बिलासपुर,16 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एलबी संवर्ग के शिक्षकों को समान लाभ देने की मांग वाली अपील खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि केवल किसी पुराने न्यायिक फैसले या विभागीय परिपत्र का हवाला देने भर से समान लाभ का अधिकार नहीं बनता। संबंधित कर्मचारी को यह भी साबित करना होगा कि उसके सेवा संबंधी तथ्य और परिस्थितियां उस पुराने मामले से पूरी तरह मेल खाती हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने प्रकरण की सुनवाई की। मामला रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड में पदस्थ प्रधान पाठिका हेमलता बघेल तथा शिक्षिकाओं गीता साहू, मीरा साहू और मंजूषा जायसवाल का है। इनकी याचिका पहले एकलपीठ ने खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने 109 दिन की देरी से उस आदेश के खिलाफ अपील दायर की। खंडपीठ ने देरी को माफ करते हुए अपील पर सुनवाई तो की, लेकिन मामले के गुण-दोष के आधार पर कोई राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं ने 10 मार्च 2017 के विभागीय परिपत्र और सोना साहू प्रकरण का हवाला देते हुए समान लाभ दिए जाने की मांग की। वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि इस विवाद का निपटारा पहले ही पुष्पलता माणिकपुरी मामले में हो चुका है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि उनकी सेवा शर्तें और परिस्थितियां सोना साहू मामले के समान हैं। ऐसी स्थिति में केवल पुराने फैसले या विभागीय आदेश का उल्लेख कर समान लाभ नहीं दिया जा सकता।
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