- पशुपालन ऋण से धान शॉर्टेज तक आखिर किसके संरक्षण में फलता-फूलता रहा सहकारिता का खेल?
- एफआईआर,बर्खास्तगी,फिर बढ़ती संपत्ति! भैयाथान की समितियों पर आखिर किसका था संरक्षण?
- सोनपुर से शिवप्रसादनगर तकधान शॉर्टेज,पशुधन ऋण और 7.7 एकड़ जमीन ने खड़े किए बड़े सवाल
- भैयाथान सहकारिता का रहस्य, एफआईआर के बाद भी कैसे बढ़ती रही संपत्ति?
- सहकारिता का ‘सिस्टम’ या संरक्षण का खेल? एफआईआर,बर्खास्तगी और करोड़ों की संपत्ति पर उठे सवाल
- धान शॉर्टेज,पशुधन ऋण और संयुक्त जमीन तक क्या पूरे नेटवर्क की होगी निष्पक्ष जांच?
- सोनपुर-शिवप्रसादनगर समिति,पशुपालन ऋण प्रकरण,धान शॉर्टेज,संयुक्त भूमि रिकॉर्ड और पुनर्बहाली की चर्चाओं के बीच पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच की मांग तेज
ओंकार पाण्डेय
सूरजपुर,02 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। सूरजपुर जिले की जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की भैयाथान शाखा के अंतर्गत संचालित कई प्राथमिक कृषि साख समितियां वर्षों से विवादों में रही हैं, लगभग हर धान खरीदी सत्र के बाद किसी न किसी समिति में धान शॉर्टेज, स्टॉक सत्यापन, जांच,निलंबन या वित्तीय अनियमितताओं की चर्चाएं सामने आती रही हैं, लेकिन समय बीतने के साथ अधिकांश मामले ठंडे पड़ जाते हैं और अगले सीजन में फिर नए सवाल खड़े हो जाते हैं,इन विवादों के केंद्र में बार-बार कुछ नाम सामने आते रहे हैं,इनमें सोनपुर समिति,शिवप्रसादनगर समिति,पशुपालन ऋण वितरण प्रकरण,धान खरीदी व्यवस्था और कुछ कर्मचारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई प्रमुख हैं,अब उपलब्ध दस्तावेज़ों, न्यायालयीन रिकॉर्ड और राजस्व अभिलेखों को एक साथ देखने पर कई महत्वपूर्ण सवाल उभरते हैं।
सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट की कार्यवाही- एफआईआर के बाद जमानत के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया,सत्र न्यायालय ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए नियमित जमानत याचिका अस्वीकार कर दी,इसके बाद मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा, 13 दिसंबर 2023 की कार्यवाही में बचाव पक्ष ने कहा कि लाभार्थियों द्वारा लगभग आधी ऋण राशि वापस कर दी गई है,लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि यह तथ्य मूल जमानत आवेदन में स्पष्ट रूप से नहीं था,इसलिए अतिरिक्त हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया,अर्थात न्यायालय ने उस दावे को उसी समय स्वीकार नहीं किया बल्कि उसका दस्तावेज़ी समर्थन मांगा।
अब सामने आई जमीन की कहानी- इसी बीच राजस्व रिकॉर्ड में एक और तथ्य सामने आया, उपलब्ध फार्मर इन्फॉर्मेशन रिकॉर्ड में हदीश मोहम्मद और साधना कुशवाहा के नाम से संयुक्त रूप से कृषि भूमि दर्ज दिखाई देती है,रिकॉर्ड में कई खसरा नंबर दर्ज हैं और कुल कृषि रकबा लगभग 7.7 एकड़ (करीब 3.13 हेक्टेयर) के आसपास बताया गया है,यह रिकॉर्ड केवल भूमि का स्वामित्व दर्शाता है,भूमि 2025 खरीदी गई करोडो के मूल्य पर,धन का स्रोत क्या था? लेकिन उपलब्ध एफआईआर,विभागीय कार्रवाई और बाद में सामने आए भूमि रिकॉर्ड को देखते हुए स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि यदि किसी प्रकार का संदेह है तो संबंधित एजेंसियां आय के स्रोत और भूमि खरीद की स्वतंत्र जांच करें।
पहला अध्याय – सोनपुर समिति से शुरू हुआ विवाद
