्वयं भी जांच करेगा?
द्द क्या कार्रवाई सभी पर समान रूप से होगी?
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur