लोकतंत्रों से अपेक्षा की जाती है कि वे वंचितों और अल्पवंचितों तक सेवाओं और सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में उच्च मानकों पर खरे उतरें। भारत में यह कसौटी और भी कठोर है। कोई भी नारा बिना उद्देश्य के और कोई भी दावा बिना परिणाम के नहीं टिकता। वास्तविक बदलाव का फायदा समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक …
Read More »संपादकीय
लेख @ अटल पेंशन योजना-सभी को आर्थिक सुरक्षा एवं सम्मान
वृद्धावस्था किसी भी व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण होता है और दुनिया भर की सरकारें अपने लोगों के लिए जीवन के इस चरण को अधिक स्थिर, सम्मानजनक, तनाव मुक्त और आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने का प्रयास कर रही हैं। जनसंख्या के अनुमानों से संबंधित तकनीकी समूह की रिपोर्ट (जुलाई 2020) के अनुसार, भारत में बुजुर्गों की आबादी …
Read More »लेख @ रिश्तों के लाश पर खड़ा आधुनिक प्रेम
इंदौर के राजा और मेघालय की सोनम के हनीमून पर हुई हत्या की घटना न केवल व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि सामाजिक, नैतिक और मानसिक स्तर पर गहरी चिंता पैदा करती है। यह अपराध आधुनिक प्रेम और विवाह संबंधों में फैलते अविश्वास और स्वार्थ की भयावह तस्वीर पेश करता है। साथ ही, मेघालय जैसे पर्यटन स्थलों की छवि भी प्रभावित होती …
Read More »सम्पादकीय @ सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देना
जाति जनगणना दशकों से निष्कि्रय रही है, जो अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों तक ही सीमित है। बिहार जाति जनगणना के बाद, एक व्यापक राष्ट्रीय जाति जनगणना की मांग एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में उभरी है। मौजूदा सरकार ने राजनीतिक स्पेक्ट्रम के पार से दबाव के बाद, जाति-आधारित जनगणना करने के अपने इरादे की घोषणा की है। इस …
Read More »कविता @ निशाचर…
देखो तो आज इस जमाने में,बिना अखबार के समाचार आया है।दिन के उजियारे को मिटाने,निशाचर के रूप में अंधकार आया है।। जो दिन में डरा-डरा सा रहता है,वो शाम ढलते ही भौंकने आया है।रात के अंधेरी सुनसान – गली में,राहगीरों का रास्ता रोकने आया है।। जिसको खुद दिशा का पता नहीं,वो मेरी दशा बिगाड़ने आया है।मुझसे जबरन झगड़ा करके,शराब का …
Read More »कविता @ पिता जी …
मेरे लिए आन बान,शान है पिताधरती का साक्षात भगवान है पिता..!सब रिश्तों का एक मिसाल है पिताअपनों के लिए बनते ढाल है पिता..!! छाले हो पांव में नहीं दिखाते है पिताकंधे पर बैठाकर भी घुमाते है पिता..!पैरो पर खड़ा होना सिखाते है पितासही, गलत का राह दिखाते है पिता..!! जिम्मेदारियों का बोझ उठाते है पितागम सहकर भी मुसकुराते है पिता..!अपनो …
Read More »लेख @ घरेलू हिंसा से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर
भारत में घरेलू हिंसा का सामना कर रही माताओं के बच्चों में मस्तिष्क संबंधी विकारों जैसे कि चिंता और अवसाद का खतरा काफी अधिक हैं। यह बात एक अध्ययन में सामने आई है। पेलोस वन पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन स्कूल कार्यक्रमों में ट्रामा के प्रति संवेदनशीलता और भारत में घरेलू हिंसा की रोकथाम में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता …
Read More »लेख @ विदेशों में नौकरी-धन की लिप्सा या पश्चिमी मस्त जीवन-शैली का आकर्षण…
विगत तीन दशकों में प्रतिभा पलायन भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है शिक्षा के क्षेत्र में बड़े शिक्षा संस्थानों में भारी-भरकम खर्च के बाद शिक्षित युवक विदेशों में अपनी सेवाएं प्रदान करने को सदैव तत्पर रहते हैं इसका बड़ा कारण विदेशी मुद्रा की कमाई और विदेशी चकाचौंध के तरफ आकर्षण ही होता है। इससे भारत के आर्थिक …
Read More »लेख @ भारत में आसियान देशों के अकेलापन,जीवन और जीवन का अंतिम पड़ाव
यह एक बहुत ही दर्दनाक और वास्तविकता भरा सच है कि एक इंसान पूरी जिंदगी मेहनत करता है,अपने परिवार और बच्चों के लिए त्याग करता है,लेकिन आखिर में जब वह अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर पहुंचता है,तो उसके अपने ही उसके कामों को नजरअंदाज कर देते हैं या उनकी कद्र नहीं करते।इससे इंसान को न केवल दुख होता है, …
Read More »लेख @ साहित्य के बाज़ार में बिकती संवेदनाएं
पुरस्कारों का सौदा साहित्य,आत्मा की पुकार है। वह सर्जक की साधना का फल होता है-तप,त्याग और संवेदना की अभिव्यक्ति। लेकिन आज, जब हम चारों ओर नज़र डालते हैं,तो पाते हैं कि यह साधना अब सहयोग राशि और नामांकन शुल्क की दुकान पर बिक रही है। पुरस्कार अब साधना की स्वीकृति नहीं, पैसे की नीलामी हो गए हैं। ऐसे में प्रश्न …
Read More »
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur