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कोरिया@ रनई में लगा सरगुजा महराज का दरबार

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  • प्रदेश अध्यक्ष की तैयारी या कोरिया कांग्रेस की गुटबाजी खत्म करने की कवायद?
  • रनई में सजा सरगुजा महराज का दरबार,कोरिया कांग्रेस की राजनीति में हलचल तेज
  • चाय पर चर्चा या शक्ति प्रदर्शन? रनई में टीएस सिंहदेव के दरबार ने बढ़ाई सियासी गर्मी
  • गुटबाजी खत्म करने निकले सरगुजा महराज? रनई में कांग्रेसियों की बड़ी बैठक से उठे सवाल
  • रनई में राजनीतिक दरबार, टीएस सिंहदेव के दौरे से कांग्रेस खेमों में बढ़ी हलचल
  • प्रदेश कांग्रेस की कमान की तैयारी? कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय हुए टीएस सिंहदेव
  • टीएस सिंहदेव का कोरिया दौरा बना चर्चा का विषय, प्रदेश अध्यक्ष की तैयारी या संगठन साधने की कवायद?


कोरिया ,12 मई 2026(घटती-घटना)।
कोरिया जिले के रनई गांव में सोमवार की शाम राजनीतिक हलचल कुछ अलग ही नजर आई, गांव के जमींदार परिवार के घर अचानक ऐसा माहौल बना मानो किसी राजदरबार की बैठक चल रही हो,कांग्रेस के बड़े नेता,पुराने कार्यकर्ता, जिलाध्यक्ष, पूर्व विधायक और दोनों जिलों—कोरिया व एमसीबी—के कांग्रेसी नेता एक जगह जुटे थे,वजह बने छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व उप मुख्यमंत्री और सरगुजा के कद्दावर कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव, अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह दरबार सिर्फ चाय पर चर्चा थी या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा था?
बिना आधिकारिक घोषणा के बढ़ी राजनीतिक चर्चा
दिलचस्प बात यह रही कि इस पूरे कार्यक्रम को लेकर किसी भी स्तर पर कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई,न इसे संगठनात्मक बैठक कहा गया,न कार्यकर्ता सम्मेलन और न ही राजनीतिक रणनीति बैठक,लेकिन कार्यक्रम में जिस तरह कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी,उसने कई सवाल खड़े कर दिए,राजनीतिक गलियारों में अब दो तरह की चर्चाएं सबसे ज्यादा चल रही हैं,पहला—क्या टीएस सिंहदेव प्रदेश कांग्रेस कमेटी छत्तीसगढ़ का अध्यक्ष बनने की तैयारी में हैं और इसी कड़ी में वे जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोल रहे हैं? दूसरा—क्या यह दौरा कोरिया जिले में वर्षों से चली आ रही कांग्रेस की गुटबाजी खत्म करने का प्रयास था?
दो दिन पहले से शुरू हो गई थी तैयारी
रनई गांव का माहौल दो दिन पहले से ही राजनीतिक रंग में रंग चुका था,सोशल मीडिया पर लगातार संदेश प्रसारित हो रहे थे। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को सूचना दी जा रही थी, प्रिंट मीडिया में भी टीएस सिंहदेव के आगमन की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हो रही थीं, इससे साफ था कि कार्यक्रम भले अनौपचारिक बताया जा रहा हो,लेकिन इसकी तैयारी किसी बड़े राजनीतिक आयोजन जैसी थी, सोमवार शाम जैसे ही टीएस सिंहदेव रनई पहुंचे, कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा और उत्साह दोनों देखने लायक था। कार्यक्रम में कोरिया एवं एमसीबी जिले के कांग्रेस कमेटी जिलाध्यक्ष भी मौजूद रहे। बैकुण्ठपुर की पूर्व विधायक की मौजूदगी ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी।
जमींदार परिवार से पुराने संबंधों की चर्चा
