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संपादकीय

कविता @ पिता ईश्वर का साया…

मॉं अमृत की छाया और पिता ईश्वर का साया,मॉं से ही है मायका पिता से चाहतों का जायका,मॉं से बुलंद हौसला पिता सीखाते लेना फैसला,मॉं देती है शिक्षा पिता पास कराते जीवन परीक्षा ।मॉं है सारी जमीन और पिता है पूरा आसमान,मॉं है खुश अंतर्मन और पिता है शक्तिशाली तन,मॉं इस दिल की है जान पिता से मिलती पहचान,मॉं प्रभु …

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लेख @ इंटरनेट युग में मानव साम्यता, उसका तकनीकी कौशल और मनोविज्ञान

गूगल हेड मटर में कैंपस के लोन की बढ़ी हुई घास काटने के लिए मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है बल्कि बकरियों को लोन में छोड़ देते हैं ताकि लोन की घास एक सीमा से अधिक नहीं बढ़ सके। ऐसा इस लिए किया जाता है क्योंकि घास काटने की मशीनों से कंपन होता है और उससे कंपनी के कर्मचारियों, …

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लेख @ बैंकिंग प्रणाली को ग्राहक-केंद्रित बनाने की जरूरत

भारतीय बैंकिंग प्रणाली,जो देश की आर्थिक रीढ़ मानी जाती है,समय-समय पर ग्राहकों के साथ अनुचित व्यवहार के लिए आलोचना का विषय बनती रही है। हाल में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नये दिशा-निर्देशों का ऐलान किया गया जिनसे देश भर के बैंकों में नये सेवा शुल्कों और लेन देन की सीमाओं को लेकर असमंजस की स्थिति है। ऑल इंडिया बैंक …

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लेख @ हत्या के एक दोष पर दो उम्र कैद: न्याय की सीमा या उसका उल्लंघन?

सुप्रीम कोर्ट के द्वार पर खड़ा न्याय का गूढ़ सवाल दंड और संविधान की टकराहट: दोहरी उम्रकैद पर बहस जब सज़ा जीवन से लंबी हो जाए: क्या यही न्याय है? भारतीय न्याय व्यवस्था के दरवाज़े पर एक संवेदनशील और जटिल प्रश्न खड़ा है-क्या किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए दो बार उम्रकैद की सज़ा दी जा सकती है? …

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सम्पादकीय @ निष्कर्ष पर पहुंचना जरूरी

यूके्रन और रूस के बीच तुर्किये में शांति वार्ता का दूसरा दौर चल रहा है। इस खबर से दुनिया भर में राहत की सांस ली जानी चाहिए थी,लेकिन कोई इसके सार्थक परिणामों की उम्मीद नहीं कर रहा। दोनों देशों में अभी तक मृत सैनिकों के शवों और घायल सैनिकों की अदला-बदली पर ही सहमति बनी है, जबकि युद्ध तीन साल …

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कविता @ पिता श्री…

पिता में ही बसती है, प्रभु की मूरत,पिता के चरणों में ही रहती है जन्नत।जिंदगी भर करता रहूं मैं पूजत,पिता के बाहों में ही सुकून और राहत।पिता ही लगाते हैं, परिवारों के लिए जिंदगी का दांव,दिन भर दौड़ते भागते रहते है,ना थमे उनके पांव।पिता से मिलकर आनंदित लगे,जैसे बरगद की छांव,पिता के दिलों में बसती है,सबके लिए प्रेम भाव।पिता ही …

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लेख @ संस्कार और संस्कृति का अनुसरण भी शिक्षा का एक अभिप्राय

सोहन अपनी बिटिया सुमन को उच्च शिक्षा के लिए महानगर भेजना चाहता था उनका एक ख्वाब था की मैं कालेज की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं कर पाया तो क्या हुआ मैं अपने बच्ची को अच्छे स्थान और अच्छे विश्व विद्यालय में पढ़ाऊंगा। यह सोच लेकर सोहन अपनी बिटिया सुमन को दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला दिलाता हैं। अब सुमन दिल्ली …

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लेख @ सुपर पावर या सुपर खलनायक

अमेरिका को दुनिया की सुपर पावर कहा जाता है। इसका कारण यह है कि इस देश ने इतना आर्थिक विकास कर लिया है कि कि यह दुनिया का सबसे अमीर देश है। इसको टक्कर देने के लिए कभी यूएसएसआर दूसरी सुपर पावर हुआ करती थी जिसको बड़े तरीके से अमेरिका ने तुड़वाकर कई देशों में बांट दिया है लेकिन पुराने …

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लेख @ बच्चों को कृष्णोंदु बनने से बचाना होगा

हाल ही में पश्चिम बंगाल के पंसकुरा में 7 वीं क्लास में पढऩे वाले बच्चे ने इसलिए आत्महत्या कर ली, क्योंकि उसकी मां ने सबके सामने उसको डांट दिया था। बच्चा अपने पीछे एक सुसाइड नोट छोड़ गया है, जो झकझोर देने वाला है। अपने सुसाइड नोट में बच्चे ने लिखा था कि मां मैंने चोरी नहीं की। बच्चे के …

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लेख @ पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है…

भारतीय संस्कृति में पिता का स्थान आकाश से भी ऊंचा माना गया है,पिता की धर्म है,पिता ही संबल है,पिता ही ताकत है। पिता हर संतान के लिए एक प्रेरणा हैं, एक प्रकाश हैं और संवेदनाओं के पुंज हैं। इसके महत्व को दर्शाने और पिता व पिता तुल्य व्यक्तियों के योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल जून महीने के …

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