निर्माण कार्यों में लाखों रुपये खर्च होने का दावा, कई काम अधूरे तो कई का धरातल पर नहीं मिला नामोनिशान
खबर प्रकाशित होने के बाद भी कार्रवाई नहीं, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
-संवाददाता-
खड़गवां,03 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। जनपद पंचायत खड़गवां अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंघत में विकास कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है,ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास के नाम पर लाखों रुपये की राशि खर्च दिखाई गई,लेकिन कई कार्य आज भी अधूरे हैं,जबकि कुछ कार्यों का धरातल पर कोई अस्तित्व ही दिखाई नहीं देता,मामले में पहले भी समाचार प्रकाशित होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में असंतोष है।
पूर्व और वर्तमान कार्यकाल दोनों पर उठे सवाल-ग्रामीणों का कहना है कि कथित अनियमितताएं केवल एक कार्यकाल तक सीमित नहीं हैं,उनके अनुसार पूर्व सरपंच के कार्यकाल में शुरू हुई गड़बडि़यों का सिलसिला वर्तमान पंचायत कार्यकाल में भी जारी है, आरोप है कि पंचायत में मूलभूत सुविधा मद,15 वें वित्त आयोग तथा अन्य योजनाओं की राशि का उपयोग नियमानुसार नहीं किया गया, कई कार्यों के लिए राशि आहरित होने के बावजूद निर्माण अधूरा है या मौके पर उसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिल रहा।
गांव का विकास नहीं,जिम्मेदारों का विकास हुआः– ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों की अपेक्षा जिम्मेदारों के आर्थिक हित अधिक साधे गए। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों में गांव में अपेक्षित विकास नहीं हुआ,जबकि सरकारी योजनाओं के नाम पर लगातार राशि खर्च होने का रिकॉर्ड मौजूद है, इससे ग्रामीणों के बीच पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कार्रवाई नहीं होने से बढ़ रहे संदेह-ग्रामीणों का कहना है कि कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायतें और समाचार प्रकाशित होने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है,कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा यह कहा जाता है कि शिकायतों और खबरों से कोई फर्क नहीं पड़ता तथा जांच भी उनके पक्ष में ही हो जाती है। हालांकि,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
निष्पक्ष जांच की मांग- ग्रामीणों ने मांग की है कि पूर्व एवं वर्तमान पंचायत कार्यकाल में स्वीकृत सभी विकास कार्यों, आहरित राशि, माप पुस्तिका, उपयोगिता प्रमाण पत्र तथा मौके पर हुए निर्माण का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराया जाए, उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों पर अंकुश लग सके और विकास योजनाओं का लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंच सके।
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