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अंबिकापुर/रायपुर@वाहन खरीदी में जबरन बीमा और एक्सेसरी पर सख्तीआदेश के बाद भी जमीनी हकीकत पर सवाल

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  • राहत का आदेश…लेकिन भरोसा अभी अधूरा
  • वाहन खरीदी में जबरन बीमा पर सख्ती, परिवहन विभाग का बड़ा आदेश
  • ‘शोरूम से ही बीमा कराओ’ दबाव खत्म? आदेश के बाद भी उठे सवाल
  • वाहन खरीदारों को राहत,अब बीमा और एक्सेसरी आपकी पसंद से
  • जबरन बीमा और कैशलेस के नाम पर दबाव पर प्रशासन सख्त
  • डीलरों की मनमानी पर रोक,बीमा कहीं से भी कराने की आजादी
  • वाहन खरीद में ‘पैकेज सिस्टम’ पर ब्रेक,उपभोक्ताओं को मिली राहत
  • बीमा के नाम पर डराना-धमकाना अब नहीं चलेगाः परिवहन विभाग
  • कैशलेस सुविधा के नाम पर खेल बंद? नए आदेश से मचा हलचल
  • वाहन खरीदी में उपभोक्ता अधिकार मजबूत, जबरन बीमा पर रोक
  • शोरूम की शर्तों से आजादी, बीमा और एक्सेसरी अब वैकल्पिक


-संवाददाता-
अंबिकापुर/रायपुर,28 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में वाहन खरीदी के दौरान लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या शोरूम द्वारा बीमा और एक्सेसरी जबरन थोपने पर आखिरकार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है, परिवहन आयुक्त द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि किसी भी ग्राहक पर बीमा या अतिरिक्त सामान खरीदने का दबाव नहीं बनाया जा सकता, यह आदेश उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर जरूर है,लेकिन वर्षों से चले आ रहे व्यवहार और जमीनी अनुभव को देखते हुए यह सवाल भी उतना ही बड़ा है कि क्या यह निर्देश वास्तव में लागू हो पाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि है की वाहन
खरीदी में ‘पैकेज’ की मजबूरी

छत्तीसगढ़ सहित कई हिस्सों में वाहन खरीदना केवल गाड़ी लेने भर का मामला नहीं रह गया था, ग्राहक जब शोरूम में जाते थे, तो उन्हें एक ‘पैकेज’ दिया जाता था, जिसमें गाड़ी के साथ बीमा, एक्सेसरी और कई अन्य सेवाएं जोड़ दी जाती थीं, ग्राहकों के पास विकल्प होते हुए भी उन्हें यह महसूस कराया जाता था कि यह सब अनिवार्य है, खासकर बीमा के मामले में यह दबाव सबसे ज्यादा देखने को मिलता था।
शोरूम में ग्राहकों को झेलनी
पड़ती थी सबसे ज्यादा परेशानी

वाहन खरीदी के समय ग्राहकों को सबसे ज्यादा दिक्कत शोरूम में ही होती थी, वाहन पसंद करने और कीमत तय होने के बाद असली चुनौती शुरू होती थी बीमा और एक्सेसरी के चयन की,अक्सर शोरूम के कर्मचारी ग्राहकों से सीधे कहते थे कि बीमा उन्हें वहीं से कराना होगा, यदि ग्राहक बाहर से बीमा कराने की बात करते,तो उन्हें हतोत्साहित किया जाता था,इस स्थिति में ग्राहक खुद को असहाय महसूस करते थे,क्योंकि गाड़ी की डिलीवरी भी कई बार बीमा से जोड़ दी जाती थी।
रिन्यूअल के समय भी
जारी रहता था दबाव

