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अम्बिकापुर@विश्व दुग्ध दिवस आज : नियमित रूप से दूध का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

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पशुपालकों की भूमिका और दुग्ध उत्पादन के महत्व पर जोर…

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,31 मई 2026 (घटती-घटना)। विश्व दुग्ध दिवस हर वर्ष 1 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2001 में संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा की गई थी। इस दिवस का उद्देश्य दूध के पोषण संबंधी महत्व, डेयरी उद्योग के योगदान और पशुपालकों की भूमिका के प्रति लोगों को जागरूक करना है। अतिरिक्त उपसंचालक पशुपालन विभाग डॉ. सी.के. मिश्रा ने बताया कि दूध एक आदर्श एवं संपूर्ण खाद्य पदार्थ है, जिसमें शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन, खनिज लवण और ऊर्जा प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। नियमित रूप से दूध का सेवन बच्चों, युवाओं, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। उन्होंने बताया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। देश की अर्थव्यवस्था में डेयरी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। लाखों किसान और पशुपालक दुग्ध उत्पादन के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय रोजगार सृजन के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए कई नवाचार कर रही है। इनमें सेक्स सॉर्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक विशेष रूप से प्रभावी साबित हो रही है। इस तकनीक के माध्यम से लगभग 90 प्रतिशत तक बछियों का जन्म होता है, जिससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि सरगुजा जिले में इस तकनीक को सबसे पहले अपनाया गया था और अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा चुका है। इससे पशुपालकों की आय में वृद्धि होने के साथ दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिला है। डॉ. मिश्रा ने पशुपालकों से पशुओं की नियमित देखभाल, संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और स्वच्छ दुग्ध उत्पादन पद्धतियों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि दूध केवल पोषण का स्रोत ही नहीं, बल्कि किसान समृद्धि और आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि विश्व दुग्ध दिवस स्वस्थ समाज, बेहतर पोषण, किसान कल्याण और सतत विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। दूध के महत्व को समझते हुए इसके स्वच्छ उत्पादन और संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।


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