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कविता@पत्ता-पत्ता …

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पत्ता-पत्ता,डाली-डाली
चहुंओर छाई होगी हरियाली।
कितना सुंदर वह उपवन होगा
जहाँ पक्षियों का कलरव होगा।
पुष्पित प्रफुल्लित वसुधा का
हरा-भरा सा आँचल होगा।
शीतल पवन झकोरा होगा
और बरसता बादल होगा।
पत्ता-पत्ता,डाली- डाली
चहुंओर छाई होगी हरियाली।
मन-मयूर बन नाचेगा तब
तो आओ पेड़ लगाएँ हम अब।
हरा-भरा कर दें धरती को
शुद्ध हवा फिर पायें हम।
गर्मी से फिर राहत होगी
पूरी सबकी चाहत होगी।
ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरण प्रदूषण
जल का संकट सब दूर हो जाएगा,
हर घर-आंगन,हर उपवन में जब
पत्ता-पत्ता लहराएगा।


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