समस्या केवल वाहन खरीद तक सीमित नहीं थी, बीमा के रिन्यूअल के समय भी ग्राहकों को इसी तरह के दबाव का सामना करना पड़ता था, उन्हें फिर से यह कहा जाता था कि यदि बीमा बाहर से कराया गया,तो भविष्य में क्लेम नहीं मिलेगा या कैशलेस सुविधा नहीं दी जाएगी, इस कारण कई ग्राहक हर साल उसी शोरूम या एजेंसी से बीमा कराने को मजबूर रहते थे।
कैशलेस सुविधाः सबसे बड़ा हथियार
शोरूम और डीलरों द्वारा ग्राहकों पर दबाव बनाने का सबसे बड़ा माध्यम ‘कैशलेस सुविधा’ थी, ग्राहकों को यह बताया जाता था कि केवल शोरूम से कराए गए बीमा पर ही कैशलेस सुविधा मिलेगी, जबकि बाहर से कराए गए बीमा पर उन्हें यह सुविधा नहीं दी जाएगी,हालांकि नियमों के अनुसार, यदि बीमा कंपनी और सर्विस सेंटर के बीच टाई-अप है,तो कैशलेस सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए, चाहे बीमा कहीं से भी कराया गया हो।
सरगुजा संभाग की स्थितिः अलग तरह की विसंगति-सरगुजा संभाग में एक अलग प्रकार की स्थिति सामने आई है, यहां अधिकांश शोरूम सूरजपुर जिले में संचालित होते हैं,लेकिन उनके ट्रेड सर्टिफिकेट अंबिकापुर के नाम से जारी हैं, यह व्यवस्था नियमों के अनुरूप नहीं मानी जा रही और इस पर भी सवाल उठ रहे हैं, हालांकि यहां दबाव के मामले अपेक्षाकृत कम बताए जाते हैं,लेकिन पारदर्शिता की कमी साफ नजर आती है।
क्या आदेश से बदलेगी स्थिति?- यह आदेश निश्चित रूप से सकारात्मक पहल है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे जमीनी स्तर पर कितनी गंभीरता से लागू किया जाता है, यदि निगरानी मजबूत नहीं हुई और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई,तो यह आदेश केवल कागजों तक सीमित रह सकता है।
डर और दबाव का माहौलः ‘यहां से नहीं कराओगे तो नुकसान होगा ‘-
ग्राहकों के अनुसार उन्हें कई तरह के डर दिखाए जाते थे, जैसे अगर बाहर से बीमा कराओगे तो क्लेम नहीं मिलेगा, कैशलेस सुविधा बंद हो जाएगी, कंपनी सहयोग नहीं करेगी, इन बातों से ग्राहक मानसिक रूप से दबाव में आ जाते थे और अंततः शोरूम के माध्यम से ही बीमा लेने के लिए मजबूर हो जाते थे, भले ही वह महंगा क्यों न हो।
हर वर्ग के वाहन खरीदार हुए प्रभावित-
यह समस्या केवल कार खरीदारों तक सीमित नहीं थी, दोपहिया वाहन लेने वाले युवा, परिवार के लिए कार खरीदने वाले उपभोक्ता, व्यवसाय के लिए कमर्शियल वाहन लेने वाले लोग, कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर खरीदने वाले किसान, सभी इस दबाव का सामना करते रहे, खासकर कमर्शियल और ट्रैक्टर श्रेणी में बीमा राशि अधिक होने के कारण ग्राहकों पर आर्थिक बोझ भी काफी बढ़ जाता था।
बीमा की ऊंची लागत और विकल्प की कमी-
शोरूम के माध्यम से कराए जाने वाले बीमा की कीमत अक्सर बाजार दर से अधिक होती थी, ग्राहक यदि खुद बीमा कंपनियों या ऑनलाइन माध्यम से तुलना करते, तो उन्हें कम कीमत में बेहतर विकल्प मिल सकते थे, लेकिन जानकारी के अभाव और शोरूम के दबाव के कारण अधिकांश लोग ऐसा नहीं कर पाते थे और अधिक कीमत चुकाने को मजबूर हो जाते थे।
परिवहन आयुक्त का आदेश : क्या कहा गया है…
17 अप्रैल 2026 को जारी आदेश में परिवहन आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि बीमा किसी भी कंपनी से कराया जा सकता है,डीलर किसी विशेष बीमा के लिए बाध्य नहीं कर सकते,एक्सेसरी पूरी तरह वैकल्पिक हैं,जबरदस्ती करना अनुचित व्यापार व्यवहार है इसके साथ ही सभी पंजीयन प्राधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र के डीलरों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करें।
कानूनी आधार : उपभोक्ता के अधिकार सुरक्षित
आदेश में मोटर वाहन अधिनियम,1988, केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 और ढ्ढक्रष्ठ्रढ्ढ के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया गया है कि बीमा अनिवार्य है,लेकिन स्रोत चुनना ग्राहक का अधिकार है, एक्सेसरी वैकल्पिक हैं किसी भी प्रकार का ‘टाई-इन अरेंजमेंट’ अवैध है यह प्रावधान उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से स्वतंत्रता प्रदान करते हैं।
शिकायत पर कार्रवाई का प्रावधान
यदि किसी डीलर द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके खिलाफ केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत कार्रवाई की जाएगी, इसमें लाइसेंस पर प्रभाव डालने जैसी कड़ी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है,जिससे डीलरों के लिए यह चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
उपभोक्ताओं की
भूमिका भी महत्वपूर्ण

इस पूरे मामले में उपभोक्ताओं की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है, उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए, दबाव पड़ने पर शिकायत करनी चाहिए, और विकल्पों की तुलना कर निर्णय लेना चाहिए,जब तक ग्राहक खुद सजग नहीं होंगे,तब तक इस तरह की प्रथाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा।
सही दिशा में कदम,
लेकिन लंबा सफर बाकी

वाहन खरीदी के दौरान बीमा और एक्सेसरी को लेकर वर्षों से चली आ रही समस्याओं पर यह आदेश एक महत्वपूर्ण कदम है, इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद जरूर है, लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की होगी, अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी सख्ती से अमल कराता है और क्या वास्तव में वाहन खरीदारों को बिना दबाव के निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिल पाती है या नहीं।


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