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कविता @ आडंबर …

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माँ! हमें नदी किनारे बसना था न? कम से कम पानी तो मिल जाता। यहाँ तो कोई इंसान हमें झाँकने तक नहीं आता। नीम का छोटा पौधा चिंता व्यक्त करते हुए अपनी माँ से बोला। कोई बात नहीं बेटा,जितना मिले उतने में ही खुश रहना चाहिए। नीम दो टूक उत्तर दे कर शांत हो गई।
ये बात तो ठीक है नीम बहन…लेकिन आज कल हम सभी का जीवन खतरे में हैं। कब सरकारी आर्डर आए और हम पर बुलडोजर चल जाए। बाईं ओर से अशोक के पेड़ ने अपने पत्ते हिलाते हुए नीम से कहा।
बरगद,नीम,बाँस,शीशम और अन्य पेड़ भी साथ ही रहते थे। सब ने आज अपनी-अपनी बातें रखीं।
पहले कितना अच्छा वातावरण रहता था,लोग गर्मी के दिनों में हमारे पास बैठते थे। शुद्ध ऑक्सीजन लेते थे। अब तो हमें ही ऑक्सीजन की जरूरत सी पड़ रही है। सही कहा बहन आपने,बाँस के पेड़ ने सहमति दी।
खैर…हमें तो ईश्वर का आशीर्वाद मिला है बहन….! बरगद के पेड़ ने कहा। उसी समय नीम का पौधा बोला वो कैसे बरगद काका?
बरगद ने हँसते हुए कहा बेटा! हम तो ऐसे पेड़ हैं जो स्वयं उग आते हैं,हमें बाकी पेड़ों की तरह रोपने या लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। स्वावलंबी होकर बढ़ते हैं,समझे नीम के बच्चे! बरगद अपनी एक शाखा से नीम को सहलाते हुए बोला।
हाँ! काका लेकिन आजकल मनुष्य नज़र ही नहीं आते हैं। हमसे तो दूर ही रहते हैं बस, सफर करते समय वाहन से झाँक लेते हैं। अब कभी आए तो हम भी उनको छाया नहीं देंगे। रूठे स्वर में नीम का पौधा बोला।
तभी उसकी माँ बोली नहीं-नहीं बेटा हम स्वार्थी नहीं हो सकते। अगर हम स्वार्थी हुए तो भला उनमें और हम में क्या फ़र्क रह जाएगा?
हाँ नीम जीजी! आप भले ही लोगों के लिए कड़वी दवाई हैं लेकिन आपको जो स्वीकार कर लेता है उनके लिए जीवनदायिनी भी हैं। धन्य हैं आप! शीशम के पेड़ ने नीम के सामने सिर झुका कर कहा।
अरे! आज इतनी चहल-पहल कैसे? वो भी इस सड़क किनारे,जहाँ कोई वाहन रुकना भी पसंद नहीं करता। सड़क किनारे विकसित हुई नई कोंपलें बोलीं।
तभी,खैर का पेड़ बोला आज शाम तक ऐसा ही रहेगा। न जाने कितने ही लोग आयेंगे फोटो खिंचवाएँगे, अखबार में छपने के लिए।
हाँ! बच्चों यहाँ आज तुम्हारे नए-नए साथी भी आयेंगे। ये हर साल का लोगों का आडंबर है। फिर…कल हम रहें या न रहें,झाँकने तक नहीं आएँगे। नाराज़गी जताते हुए बरगद बोला। सी क्षण पाँच मंत्रीगण आए और खाली जगह देख वहाँ एक शीशम का पौधारोपण करते हुए बोले आ जाओ सभी एक साथ फोटो ले लेते हैं। अगले साल ये नीम,शीशम और बरगद के पुराने पेड़ों की कटाई का आर्डर देना पड़ेगा। रास्ता जाम कर बैठे हैं,जड़ें ज्यादा फैल गई है साथ ही साथ सड़क चौड़ीकरण भी तो करवाना है।
पसीने से तर-ब-तर सभी एक-एक पेड़ की छाया में आराम करते बातें करने लगे। ये सभी बातें सुन कर नीम के साथ-साथ जितनी भी नई कोंपलें थीं सभी मुरझाने लगे।


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