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कविता @ पिता जी …

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मेरे लिए आन बान,शान है पिता
धरती का साक्षात भगवान है पिता..!
सब रिश्तों का एक मिसाल है पिता
अपनों के लिए बनते ढाल है पिता..!!

छाले हो पांव में नहीं दिखाते है पिता
कंधे पर बैठाकर भी घुमाते है पिता..!
पैरो पर खड़ा होना सिखाते है पिता
सही, गलत का राह दिखाते है पिता..!!

जिम्मेदारियों का बोझ उठाते है पिता
गम सहकर भी मुसकुराते है पिता..!
अपनो कि हर चाह पूरी करते है पिता
दो में से दो रोटी देना जानते है पिता..!!


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