- बसंतपुर पुलिस और ओडिशा एसटीएफ की एंड-टू-एंड जांच में 4 और आरोपी गिरफ्तार
- सवाल उठा…संभागीय आबकारी उड़नदस्ता के ‘सुपरमैन’ रंजीत गुप्ता का हाथ ऐसे बड़े तस्करों तक क्यों नहीं पहुंचता?
-संवाददाता-
बसंतपुर/बलरामपुर,16 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सक्रिय अंतरराज्यीय गांजा तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए बसंतपुर पुलिस और ओडिशा एसटीएफ ने एंड-टू-एंड जांच के आधार पर चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
करीब 16 करोड़ रुपये मूल्य के 3,139.570 किलोग्राम गांजा की तस्करी से जुड़े इस नेटवर्क में अब तक कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि केवल गांजा जब्त कर मामला बंद नहीं किया गया,बल्कि महीनों तक तकनीकी और अंतरराज्यीय जांच कर सप्लाई नेटवर्क तक पहुंच बनाई गई। इधर, सरगुजा संभाग में नशीले इंजेक्शन, कैप्सूल और अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाने वाली संभागीय आबकारी उड़नदस्ता की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। जनचर्चा में यह सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंच सकती है,तो क्या अन्य एजेंसियां भी इसी तरह संगठित सप्लाई चेन तक पहुंचने की दिशा में समान स्तर की जांच कर रही हैं?
दो बड़ी बरामदगी से खुला पूरा नेटवर्क : पुलिस के अनुसार पहला मामला 29 दिसंबर 2025 का है, जब बसंतपुर पुलिस ने नारियल की भूसी में छिपाकर राजस्थान ले जाए जा रहे 1,198.460 किलोग्राम गांजा से भरे ट्रक को पकड़ा था। उस समय तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर ट्रक जब्त किया गया था। दूसरा मामला 11 जून 2026 का है, जब राजस्थान नंबर के ट्रक से 1,941.110 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया। इस मामले में उत्तर प्रदेश के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। दोनों मामलों में कुल 3,139.570 किलोग्राम गांजा जब्त हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 16 करोड़ रुपये आंकी गई।
जीपीएस,तकनीकी जांच और पूछताछ से पहुंचे असली नेटवर्क तक : पुलिस ने बताया कि दूसरे मामले में गिरफ्तार आरोपी लोकेश शर्मा से पूछताछ के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी मिली। ट्रक में लगे जीपीएस,मोबाइल ऐप के जरिए हुए संपर्क और तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि ओडिशा के सोनपुर जिले के लोपा ढाबा के पास ट्रकों में स्थानीय लोगों की मदद से गांजा लोड कराया जाता था। इसी आधार पर बसंतपुर पुलिस और ओडिशा एसटीएफ की संयुक्त टीम ने बौध जिले में दबिश देकर दुर्वाशा साहु, सुबुधी साहु,प्रकाश खटुआ और अरुण कुमार राणा को गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।
केवल कैरियर नहीं, पूरे नेटवर्क पर प्रहार : इस कार्रवाई की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पुलिस ने केवल ट्रक चालक या मौके पर पकड़े गए लोगों तक जांच सीमित नहीं रखी। विवेचना को आगे बढ़ाते हुए उस नेटवर्क तक पहुंच बनाई, जहां से गांजा ट्रकों में लोड कराया जा रहा था। यही कारण है कि इसे एंड-टू-एंड जांच की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
सरगुजा संभाग में नशीली दवाओं पर लगातार कार्रवाई,लेकिन बहस भी जारी : दूसरी ओर,सरगुजा संभाग में संभागीय आबकारी उड़नदस्ता के प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में नशीले इंजेक्शन,कैप्सूल और अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई हुई है। वाहिद अंसारी,मोशीम अंसारी,साहिल तिर्की,नितीश गुप्ता,प्रदीप राजवाड़े,सजाद अली,महबूब खान, आशा पांडेय और राजेश मंदिलवार उर्फ बुटन जैसे मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। हालांकि,इन मामलों में भी अधिकांश कार्रवाई पूछताछ के आधार पर अगले कथित सप्लायर तक पहुंचने तक सीमित रही।
इसी कारण अब यह सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है कि क्या नशीली दवाओं के पूरे अंतरजिला या अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंचने के लिए पुलिस, औषधि प्रशासन और आबकारी विभाग के बीच और व्यापक समन्वय की आवश्यकता है।
बड़ी कार्रवाई ने तुलना की बहस भी छेड़ी्रःबसंतपुर पुलिस और ओडिशा एसटीएफ की कार्रवाई ने यह दिखाया कि लंबी विवेचना,तकनीकी साक्ष्य और अंतरराज्यीय समन्वय के जरिए संगठित तस्करी नेटवर्क तक पहुंचा जा सकता है। इसी के साथ यह बहस भी तेज हो गई है कि नशीली दवाओं के मामलों में भी यदि इसी प्रकार बहु-एजेंसी और तकनीकी जांच को लगातार आगे बढ़ाया जाए,तो सप्लाई चेन की ऊपरी कडि़यों तक पहुंचने की संभावना और मजबूत हो सकती है।
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