- संयुक्त संचालक कार्यालय के अन्य कर्मचारियों सहित विकासखंड स्तर के अधिकारी कर्मचारियों की निकाली जाए यदि सीडीआर खुलेंगे लेनदेन और भी राज
- संयुक्त संचालकों पर एफ आई आर भी होगा दर्ज,अब संशोधन कर धांधली करने वाले बचेंगे नहीं
- शिक्षा विभाग का सबसे बड़ा घोटाला अब शिक्षामंत्री के लिए सरकार की साख का सवाल,शिक्षामंत्री एक्शन में
- सरगुजा संभाग से शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की हुई थी शुरुआत,घटती घटना ने भ्रष्टाचार को शुरू में ही किया था बेनकाब
- शिक्षक पदस्थापना संशोधन मामले में और भी खुल सकते हैं राज,कई और अधिकारी कर्मचारी भी पूरे मामले में हैं संलिप्त
- पूरे भ्रष्टाचार में संयुक्त संचालक कार्यालय सहित विकासखंड स्तर के कार्यालयों की रही है बड़ी भूमिका,जांच की शिक्षक कर रहे मांग
-रवि सिंह-
अम्बिकापुर /बैकुण्ठपुर 08 अगस्त 2023 (घटती-घटना)। घटती-घटना का अंदेशा सही निकला,शिक्षक पदोन्नति पदस्थापना में हुए बड़े भ्रष्टाचार को लेकर घटती घटना ने सबसे पहले खबर प्रकाशित किया था और करोड़ों के लेनदेन की बात प्रमुखता से उठाई थी,किस तरह शिक्षकों से मनचाही पोस्टिंग के नाम पर करोड़ों की उगाही हो रही है इसको लेकर घटती घटना लगातार प्रमुखता से खबरों का प्रकाशन करता चला आ रहा था और अब खबरों की सच्चाई सबके सामने है और भ्रष्टाचार का यह बड़ा मामला सरकार के लिए उसकी किरकिरी साबित हुई है और सरकार मामले में कड़े रुख में नजर आ रही है। यह अंदेशा पहले से ही था की मामले में संशोधन आदेश शिक्षकों की पोस्टिंग के निरस्त होंगे और अब वही होने जा रहा है और शिखा मंत्री ने इसके लिए डिपीआई को निर्देश जारी कर दिया है और जब न आदेश जारी हो जाए।
मामले में सबसे बड़ा पहलू यह है की संयुक्त संचालकों ने शिक्षकों से पैसा लेकर उन्हे मनचाही पोस्टिंग देने में कोई गलती नहीं की लेकिन उन्होंने कुछ शिक्षकों को व्यक्तिगत लाभ देने के चक्कर में अधिकांश को हाशिए पर डाल दिया उन्हे या तो दूरस्थ भेज दिया या उन्हे पदोन्नति नहीं लेने के लिए ही बाध्य कर दिया जिसका परिणाम यह हुआ की पूरे मामले की पोल खुल गई और शिक्षकों का ही विरोध सामने आ गया और पूरा भ्रष्टाचार साबित हो गया। भ्रष्टाचार का यह खेल लाखों या करोड़ों का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के हिसाब से जोड़ा जाए तो अरबों का था और जिसकी लगातार प्रकाशित हो रही खबरों के बाद सरकार को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा और अब इस मामले में आदेश निरस्त करने की तैयारी कर ली गई है। तत्कालीन शिक्षामंत्री की छुट्टी भी इसी का परिणाम है और सरकार को इस बात का भी आभास हो गया था की शिक्षामंत्री की भूमिका मामले में संदिग्ध है और इसलिए सरकार ने उन्हें भी समय रहते हटा दिया। नए शिक्षा मंत्री ने पूरे मामले में पूरी गंभीरता दिखाई और सरकार की हो रही किरकिरी से उन्होंने सरकार को बचाने का पूरा प्रयास किया अब उसका ही परिणाम सामने आने वाला है और सरकार ने इसके लिए बेहतर तैयारी भी की है और उच्च न्यायालय में कैविएट भी सरकार ने दाखिल कर दिया है यह सूत्रों से मिली जानकारी है।देर ही सही अब जिन शिक्षकों ने पूरी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर भ्रष्टाचार की बात सामने लाई थी और उन्होंने पूरी प्रक्रिया को ही दोषपूर्ण बताया था वह अब न्याय मिलने की बात कर रहें हैं और उनका यह भी कहना है की अभी मामले में सभी भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही नहीं हुई है और मामले में यदि ठीक तरीके से जांच होगी तो और भी भ्रष्टाचारी सामने आयेंगे जो पूरे मामले में संलिप्त थे।
