रायपुर,28 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में आगामी जनगणना कार्यों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त कानूनी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत और नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारी जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य से खुद को अलग नहीं कर सकते और न ही ड्यूटी करने से इनकार कर सकते हैं।
क्या है जनगणना का महत्व? कोर्ट ने अपने आदेश में साफ शब्दों में कहा है कि जनगणना एक ‘राष्ट्रीय दायित्व’ है, और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या ड्यूटी से बचने की कोशिश कतई स्वीकार्य नहीं होगी।
ड्यूटी अनिवार्य : कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि पंचायत और नगरीय निकायों के कर्मचारी जनगणना के कार्य के लिए बाध्य हैं। इस सरकारी काम से बचने का उनके पास कोई कानूनी विकल्प मौजूद नहीं है।
राष्ट्रीय कार्य को प्राथमिकताः अदालत ने जनगणना को देश का एक महत्वपूर्ण कार्य माना है, जिसके सुचारू संचालन के लिए सभी संबंधित सरकारी कर्मियों का सहयोग अनिवार्य है।
कानूनी बाध्यता : इस फैसले के बाद, अब जनगणना ड्यूटी पर तैनात किए गए कर्मचारियों को बिना किसी बहाने के अपना दायित्व निभाना होगा। इस कार्य में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न करना अब कानूनी जटिलताओं को न्योता देने जैसा होगा।
प्रशासन के लिए बड़ी राहत : हाईकोर्ट का यह आदेश राज्य प्रशासन के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में 1 मई 2026 से जनगणना का कार्य (मकान सूचीकरण और गणना) शुरू होने जा रहा है। ऐसे में कोर्ट की यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि प्रशासन को जनगणना कार्य को समयबद्ध और त्रुटिहीन पूरा करने में अब कर्मचारियों की ओर से किसी भी तरह के विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा।
क्या है जनगणना का महत्व?
जनगणना देश के विकास की योजनाओं को बनाने का आधार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इस बार जनगणना के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती की गई है। प्रशासन की ओर से पहले ही यह निर्देश दिए जा चुके हैं कि जनगणना अवधि के दौरान अवकाश और मुख्यालय छोड़ने पर भी कड़ाई बरती जाएगी।
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