कोरबा, 09 जून 2026। नगर निगम कोरबा में जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने अपनी कुर्सी छोड़ दी और निगम कार्यालय में जमीन पर बैठकर कामकाज शुरू कर दिया
रबा। नगर निगम कोरबा में जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने अपनी कुर्सी छोड़ दी और निगम कार्यालय में जमीन पर बैठकर कामकाज शुरू कर दिया
प्रतिमा अनावरण बना विवाद की जड़
इस पूरे विवाद की जड़ शहर के प्रमुख चौक चौराहों पर हुए प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम माने जा रहे हैं। आरोप है कि इन आयोजनों की जानकारी और आमंत्रण न तो महापौर को दिया गया और न ही निगम सभापति और संबंधित वार्ड पार्षदों को। जबकि इन सभी कार्यक्रमों में निगम प्रशासन और प्रदेश के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन मौजूद रहे।
लोकतंत्र पर हमला बताया
सभापति नूतन सिंह ठाकुर का कहना है कि यह केवल प्रोटोकॉल का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुने हुए जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पार्षदों को उनके ही क्षेत्र में होने वाले लोकार्पण कार्यक्रमों की जानकारी तक नहीं दी जा रही। 6 जून को 3 से 4 लोकार्पण कार्यक्रमों से महापौर और अध्यक्ष दोनों को अंधेरे में रखा गया।
सुनियोजित साजिश का आरोप
सभापति ने इसे सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से जनप्रतिनिधियों को दरकिनार करने की कोशिश बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर शहर की चुनी हुई नेतृत्व व्यवस्था को ही नजरअंदाज किया जाएगा, तो यह व्यवस्था किसके लिए काम कर रही है।
चेतावनी के बाद जमीन सत्याग्रह
दो दिन पहले ही सभापति ने चेतावनी दी थी कि यदि सोमवार तक जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जमीन पर बैठकर काम करेंगे। सोमवार को उन्होंने अपनी घोषणा पर अमल करते हुए कुर्सी का त्याग कर दिया।
निगम आयुक्त ने जारी किया नोटिस
घटनाक्रम के सामने आने के बाद नगर निगम आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लिया है। निगम सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू होने के बावजूद मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है।
जनप्रतिनिधि बनाम प्रशासन
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद केवल सूचना नहीं दिए जाने तक सीमित नहीं है। यह निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती खींचतान को भी उजागर करता है। सवाल उठ रहा है कि क्या शहर के विकास और सार्वजनिक कार्यक्रमों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को दरकिनार किया जा सकता है।सभापति के जमीन सत्याग्रह ने निगम की राजनीति को गरमा दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन क्या कदम उठाता है और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी किस दिशा में जाती है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur