रेडक्रॉस की स्थापना महान् मानवता प्रेमी जीन हेनरी डयूनेंट द्वारा की गई थी, इसीलिए उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रतिवर्ष विश्वभर में 8 मई का दिन ‘अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रॉस दिवस’ के रूप में मनाया जाता है और संस्था की गतिविधियों से आम आदमी को अवगत कराने के प्रयास किए जाते हैं। रेडक्रॉस की स्थापना वर्ष 1863 में हुई थी और अंतर्राष्ट्रीय …
Read More »संपादकीय
लेख@ रवींद्रनाथ टैगोर शांति के लिए हमेशा याद किए जाएंगे
रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता, भारत में हुआ था। रवींद्रनाथ ठाकुर (7 मई 1861 – 7 अगस्त 1941) एक बंगाली बहुश्रुत थे,जिन्होंने बंगाल पुनर्जागरण के कवि, लेखक, नाटककार, संगीतकार, दार्शनिक, समाज सुधारक और चित्रकार के रूप में काम किया। उन्होंने 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में प्रासंगिक आधुनिकता के साथ बंगाली साहित्य …
Read More »@7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष @स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना होगा
आज दुनिया भर में मनुष्य के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी दुनिया के देशों को समय-समय पर चेतावनी देता रहता है। कुछ वर्ष पूर्व आई कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। मगर वैज्ञानिकों की तत्परता से वैक्सीन निर्माण होने के चलते वह नियंत्रण में आ गई थी। …
Read More »लेख@ दम तोड़ती प्याऊ की परंपरा
किसी समाज या समूह में लंबे समय से चली आ रही किसीपरंपरा का अंत हो जाना कई बार खुशियां देता है,पर कई बार यह भीतर से रुला देता है। परंपराओं का प्रारंभ और अंत विकासशील समाज के लिए आवश्यक भी है। परंपराएं टूटने के लिए ही होती हैं, पर कुछ परंपराएं ऐसी होती हैं, जिनका टूटना मन को दुखी कर …
Read More »@घुमंतू गीत सीरीज@कहानी@ स्वयं सिद्धा
ट्रेन की खिड़की से आती गर्म हवा दिल्ली की ओर बढ़ते सफर की थकान को थोड़ा कम कर रही थी। मैं अपनी सीट पर शांत बैठी थी—मन में अगले दिन के सरकारी काव्यपाठ और सम्मान समारोह की हल्की-सी तैयारी और उतनी ही सहजता। तभी एक महिला मेरे सामने वाली सीट पर आकर बैठीं। उम्र रही होगी कोई सत्तर के आस-पास। …
Read More »लेख@ शिक्षा में अर्थ स्वावलंबन अनिवार्य
किसी भी देश की सामाजिक आर्थिक और मानवीय विकास का मूल उस देश की शिक्षा और शिक्षा नीति होती है। शिक्षा का विकास उस देश की संस्कृति और सभ्यता से होती है पर हमारे भारत का विडम्बना है की आज भी हमारे भारतीय शिक्षा पद्धति पर लार्ड मैकाले का प्रभाव नहीं गया है। मैकाले अच्छी तरह जानता था की किसी …
Read More »लेख@ केसीसी के नाम पर चालबाज़ी:निजीबैंकों की शिकारी पूँजी और किसानों की लूट
निजी बैंक किसानों को केसीसी योजना के तहत ऋण देते समय बीमा और पॉलिसियों के नाम पर चुपचाप उनके खातों से पैसे काट लेते हैं। हाल ही में राजस्थान में एक्सिस बैंक की ऐसी ही करतूत उजागर हुई जब एक किसान ने वीडियो बनाकर सच्चाई सामने रखी। यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे बैंकिंग तंत्र में फैली एक भयावह …
Read More »लेख@ क्या सचमुच सिमट रही है दामन की प्रतिष्ठा?
समय के साथ परिधान और समाज की सोच में बदलाव आया है। पहले दामन केवल वस्त्र का टुकड़ा नहीं, बल्कि मर्यादा और संस्कृति का प्रतीक माना जाता था। पारंपरिक वस्त्रों—साड़ी, घाघरा, अनारकली—को महिलाओं की गरिमा से जोड़ा जाता था। दामन की प्रतिष्ठा अब भी बनी हुई है, परंतु उसकी परिभाषा बदल चुकी है। परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाए …
Read More »लेख@ वैश्विक शांति में आतंकवाद एक बड़ा अवरोध
विस्तारवाद के नेपथ्य में आतंकवादसमग्र रूप से वैश्विक स्तर पर देखें तो आतंकवाद कई देशों के लिए बड़ा नासूर बन चुका है। भारत में पहलगाम घटना को लिया जाए तो निर्दोष 27 भारतीय पर्यटकों की निर्मम हत्या इसका एक बड़ा उदाहरण है। वैश्विक परिपेक्ष में देखें तो वैश्विक शांति के लिए आतंकवाद बहुत बड़ा अवरोध और बड़ी रुकावट है। इसका …
Read More »लेख@ हिन्दी की गिनतियों को सरल बनाने,सुधार किया जाना आवश्यक है…
आजादी के बाद भारत सरकार ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के स्थान पर राजभाषा घोषित कर संसद में 15 वर्षों में अंगेजी के स्थान पर हिन्दी का स्थान लिए जाने की बात कर विधान की धारा 351 के अनुसार सभी सरकारों पर हिन्दी ओर देवनागरी लिपि को विशेष प्रकार से उन्नयन करने का दायित्व लेने के बाद आज तक हिन्दी को …
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