सरकार की साख पर उठ रहा था सवाल
शिक्षामंत्री ने लिए बड़ा निर्णय- शिक्षक पदोन्नति साथ ही पदस्थापना मामले में प्रदेश सरकार की साख पर ही सवाल उठ खड़ा हुआ था,सरकार की लगातार किरकिरी हो रही थी,शिक्षक तो शिक्षक सत्ताधारी दल के नेता भी संयुक्त संचालकों की मनमानी साथ ही वसूली से त्रस्त हो गए थे ,नेताओं की भी सुनने संयुक्त संचालक तैयार नहीं थे,जब मामले की पूरी जानकारी सरकार तक बार बार पहुंचने लगी सरकार भी सकते में आई और अपनी साख बचाने सरकार ने मामले की जांच करवाई जो सही साबित हुई और तत्काल संयुक्त संचालकों को निलंबित कर दिया गया ,अब शिक्षा मंत्री ने अपने तेवर और कड़े कर दिए हैं और उन्होंने संशोधन सूची ही निरस्त करने का फरमान जारी कर दिया है और डीपीआई को कार्यवाही के लिए स्वतंत्र अधिकार प्रदान कर दिया है।शिक्षा मंत्री के इस निर्णय को सरकार की साख बचाने के हिसाब से देखा जा रहा है और इसे बड़ा निर्णय माना जा रहा है।
दोषियों के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज कराने का भी दिया शिक्षा मंत्री ने निर्देश
शिक्षा मंत्री ने भ्रष्टाचार के इस बड़े मामले में सभी दोषियों के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज करने के भी निर्देश जारी कर दिए हैं,अब पूरे मामले में एफ आई आर दर्ज होने के बाद दोषियों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। दोषियों में संयुक्त संचालक सीधे तौर पर दोषी हैं और सबसे पहले उन्ही पर एफ आई आर दर्ज होगा यह सूत्रों का कहना है।। अब देखना यह है की एफ आई आर दर्ज कब तक किया जाता है और मामले में कितने लोगों के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज होती है।
सही तरीके से की जाए जांच तो मामले में दोषियों की संख्या होगी बेहिसाब,सीडीआर निकाल कर जांच हो शिक्षकों की है मांग
भ्रष्टाचार के इस मामले में यदि सही तरीके से जांच की जाए तो इसमें दोषियों की संख्या बेहिसाब हो सकती है। कुछ पीड़ित शिक्षकों की माने तो पूरे मामले में संयुक्त संचालक कार्यालय के कई अधिकारी कर्मचारी,विकासखंड स्तर के अधिकारी कर्मचारी,संयुक्त संचालक कार्यालय में पदस्थ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इस तरह बड़ी संख्या में पूरे भ्रष्टाचार में लोग शामिल थे जिन्होंने या जिनके माध्यम से लेनदेन हुआ। शिक्षकों की मांग है की सभी की सीडीआर निकाल कर जांच होनी चाहिए।अब देखना यह है की सरकार की तरफ से जारी निर्देश के पालन में डीपीआई किस तरह की कार्यवाही करता है क्या वह निष्पक्ष और सूक्ष्मता से जांच करता है या अब तक जिन्हे दोषी माना गया है उन्ही तक वह कार्यवाही कर अपनी पीठ थपथपा लेता है। सीडीआर से बहुत से राज खुल सकेंगे जिसमे संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय के समस्त कर्मचारियों साथ ही विकासखंड स्तर के कर्मचारियों के सीडीआर की जांच होने से इस मामले के और पहलू समाने आएंगे यह शिक्षकों का ही दावा है।
