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@कविता @क्षितिज सी सीमाहीन

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स्वयं की आँखों से संसार को देखा,
संसार की आँखों से स्वयं को देखा ।
इस देखा -देखी में मैं इतना समझ पाई कि
देखने समझने परखने की खोज
स्वयं से होती है ।
जितनी यात्राएं देह की धरा पर होती है
उससे कई गुना ज्यादा यात्राएं
मन के धरातल पर होती है
मन की ये यात्राएं
क्षितिज सी सीमाहीन होती है ।
गरिमा राकेश गर्विता
कोटा
राजस्थान


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