गुवाहाटी ,02 जनवरी 2022 (ए)। नगालैंड के मोन जिले में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में आम नागरिकों की जान जाने के बाद से ही पूर्वोत्तर के राज्यों से अफ्सपा यानी की सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम को हटाए जाने की मांग ने फिर से जोड़ पकड़ा। हालांकि, इसको लेकर बीते साल कोई फैसला नहीं हुआ लेकिन नए साल पर इसको हटाया जा सकता है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने खुद ही ऐसे संकेत दिए हैं। दरअसल, सरमा ने बयान दिया कि अफ्सपा के बारे में इस साल कुछ सकारात्मक घटनाक्रम होने की उम्मीद की जा सकती है। अब सरमा के इस बयान को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है
पूर्वोत्तर में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सरमा ने कहा कि अफ्सपा के सिलसिले में पड़ोसी नगालैंड में जल्द ही कुछ सकारात्मक घटनाक्रम होंगे। इस राज्य में भी अफ्सपा लागू है। उन्होंने कहा कि उग्रवाद के कमजोर पड़ने के चलते असम के पांच-छह जिलों को छोड़ कर राज्य से सेना हटा ली गई है और जब इस साल अफ्सपा की समीक्षा की जाएगी, तब राज्य सरकार कोई व्यावहारिक निर्णय लेगी। पूर्वोत्तर के विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा अफ्सपा को अक्सर क्रूर अधिनियम बताया जाता रहा है क्योंकि इसके तहत सशस्त्र बलों को अशांत इलाकों में लोक व्यवस्था कायम रखने के लिए विशेष शक्तियां दी गई हैं और इसे हटाने की मांग नागरिक समाज संस्थाएं तथा मानवाधिकारों के पैरोकार करते रहे हैं।
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