Breaking News

कोरिया@ कोरिया खाद्य विभाग की कार्यवाही में मिलावटी पनीर बच गया,सड़ा केला फंस गया!

Share

  • सड़े फल पकड़कर खुद को शेर समझ रहा विभाग, मिलावटी पनीर और गंदे किचन पर क्यों बैठ जाती है जांच की बिल्ली?
  • कोरिया खाद्य विभाग की कार्यवाही में सड़े फल पर शौर्य पदक, होटलों पर मौन व्रत क्यों?
  • फल कुचले, मिलावट छोड़ी — वाह रे खाद्य विभाग की कार्रवाई!
  • ढाबों में दावत, ठेलों पर रहमत कार्रवाई सिर्फ सड़े फलों पर!1
  • लिफाफा भारी तो किचन प्यारा, वरना सड़ा फल ही सहारा!
  • सघन जांच अभियान या फोटो खिंचाओ अभियान?
  • खाद्य विभाग का कमाल, होटल साफ घोषित, सड़ा फल बदनाम!
  • जहां फ्री का खाना मिले, वहां जांच नहीं होती!
  • सड़े फल नष्ट कर विभाग गदगद, मिलावटखोर अब भी बेफिक्र!
  • कार्रवाई का कैमरा ऑन, असली जांच ऑफ!
  • खाद्य सुरक्षा अभियान या फोटो खिंचवाने का सरकारी उत्सव?
  • सड़े फल पकड़कर खुद को शेर समझ रहा विभाग, मिलावटी पनीर और गंदे किचन पर क्यों बैठ जाती है जांच की बिल्ली?