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित सोनपुर में वर्ष 2022 के दौरान किसानों ने शिकायत की कि पशुपालन ऋण वितरण में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं,शिकायत में आरोप था कि पात्र किसानों को ऋण नहीं मिला जबकि कुछ मामलों में कथित रूप से नियमों के विपरीत ऋण स्वीकृत किए गए,कलेक्टर सूरजपुर ने शिकायत को गंभीर मानते हुए जांच दल गठित किया,जांच के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ी,समिति के रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि कथित रूप से 71 हितग्राहियों को नियमों के विपरीत लगभग 1.88 करोड़ से अधिक ऋण वितरित किया गया,जिससे समिति को आर्थिक क्षति होने की बात कही गई। इसके बाद एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई।
एफआईआर दर्ज, मामला पहुंचा न्यायालय
04 जनवरी 2023 को झिलमिली (भैयाथान) थाना में अपराध क्रमांक 04/2023 दर्ज किया गया,एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 34, 409 और 420 के तहत अपराध दर्ज हुआ तथा आरोपियों में अजीत सिंह, साधना कुशवाहा और मन्नूलाल के नाम दर्ज हैं, एफआईआर दर्ज होना अपने-आप में दोष सिद्ध होना नहीं है, लेकिन यह दर्शाता है कि जांच एजेंसी ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर आपराधिक जांच शुरू की।
सेवा समाप्ति का आदेश
एफआईआर के साथ-साथ विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई हुई,सोनपुर समिति द्वारा जारी आदेश में साधना कुशवाहा की सेवा समाप्त की गई,आदेश में उल्लेख है कि वर्ष 2020-21 में धान खरीदी के दौरान लगभग 3559.93 क्विंटल धान शॉर्टेज पाया गया, पशुपालन ऋण वितरण में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए,समिति हितों की उपेक्षा तथा सेवा नियमों के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई, यही वह बिंदु था,जहाँ यह मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा।
सेवा समाप्ति के बाद सबसे बड़ा सवाल
दस्तावेज़ बताते हैं कि सेवा समाप्ति का आदेश जारी हुआ,लेकिन स्थानीय स्तर पर यह चर्चा लगातार बनी रही कि बाद में कथित रूप से ‘व्हाइट कार्ड एंट्री’ कैसे हुई,यदि वास्तव में सेवा समाप्ति के बाद किसी भी रूप में कार्य से पुनः जुड़ाव हुआ,तो उसका आदेश क्या था? किस अधिकारी ने अनुमति दी? क्या समिति के रिकॉर्ड में इसका उल्लेख है? इन सवालों का स्पष्ट सार्वजनिक उत्तर अभी तक सामने नहीं आया।
2025 की धान खरीदी और नया विवाद
वर्ष 2025 के धान खरीदी सत्र में फिर कई समितियां चर्चा में आईं,स्थानीय स्तर पर आरोप लगे कि कुछ धान खरीदी केंद्रों में रिकॉर्ड के अनुसार धान अधिक था लेकिन वास्तविक स्टॉक कम पाया गया,जांच के लिए तहसीलदार,एसडीएम और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की टीम बनाई गई,स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कुछ केंद्रों पर कमी मिली,बाद की जांच में वही स्टॉक पूरा पाया गया,यदि ऐसा हुआ,तो यह जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है,हालांकि इस संबंध में अंतिम विभागीय निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
कल पढि़ए – भाग 2
क्या धान शॉर्टेज और जमीन के बीच कोई संबंध जांच का विषय बना?
अप्रैल 2024 में नई Hyundai certa की डिलीवरी का सोशल मीडिया पोस्ट और उससे उठे सवाल।
भैयाथान शाखा की समितियों में बार-बार वही नाम क्यों चर्चा में आते हैं?
वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही पर उठ रहे प्रश्न।
और क्या सहकारिता विभाग पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराएगा?
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