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी खूब रही कि रनई गांव के जमींदार परिवार से टीएस सिंहदेव के पुराने और आत्मीय संबंध हैं, यही वजह रही कि उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए रनई गांव को चुना, लेकिन राजनीति में कोई भी मुलाकात सिर्फ संबंध तक सीमित नहीं मानी जाती, खासकर तब जब चुनावी और संगठनात्मक गतिविधियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हों, अब लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ आत्मीय मुलाकात थी या फिर इसके पीछे भविष्य की राजनीतिक रणनीति छिपी थी?
प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में सिंहदेव?
प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से संगठनात्मक बदलाव की चर्चाएं चल रही हैं, ऐसे में टीएस सिंहदेव का लगातार कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाना राजनीतिक संकेत माना जा रहा है, कांग्रेस के भीतर भी यह चर्चा जोरों पर है कि यदि संगठन में बड़ा बदलाव होता है तो सिंहदेव एक मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ सकते हैं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरगुजा क्षेत्र में टीएस सिंहदेव की पकड़ मजबूत रही है और वे कार्यकर्ताओं के बीच सौम्य एवं सहज नेता की छवि रखते हैं, ऐसे में जिलों में जाकर दरबार शैली में संवाद करना महज सामान्य कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन कांग्रेस के अंदरूनी गलियारों में यह चर्चा लगातार तेज हो रही है कि सिंहदेव संगठन में बड़ी भूमिका की तैयारी कर रहे हैं।
गुटबाजी खत्म करने का प्रयास या सिर्फ औपचारिक संवाद?
कोरिया जिले में कांग्रेस की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है, यह अंदरखाने चलने वाली राजनीति नहीं बल्कि खुलकर दिखाई देने वाली खेमेबाजी मानी जाती है, चुनावों से लेकर संगठनात्मक बैठकों तक इसका असर कई बार सामने आ चुका है, ऐसे में रनई का यह आयोजन यदि गुटबाजी खत्म करने की कोशिश था, तो सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस कोशिश का कोई असर दिखाई देगा? क्योंकि कार्यक्रम में भले सभी चेहरे एक मंच के आसपास नजर आए हों, लेकिन राजनीतिक दूरी खत्म हुई या नहीं, यह आने वाला समय बताएगा, जिले के कई कांग्रेस कार्यकर्ता अब यह कहते नजर आ रहे हैं कि एक शाम की चाय से वर्षों पुरानी गुटबाजी खत्म होना आसान नहीं है, हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि कम से कम संवाद की शुरुआत तो हुई।
सौम्य राजनीति की पहचान हैं : सिंहदेव
टीएस सिंहदेव की राजनीति हमेशा आक्रामक बयानबाजी से अलग रही है, वे अपने शांत स्वभाव, संयमित भाषा और तथ्य आधारित बयान के लिए पहचाने जाते हैं, राजनीतिक विरोधियों पर भी व्यक्तिगत टिप्पणी से बचना उनकी शैली का हिस्सा रहा है, यही कारण है कि उनके हर दौरे और बैठक को राजनीतिक दृष्टि से गंभीरता से देखा जाता है, रनई गांव में लगा यह दरबार भी अब सिर्फ स्थानीय आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक अर्थ तलाशे जा रहे हैं।
चाय पर चर्चा या भविष्य की रणनीति?
कार्यक्रम को कुछ लोग चाय पर चर्चा बता रहे हैं, लेकिन जिस तरह दोनों जिलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही, उसने इस चर्चा को साधारण नहीं रहने दिया, अब कोरिया और एमसीबी जिले में एक ही सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है—आखिर इस दरबार का असली उद्देश्य क्या था? क्या यह प्रदेश कांग्रेस की राजनीति का नया अध्याय लिखने की शुरुआत है? क्या सिंहदेव संगठन में नई भूमिका की तैयारी कर रहे हैं? या फिर यह सिर्फ कांग्रेसियों को एक मंच पर लाने की कोशिश थी? फिलहाल इन सवालों के जवाब किसी के पास नहीं हैं, लेकिन इतना जरूर है कि रनई गांव में लगी यह राजनीतिक चौपाल अब पूरे सरगुजा संभाग में चर्चा का विषय बन चुकी है।


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