-रवि सिंह-
कोरिया,31 मई 2026(घटती-घटना)।
बैकुंठपुर में खाद्य एवं औषधि विभाग ने हाल ही में एक सघन जांच अभियान चलाया,प्रेस विज्ञप्ति जारी हुई,फोटो खिंचे, सड़े-गले फल नष्ट किए गए और फिर विभाग ने अपनी पीठ इतनी जोर से थपथपाई मानो जिले से मिलावट का रावण खत्म कर दिया गया हो,लेकिन सवाल यह है कि क्या जिले में मिलावट का पूरा साम्राज्य सिर्फ कुछ सूखे और सड़े फलों तक सीमित है? क्या होटल, ढाबे, डेयरियां,मिठाई दुकानें,चौपाटियां और सड़क किनारे की रेहडि़यां अचानक संत महात्मा बन गई हैं जहां सब कुछ शुद्ध और सात्विक परोसा जा रहा है? जिले की जनता तो वर्षों से जानती है कि कई होटलों के किचन में ऐसा तेल इस्तेमाल होता है जिसे देखकर कोलेस्ट्रॉल भी आत्महत्या कर ले, चौपाटियों में ऐसी चटनियां बनती हैं जिनका रंग देखकर विज्ञान भी भ्रमित हो जाए और कई डेयरियों में ऐसा पनीर बिकता है जो दूध से कम और केमिकल से ज्यादा पैदा हुआ लगता है, लेकिन खाद्य विभाग का अभियान वहां तक नहीं पहुंचता, क्यों? यही सबसे बड़ा सवाल है।
सड़े फल पर कार्रवाई,लेकिन असली सड़ांध पर मौन…
खाद्य एवं औषधि विभाग ने जिस उपलब्धि को प्रेस नोट में प्रमुखता से बताया, वह था गैर बिक्री योग्य फलों को नष्ट कराना,अब व्यंग्य देखिए जिन फलों को दुकानदार खुद बेचने योग्य नहीं मानते, जिन्हें वे शाम तक कचरे में फेंकने वाले होते हैं,उन्हें नष्ट कर विभाग ने मानो खाद्य सुरक्षा का भारत रत्न जीत लिया हो,शहर में चर्चा है कि यदि इसी गति से अभियान चलता रहा तो अगले साल विभाग सूखी मिर्ची, बासी धनिया और मुरझाए नींबू पकड़कर प्रेस कांफ्रेंस करेगा,लेकिन उसी समय शहर और गांवों में शादी-विवाह का सीजन चल रहा था,बड़ी मात्रा में पनीर,खोवा,मिठाई और दूध की सप्लाई हो रही थी, हर साल की तरह इस बार भी लोगों के बीच चर्चा थी कि कई जगहों पर केमिकलयुक्त पनीर और अमानक खोवा धड़ल्ले से बिक रहा है। मगर विभाग की टीम वहां नहीं पहुंची,लगता है पनीर की जांच के लिए विभाग की मशीनें नहीं,मूड चाहिए।
जनता पूछ रही,आखिर अभियान किसके लिए?
कोरिया जिले की जनता अब यह समझने लगी है कि सरकारी अभियान और वास्तविक कार्रवाई में फर्क होता है,जनता चाहती है कि खाद्य एवं औषधि विभाग सिर्फ औपचारिकता न निभाए, बल्कि उन जगहों पर भी पहुंचे जहां से रोज हजारों लोगों की सेहत जुड़ी है,होटलों के किचन, चौपाटियों की सामग्री, डेयरियों का दूध, मिठाई दुकानों का खोवा और शादी समारोहों में सप्लाई होने वाला पनीर…यही असली जांच का विषय होना चाहिए,क्योंकि जनता की सेहत प्रेस नोट से नहीं, ईमानदार कार्रवाई से सुरक्षित होती है,फिलहाल हालात ऐसे हैं कि विभाग सड़े फल पकड़कर खुद को शेर साबित कर रहा हैज्जबकि मिलावट का असली जंगल अब भी खुला घूम रहा है।
ढाबों के किचन तक क्यों नहीं जाती जांच?
कोरिया जिले के बड़े ढाबों और होटलों में कभी अचानक निरीक्षण हुआ हो, वहां के किचन की वास्तविक तस्वीर सामने आई हो, ऐसा शायद ही कभी सुनने में आता है, लोग बताते हैं कि कई जगहों पर वही तेल बार-बार इस्तेमाल होता है,खुले में खाद्य सामग्री रखी जाती है, गंदे पानी से बर्तन धोए जाते हैं और फ्रिज में रखी चीजों की हालत देखकर डॉक्टर भी बीमार पड़ जाए,लेकिन विभाग की टीम वहां पहुंचती भी है तो कार्रवाई कम और आवभगत ज्यादा होती है,स्थानीय लोग व्यंग्य में कहते हैं जहां खाना फ्री और पैकेट भारी हो, वहां निरीक्षण भी नरम हो जाता है,यानी जनता को जिस जगह सबसे ज्यादा सुरक्षा की जरूरत है, वहीं विभाग सबसे ज्यादा संवेदनशील हो जाता है।
चौपाटी की चटनी में मिलावट नहीं,सिर्फ स्वाद?
शहर की चौपाटियों और फास्ट फूड स्टॉलों पर रोज हजारों लोग खाना खाते हैं, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक वहां पहुंचते हैं, लेकिन वहां की स्वच्छता की हालत किसी से छिपी नहीं, कटे फल खुले में,बासी सॉस,सड़े तेल में तली चीजें और बर्फ का ऐसा पानी जिसकी शुद्धता भगवान भरोसे यह सब आम दृश्य हैं, लेकिन खाद्य विभाग की कार्रवाई वहां नहीं दिखती, क्योंकि शायद चौपाटियों में जांच से ज्यादा चाट पर ध्यान रहता है।
डेयरियों का दूध या केमिकल प्रयोगशाला?
गर्मी के मौसम में दूध और उससे बने उत्पादों की गुणवत्ता सबसे ज्यादा प्रभावित होती है, लेकिन जिले की कई डेयरियों में दूध की शुद्धता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लोग आरोप लगाते हैं कि कुछ स्थानों पर दूध से ज्यादा पानी और पाउडर का कारोबार चलता है, मिठाई दुकानों में ऐसा खोवा इस्तेमाल होता है जो असली कम और एडजस्टमेंट ज्यादा होता है, फिर भी अभियान की पूरी ताकत फलों पर टूटती है,शायद इसलिए क्योंकि फल विरोध नहीं करते।
कार्रवाई की जगह ‘समझौता मॉडल’?
शहर में यह चर्चा नई नहीं है कि कई शिकायतें कार्रवाई तक पहुंचने से पहले ही समझौते में बदल जाती हैं, कई बार लोगों ने खराब खाद्य सामग्री की शिकायत की, लेकिन मामला वहीं शांत हो गया, न सैंपल की रिपोर्ट सामने आई, न जुर्माना, न लाइसेंस निरस्तीकरण, ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विभाग का अभियान जनता की सुरक्षा के लिए चल रहा है या सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए?
खाद्य सुरक्षा या सरकारी अभिनय?
आज हालत यह है कि विभागीय कार्रवाई देखकर जनता हंस भी रही है और चिंतित भी है, क्योंकि जिस विभाग को लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करनी चाहिए,वह कई बार फोटो आधारित प्रशासन में बदल जाता है,जहां असली लड़ाई मिलावट से नहीं, प्रेस विज्ञप्ति की भाषा से लड़ी जाती है, एक तरफ अधिकारी कहते हैं कि वे सघन जांच कर रहे हैं, दूसरी तरफ जनता पूछ रही है अगर जांच इतनी सघन है तो फिर मिलावट इतनी सामान्य क्यों है?
कागजों में सख्ती,जमीन पर नरमी
यदि विभाग वास्तव में गंभीर हो तो जिले के किसी भी बड़े होटल, ढाबे, डेयरी या मिठाई दुकान में अचानक जांच कर वास्तविकता सामने ला सकता है, लेकिन इसके लिए हिम्मत चाहिए,और शायद यही चीज सबसे कम दिखाई देती है, सड़े फलों पर कार्रवाई आसान है, वे न फोन लगाते हैं,न पहुंच रखते हैं, न पैरवी करवाते हैं, लेकिन बड़े प्रतिष्ठानों पर हाथ डालना मतलब विवाद, दबाव और जवाबदेही…और शायद यही वजह है कि वहां विभाग की गाड़ी धीरे चलती है।

  1. ↩︎

Share

Check Also

सीतापुर@ तेज रफ्तार हाइवा की टक्कर से युवक की मौत,मां गंभीर घायल

Share सीतापुर,31 मई 202६ (घटती-घटना)। अंबिकापुर-रायगढ़ नेशनल हाईवे क्रमांक-43 पर शनिवार शाम हुए दर्दनाक सड़क …

Leave a Reply