जिन शिक्षकों ने पैसे देकर प्राप्त की पदस्थापना उन्हे होगा दो तरफा नुकसान,पदस्थापना भी बदली जायेगी,पैसा वापस मिलेगा यह भी तय नहीं
पूरे मामले में यदि पदस्थापना संशोधन वाली निरस्त हुई तो उन शिक्षकों को दो तरफा नुकसान है जिन्होंने पैसे देकर मनचाही पोस्टिंग प्राप्त की,संशोधन आदेश निरस्त होने से पैसे देकर मनचाही पोस्टिंग पाने वाले शिक्षकों को जो दो तरफा नुकसान होगा उसमे एक तो वह मनचाही पोस्टिंग से हांथ धो बैठेंगे और दूसरा वह पैसा वापस पा सकेंगे यह तय नहीं है,क्योंकि संयुक्त संचालकों ने पैसे लेकर पोस्टिंग उनकी मनचाही कर दी थी और अब यदि उसे शासन निरस्त करती है तो इसमें उनका क्या दोष यह कहकर पैसे लेने वाले उन्हे पैसा वापस देने से मना कर सकते हैं।
पैसा लेकर किया गया था पोस्टिंग आदेश में संशोधन, छुट्टी के दौरान ही स्कूल खुलवाकर कराया गया था कार्यभार ग्रहण,दोषी एक नहीं हजार
पदोन्नति प्रक्रिया में किस तरह अधिकारियों ने मनमानी की इसका जीता जागता उदाहरण यह भी है की पोस्टिंग आदेश में पहले संशोधन किया गया और बाद में उनका कार्यभार ग्रहण कैसे अवकाश के दौरान संभव जो इसका भी पूरा ध्यान रखा गया, शिक्षकों को संशोधन आदेश देकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय भेजा गया जहां उनके कार्यभार ग्रहण करने लिए पूरी तैयारी पूर्व से तय थी,उन्हे अवकाश के दौरान ही स्कूलों में भेजकर भी कार्यभार ग्रहण कराया गया जबकि जिस जिस दिनांक को कार्यभार ग्रहण स्कूलों में किया गया उस दौरान ग्रीष्मकालीन अवकाश था और किसी अन्य कर्मचारी का हस्ताक्षर पंजी में दर्ज नहीं पाया जाएगा। कुल मिलाकर जल्द से जल्द कार्यभार ग्रहण कराने पैसे देने वालो के लिए पूरी व्यवस्था तय थी।
महिला शिक्षकों को भी पैसा नहीं देने की स्थिति में नहीं बक्शा गया,भेजा गया जिले से बहार
पदोन्नति मामले में महिला शिक्षकों को भी नहीं बख्शा गया,जिन महिला शिक्षकों ने पैसा नही दिया उन्हे जिले से बाहर पदस्थ किया गया। कुल मिलाकर जिन्होंने पैसा दिया वही दिव्यांग माने गए,जिन्होंने पैसा दिया वही बीमार माने गए और जिन्होंने पैसा दिया वही महिला जिले में पोस्टिंग प्राप्त कर सकी,अन्य इस श्रेणी में पात्र अपात्र कर दिए गए।
सरगुजा संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय के कई संलिप्त अधिकारियों कर्मचारियों पर भी हो कार्यवाही,शिक्षक कर रहे मांग
सरगुजा संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय जहां से प्रदेश के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की शुरुआत हुई वहां पदस्थ कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी कई मामलो में शाखा प्रभारी पर भी जांच कर कार्यवाही होनी चाहिए यह शिक्षकों की मांग है। शिक्षकों के अनुसार कार्यालय के कई सीधे तौर पर वसूली में संलिप्त थे और वही मध्यस्थ थे जिन पर कार्यवाही जरूरी है वरना वह फिर धांधली जरूर करेंगे और उनके ऊपर कार्यवाही जरूरी है।
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