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कोरिया@मजदूर दिवस विशेष :संघर्ष की जीत,पसीने का सम्मान!

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  • कोरिया जिले में लौटे ‘अच्छे दिन’ः लंबित मजदूरी और पेंशन के भुगतान से वनांचल में हर्षोल्लास
  • मजदूर दिवस से पूर्व ही बकाया मनरेगा भुगतान और पेंशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में लौटी रौनक


राजन पाण्डेय

कोरिया,30 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। कहते हैं कि मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी मिल जानी चाहिए,कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर और सोनहत ब्लॉक के हजारों मजदूरों और बुजुर्गों के लिए इस बार का ‘मजदूर दिवस’ (1 मई) महज एक तारीख नहीं, बल्कि उनके स्वाभिमान और संघर्ष की जीत का उत्सव बनकर आया है, जनवरी से लंबित मजदूरी और समाजिक सुरक्षा पेंशन के कारण जो घर अब तक मायूसी के साये में थे, वहां अब खुशहाली की नई इबारत लिखी जा रही है।
इच्छाशक्ति से मिटा आर्थिक ‘सूखा’
बीते चार महीनों से कोरिया जिले के वनांचल क्षेत्रों में आर्थिक संकट के बादल मंडरा रहे थे, होली और नवरात्रि जैसे बड़े त्योहार तंगी की भेंट चढ़ गए थे, लेकिन शासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इस गतिरोध को खत्म किया, छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय का ही सुखद परिणाम है कि जनवरी से मार्च तक का पूरा बकाया मनरेगा भुगतान अब क्लियर हो चुका है मजदूरी की राशि सीधे मजदूरों के खातों में पहुंचने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में फिर से जान आ गई है।
सामाजिक सुरक्षा को मिला नया संबल
इस सकारात्मक बदलाव का सबसे बड़ा असर समाज के सबसे कमजोर वर्ग पर पड़ा है। जिले के हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि मिल गई है। पेंशन की यह राशि खातों में आने से उन बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को सबसे बड़ी राहत मिली है, जो अपनी बुनियादी जरूरतों और दवाइयों के लिए संघर्ष कर रहे थे। अब उन्हें अपनी छोटी-मोटी जरूरतों के लिए किसी के आगे हाथ फैलाने की मजबूरी नहीं रही।
प्रशासनिक मुस्तैदी और स्थानीय बाजार में रौनक
इस समाधान के पीछे विधानसभा में उठे मुद्दों और विभागीय मंत्री विजय शर्मा की केंद्रीय स्तर पर की गई प्रभावी पैरवी का बड़ा हाथ रहा। प्रशासनिक मुस्तैदी का ही असर है कि तकनीकी खामियों को रिकॉर्ड समय में दूर कर भुगतान सुनिश्चित किया गया, इसका सीधा असर स्थानीय बाजारों में भी देखने को मिल रहा है; आर्थिक तरलता बढ़ने से छोटे दुकानदारों के चेहरे भी खिल उठे हैं और ग्रामीणों ने अपने पुराने कर्ज चुकाकर चैन की सांस ली है।
पसीने की हर बूंद की कीमत
आज मजदूर दिवस के गौरवशाली अवसर के पूर्व ही, कोरिया जिले के इन कर्मयोगियों के खातों में आई उनकी मेहनत की कमाई उनके जीवन में एक नया सवेरा लेकर आई है, यह जीत उन हाथों की है जो पत्थर तोड़कर विकास की राह बनाते हैं, शासन की इस त्वरित कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि पसीने की हर बूंद की कीमत होती है। मजदूर दिवस पर उन सभी कर्मठ हाथों को सलाम, जिनके परिश्रम से राष्ट्र का निर्माण होता है!
घटती-घटना ने उठाया था मामला
इस पूरे घटनाक्रम में ‘घटती-घटना’ समाचार पत्र की सजग पत्रकारिता अहम रही, जब वनांचल क्षेत्रों में मजदूर और बुजुर्ग आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, तब ‘घटती-घटना’ ने इस गंभीर मुद्दे को पूरी प्रमुखता और संवेदनशीलता के साथ प्रकाशित किया था। समाचार पत्र ने न केवल प्रशासन की उदासीनता को उजागर किया,बल्कि मजदूरों के घर के चूल्हे बुझने की कड़वी हकीकत को सत्ता के गलियारों तक पहुँचाया। खबर के प्रकाशित होने के बाद ही विभागीय मशीनरी सक्रिय हुई और शासन-प्रशासन पर त्वरित भुगतान के लिए दबाव बढ़ा। यह सफल परिणाम दर्शाता है कि जब मीडिया जनता की आवाज बनता है, तो व्यवस्था को झुकना पड़ता है और अंतिम व्यक्ति को उसका हक मिलकर रहता है।


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