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संपादकीय

लेख @ ऑपरेशन सिन्दूर को लेकर सवाल-जवाब ठीक नहीं है

ऑपरेशन सिन्दूर को लेकर सवाल जवाब करना अब ठीक नहीं है 26/11/08 आतंकी हमले में कांग्रेस की यूपीए सरकार ने क्या किया ये जग जाहिर है भारतीय सेना में विश्वास होना बहुत जरूरी है हाल ही में कांग्रेस के एक प्रवक्ता का बयान आया ऑपरेशन सिन्दूर को लेकर कांग्रेस की देश सेवा को लेकर जिसमें एक बात भी यही थी …

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लेख@आम आदमी की सवारी है साइकिल

साइकिल मानव ऊर्जा को गतिशीलता में बदलने के लिए अब तक का सबसे कुशल साधन है। साइकिल का व्यापक रूप से परिवहन,मनोरंजन और खेल के लिए उपयोग किया जाता है साइकिलें उन क्षेत्रों में लोगों और सामान को ले जाने के लिए आवश्यक हैं जहां कम वाहन उपलब्ध हैं। साइकिल से वायु प्रदूषण को कम करने के साथ पूरे शरीर …

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सम्पादकीय @ जाति आधारित राजनीति

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जातिगत जनगणना से विकास के विभिन्न क्षेत्रों में पीछे छूट गए लोगों की मदद की बात की। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी की सटीकता पर भी विचार रखे। सम्मेलन में मोदी के तीसरे कार्यकाल की पहली वषर्गांठ और सुशासन के मुद्दों पर …

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कविता @ शिव का नाम अनूठा…

ओ शिव भोले,ओ शिव भोले,जीवन में कितना रस घोले,मन के प्राण में बस गए भोले,नव-निर्माण में रम गए भोले।ओ शिव भोले….मन आकुल है दरश को तेरे,छवि दिखला दो मेरे भोले,मन विचलित ना होने पाए,सब रंग उसमें भर दो भोले।ओ शिव भोले….तपन भले कैसी हो भोले,उसमें तुम शीतलता भर दो,करुणा के हो सागर भोले,प्रीत से मन की गागर भर दो।ओ शिव …

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लेख @ दतुअन वाली बुढि़या

तड़के सुबह गली में हमेशा की तरह बेसुरा आवाज में गला फाड़ती बçुढ़या मुखारी ले ला ओ मुखारी।रोज मेरी मीठी नींद टूट जाती,मन किया की बçुढ़या को डांट डपट कर कर भगा दूं कम से कम मेरे घर के सामने डंका ना दे । यह सोचकर भन्नाया हुआ घर से बाहर आया,बçुढ़या काफी दूर जा चुकी थी उसके सिर का …

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लेख @ बेटियां:विरासत नहीं,संवेदना का सचपितृसत्ता की विरासत में बेटियों की अनदेखी

लिपट के रोये हैं बेटियों से अपनी हालत पे,जो कहते थे विरासत के लिये बेटा जरूरी है…यह शेर एक टीस है,एक कराह है उस व्यवस्था की,जिसने बेटियों को सिर्फ¸ पराया धन समझ कर हमेशा हाशिए पर रखा। आज जब समाज के कंधे झुकते हैं,आँखें नम होती हैं,तो वही बेटियाँ उस पीड़ा की ढाल बनती हैं। जिनको कभी यह कहकर पराया …

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लेख @ कैसे खाओगे उनके हाथ की रोटियां जब पैदा ही नहीं होने दोगे बेटियां

हमारे समाज में बेटियों को लेकर एक कड़वा सच हमेशा से मौजूद रहा है। जब एक बेटी जन्म लेती है,तो कई घरों में उसे खुशी के बजाय बोझ समझा जाता है। पर क्या यही बेटी,जिसे जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता है,वही नहीं है जो आगे चलकर किसी की माँ बनती है,बहन बनती है और किसी घर को …

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लेख @ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में समाचारों की रफ्तार तो बेशक बढ़ी लेकिन साथ ही फर्जी खबरों और भ्रामक वीडियो की बाढ़ भी आई है…

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सम्पूर्ण मीडिया परिदृश्य को एक नया रूप दे दिया है। आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के युग में समाचारों की रफ्तार तो बेशक बढ़ी है लेकिन साथ ही फर्जी खबरों और भ्रामक वीडियो की बाढ़ भी आई है। आज आधुनिक तकनीक की मदद से फर्जी वीडियो बनाना इतना सरल है कि दर्शकों के लिए सही-गलत में …

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सम्पादकीय @ दिमाग ठंडा मगर खून गर्म

भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोहराया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाक व उसके आतंकवादी संचालकों को झुकने पर मजबूर कर दिया। राजस्थान के बीकानेर में रैली को संबोधित करते करते हुए उन्होंने कहा कि,जो लोग महिलाओं के माथे से सिंदूर पोंछने निकले थे,वे धूल में मिल गए। मोदी …

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लेख@सोशल मीडिया की चकाचौंध एक मृग मरीचिका की तरह है…

आज के समय में सोशल मीडिया की चकाचौंध ने लोगों को बहुत प्रभावित किया है। लोग अक्सर वास्तविकता और कल्पना के बीच का अंतर भूल जाते हैं और भ्रम के मायाजाल में फंस जाते हैं।लोगों को मीडिया साक्षरता के बारे में शिक्षित करना जरूरी है,मीडिया और सोशल मीडिया की चकाचौंध एक मृग मरीचिका की तरह है।तरीके से समझ सकें और …

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