रायपुर,09 सितम्बर 2026। छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोक पर्व पोला तिहार (पोरा) इस साल ११ सितंबर २०२६, शुक्रवार को मनाया जाएगा। खेती-किसानी और पशुधन से गहराई से जुड़ा यह पर्व किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है। पोला के दिन किसान अपने बैलों और अन्य पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, उन्हें नहलाकर सजाते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं। पोला तिहार केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति, कृषि परंपरा और लोक जीवन का भी अहम हिस्सा है। इस दिन घरों में ठेठरी, खुरमी समेत कई पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। वहीं बच्चे मिट्टी के बैल और दूसरे पारंपरिक खिलौनों से खेलते हैं। छत्तीसगढ़ में पोला पर्व मूल रूप से खेती-किसानी और पशुधन के सम्मान से जुड़ा हुआ है। खेती के शुरुआती और व्यस्त दौर के बाद भाद्रपद अमावस्या के दिन यह त्योहार मनाने की परंपरा है। किसानों के लिए बैल खेती के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए पोला के दिन बैलों को कृषि कार्य से आराम दिया जाता है और उनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है। लोक मान्यता के अनुसार, पोला पर्व के समय अन्नमाता गर्भ धारण करती हैं। इसका संबंध धान की फसल में दूध भरने की प्रक्रिया से जोड़ा जाता है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur