चेन्नई 07 दिसम्बर 2021 (ए)। तमिलनाडु राज्य में मद्रास हाईकोर्ट ने आयकर विभाग को निर्देश दिया है कि, वह दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के खिलाफ दर्ज संपत्ति मामले में उनके कानूनी वारिसों को शामिल करें। न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति मोहम्मद शाइक की मद्रास उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने आयकर विभाग को दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता के कानूनी वारिस जे. दीपा और जे. दीपक के नाम उनके खिलाफ लंबित संपत्ति और आयकर मामलों से संबंधित रिकॉर्ड में लाने के लिए आवेदन दायर करने का निर्देश दिया है।
आयकर विभाग ने अपीलीय न्यायाधिकरण के फैसले को
दी थी चुनौती
कोर्ट ने आईटी विभाग को लंबे समय से लंबित संपत्ति कर के मामले में जयललिता के भतीजे जे. दीपक और भतीजी जे. दीपा के नाम रिकॉर्ड में लाने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। आयकर विभाग ने 16 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और आयकर बकाया की वसूली के लिए आयकर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका दायर की थी। आयकर विभाग ने अदालत के समक्ष प्रार्थना की थी कि बकाया कर के संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री के आवास और अन्य संपत्तियों को कुर्क किया गया है।
विभाग उत्तराधिकारियों का पता लगाने में सक्षम नहीं है : वकील
इस मामले में आयकर विभाग के वकील ने अदालत को सूचित किया कि, वे दिवंगत मुख्यमंत्री के कानूनी उत्तराधिकारियों का पता लगाने में सक्षम नहीं है लेकिन मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा जे. दीपा और जे. दीपक को उनके कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में घोषित करने के बाद विभाग, उन्हें पार्टी (पक्ष) के उत्तरदाताओं के रूप में जोड़ सकता है। अदालत ने आयकर विभाग को यह पता लगाने का भी निर्देश दिया कि, क्या कानूनी उत्तराधिकार का दावा करने वाली कोई याचिका किसी अदालत में लंबित है।
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