नई दिल्ली ,,02 दिसम्बर 2021 (ए)। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें लोकसभा उपाध्यक्ष का चुनाव कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह अगले साल 28 फरवरी को प्रस्तावित तारीख पर मामले की सुनवाई करेगी, क्योंकि इस मामले में तत्काल सुनवाई करने की जरूरत नहीं है।
मामले में जल्द सुनवाई की प्रार्थना करते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि मामले को 29 नवंबर, 2021 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन संबंधित पीठ उस दिन इकट्ठा नहीं हुई और इसे 28 फरवरी, 2022 के लिए निर्धारित कर दिया गया।
इससे पहले, इस मामले में अदालत ने केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा को प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए बिना इस संबंध में निर्देश पर ध्यान देने के लिए कहा था।
याचिकाकर्ता पवन रेले ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 93 का उल्लंघन करते हुए उपाध्यक्ष का पद दो साल से अधिक समय से खाली है।
याचिकाकर्ता ने कहा, 30 अगस्त को 830 दिन हो गए हैं, जब 17वीं लोकसभा के गठन की तारीख से डिप्टी स्पीकर का चुनाव नहीं हुआ है। यह बहुत गंभीर है। उन्होंने संवैधानिक पदाधिकारियों की निष्कि्रयता और लोकसभा उपाध्यक्ष का चुनाव न कराने में अपने कर्तव्यों से बचने का आरोप लगाया।
याचिका में कहा गया है कि उपाध्यक्ष का निर्वाचन नहीं कराने का किसी भी प्राधिकारी को अधिकार नहीं दिया गया है और लोकसभा में कामकाज और प्रक्रिया के नियम 8 के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष का यह कर्तव्य है कि वह उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए तारीख निर्धारित करें।
दलील दी गई है कि लोक सभा में संपूर्ण लोकतांत्रिक संरचना अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष और लोक सभा के सदस्यों के कंधों पर टिकी होती है। याचिका में कहा गया है कि लोकतांत्रिक ढांचे और लोगों के मौलिक अधिकारों के बीच घनिष्ठ संबंध है। एक बार जब यह गठजोड़ टूट जाता है, तो यह लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
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