दुर्ग में चतुर्भुज राठी के घर-दफ्तर में छापेमारी,बिलासपुर में विवेक अग्रवाल के यहां दबिश
दुर्ग-भिलाई,30 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने दुर्ग और बिलासपुर में रेड मारी है। दुर्ग में ‘अमर इंफ्रा’ के संचालक और भाजपा नेता चतुर्भुज राठी के निवास और दफ्तर पर दबिश दी गई है, जहां टीम उनके आधा दर्जन फर्मों के वित्तीय दस्तावेजों और निवेश के रिकॉर्ड खंगाल रही है। भिलाई में गोविंद मंडल के घर फैक्ट्री में भी जांच जारी है। दूसरी ओर, बिलासपुर में बड़े सर्राफा कारोबारी विवेक अग्रवाल के घर और सदर बाजार स्थित ‘श्री राम ज्वेलर्स’ पर ईडी के 10 से ज्यादा अधिकारियों ने छापा मारा है। यह कार्रवाई शराब घोटाले के फरार आरोपी विकास अग्रवाल के सिंडिकेट से जुड़े तार खंगालने के लिए की जा रही है, जो अनवर ढेबर का करीबी और विवेक अग्रवाल का भाई बताया जा रहा है।
चतुर्भुज राठी भाजपा के सक्रिय नेताओं में से एक : बताया जा रहा है कि कारोबारी चतुर्भुज राठी की कई कंपनियां संचालित हैं, जिनमें अमर इंफ्रास्ट्रक्चर (अमर बिल्डकॉन), अमर महाबीर कोल माइंस, अमर प्राइवेट लिमिटेड और टार कारपेट प्राइवेट लिमिटेड प्रमुख हैं। इन कंपनियों का काम सड़क और पुल निर्माण जैसे सरकारी प्रोजेक्ट्स, शॉपिंग मॉल निर्माण और कोयला खनन से जुड़ा बताया जाता है। चतुर्भुज राठी भाजपा के सक्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान उनके चुनाव लड़ने की भी चर्चाएं रही थीं। वहीं, लोकसभा चुनाव 2024 के समय भी आयकर विभाग ने उनके ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए छापेमारी की थी।
ईओडब्ल्यू का दावा- राजस्व अधिकारियों ने किया घोटाला : आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने सरकार के निर्देश पर भारतमाला प्रोजेक्ट के मुआवजा घोटाले में एफआईआर दर्ज की है। इस मामले की जांच के बाद तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इसमें पटवारी, राजस्व निरीक्षक, प्रॉपर्टी डीलर और किसान भी शामिल हैं। मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जल्द ही ईओडब्ल्यू इस प्रकरण में अंतिम चालान पेश करने की तैयारी में है।
रायपुर के बाद सबसे ज्यादा गड़बड़ी कोरबा में
ईओडब्ल्यू के इसी मामले के आधार पर ईडी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है, लेकिन ईडी बड़े अधिकारियों (आईएएस) की भूमिका की अलग से जांच कर रही है। रायपुर के बाद सबसे अधिक मुआवजा गड़बड़ी कोरबा जिले में सामने आई है। यहां मनमाने तरीके से मुआवजा बांटा गया। ईडी कोरबा के तत्कालीन दो महिला और एक पुरुष कलेक्टर की भूमिका की जांच कर रही है। आरोप है कि इन्हें मोटा कमीशन पहुंचाया गया।
पूर्व मंत्री, विधायक और दिग्गज नेताओं पर भी जांच
ईडी पूर्व मंत्रियों, विधायकों के साथ दिग्गज भाजपा, कांग्रेस और जोगी कांग्रेस से जुड़े नेताओं की भूमिका की जांच कर रहा है। उनके करीबी और रिश्तेदारों के नाम सामने आए हैं, जिनके जरिए जांच एजेंसी नेताओं तक कडि़यां जोड़ रही है।
भाजपा-कांग्रेस के नेताओं के नाम आए सामनेः बता दें कि राज्य में निर्माणाधीन भारतमाला प्रोजेक्ट में हुए मुआवजा घोटाले में भाजपा-कांग्रेस के विधायक और दिग्गज नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इनकी भूमिका की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिन क्षेत्रों से यह प्रोजेक्ट गुजर रहा है, वहां दिग्गज नेताओं ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीदी। बाद में उन्हीं जमीनों का मुआवजा भी लिया।
पटवारी-आरआई की भूमिकाः पटवारी और आरआई ने मुआवजे के प्रकरण बनाकर कलेक्टर को भेजे। जिन पर हस्ताक्षर के बाद मुआवजा जारी किया गया। इन नेताओं से जुड़े लोगों के ठिकानों पर ईडी ने 27 अप्रैल को छापेमारी की थी। वहां से कुछ दस्तावेज मिले हैं,जिनसे नेताओं की कडि़यां जुड़ने के संकेत मिले हैं। इसमें एक दिग्गज भाजपा नेता से संबंधित दस्तावेज भी शामिल बताया जा रहा है।
12 जिलों के कलेक्टर जांच के घेरे मेंः 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इनमें से 6 कलेक्टरों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, जिन पर मोटा कमीशन लेने का आरोप है। इनमें रायपुर, कोरबा, धमतरी, बिलासपुर और दुर्ग के तत्कालीन कलेक्टरों के नाम सामने आए हैं। पकड़े गए आरोपियों ने भी पूछताछ में इनका जिक्र किया है।
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