अच्छे आचरण पर दो वर्ष की सजा हुई थी माफ,लूज मोशन की शिकायत पर भर्ती था मेडिकल कॉलेज अस्पताल
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,25 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। केंद्रीय जेल अंबिकापुर से रिहा किए गए एक आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी की रिहाई के करीब दो घंटे बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो गई। बंदी बीमारी के कारण पहले से अस्पताल में भर्ती था और नियमानुसार उसे जेल के बजाय अस्पताल से ही रिहा किया गया था। घटना के बाद परिजन उसे घर ले जाने के बजाय पार्थिव शरीर लेकर लौटे। गांधीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम खलिबा निवासी 66 वर्षीय श्यामजतन साय दूसरी पत्नी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। वर्ष 2022 में सजा सुनाए जाने के बाद से वह केंद्रीय जेल अंबिकापुर में निरुद्ध था। जेल प्रशासन के अनुसार अच्छे आचरण और कार्यकुशलता के आधार पर शासन ने उसकी दो वर्ष की सजा माफ कर दी थी। इसके बाद 24 जुलाई को दोपहर 12.30 बजे उसकी रिहाई निर्धारित थी। रिहाई से एक दिन पहले 23 जुलाई की शाम उसकी तबीयत बिगड़ गई। पेचिश (लूज मोशन) की शिकायत होने पर उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। निर्धारित समय पर 24 जुलाई को दोपहर 12.30 बजे जेल प्रशासन ने अस्पताल में ही रिहाई की औपचारिकताएं पूरी कर उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इसके करीब दो घंटे बाद दोपहर 2.30 बजे उसकी मौत हो गई।
बेटी लेने पहुंची, लेकिन शव लेकर लौटी : रिहाई से पहले जेल प्रशासन ने श्यामजतन की बेटी सानिया को सूचना देकर अस्पताल बुलाया था। वह पिता को घर ले जाने पहुंची थी, लेकिन रिहाई के कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। ऐसे में उसे पिता का पार्थिव शरीर लेकर लौटना पड़ा।
जेल में अच्छे व्यवहार पर मिली थी राहत : केंद्रीय जेल अधीक्षक अक्षय राजपूत ने बताया कि श्यामजतन का जेल में आचरण संतोषजनक था। इसी कारण शासन ने उसकी दो वर्ष की सजा माफ की थी। रिहाई की सूचना मिलने पर वह काफी खुश था। उन्होंने बताया कि यदि किसी बंदी की रिहाई के समय वह अस्पताल में भर्ती रहता है तो नियम के अनुसार उसे दोबारा जेल नहीं लाया जाता, बल्कि अस्पताल से ही रिहाई की प्रक्रिया पूरी कर परिजनों को सौंप दिया जाता है। श्यामजतन के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई।
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