विलंब के कारण न्याय से वंचितभारतीय न्यायालयों में अनसुलझे मामलों का मुद्दा एक बड़ी चुनौती है, जिसने न्याय प्रणाली को गहराई से प्रभावित किया है। लंबित मामलों की बढ़ती संख्या न्याय प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई वर्तमान प्रणाली की प्रभावशीलता और दक्षता पर गंभीर सवाल उठाती है। ऐसी देरी का कानूनी ढांचे पर हानिकारक और व्यापक प्रभाव पड़ता …
Read More »संपादकीय
लेख@ जीवन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत
विज्ञान मानव को जीवन जीने की एक दृष्टि देता है। चिंतन की आधारभूमि भेंट कर चलने को उजास भरा पथ प्रदान करता है। वास्तव में विज्ञान जीवन से जडता, अविद्या, अंधविश्वास, अतार्किता एवं संशय से मुक्ति का नाम है। विज्ञान व्यक्ति को तर्कशील एवं प्रयोगधर्मी बनाकर सवाल खड़े करने की सामर्थ्य पैदा करता है। विज्ञान मानवीय मेधा का उच्चतम आदर्श …
Read More »लेख@ कामुकता को स्वछन्द करती पॉप संस्कृति
आजकल, हमारी इच्छाएँ और धारणाएँ अक्सर çफ़फ ल्मो और टेलीविजन पर दिखाई जाने वाली छवियों और कथाओं से प्रभावित होती हैं। ये चित्रण प्रायः रूढि़वादिता की ओर अधिक झुके होते हैं। उदाहरण के लिए, पारंपरिक रूप से आकर्षक महिलाओं पर ज़ोर देने से लड़कियों और महिलाओं में उन जैसा दिखने की भावना पैदा हो सकती है। पॉप संस्कृति के उपभोक्ताओं …
Read More »लेख@ महान साहित्य के पीछे शब्द शक्ति और सामर्थ्य
सत-साहित्य से समृद्ध होता समाज शब्दों की महिमा को अपरंपार और अक्षर को नश्वर बताया गया है ।वैसे तो शब्दों की तीव्रता तलवार से ज्यादा नुकीली और भाले से ज्यादा चुभने वाली होती है। तलवार की धार से मनुष्य एक बार बच भी सकता है पर मुंह से बोले गए शब्द व्यक्ति को मृत्यु सा मूर्छित कर देते है। इसीलिए …
Read More »लेख@ क्यों क्रूर बदमाशी का रूप ले रही है रैगिंग?
रैगिंग को अक्सर एक संस्कार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जो नए छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों में परिसर में जीवन को समायोजित करने में सहायता करता है। हालाँकि जूनियर कैंपस के रीति-रिवाजों को सीख सकते हैं और वरिष्ठों के साथ सकारात्मक बातचीत के माध्यम से एक सहायक समुदाय बना सकते हैं, लेकिन जब इसके परिणामस्वरूप उत्पीड़न, अपमान …
Read More »लेख@ प्रकृति प्रदत्त विकृत सुआकृति लेती
पृथ्वी पर पायी जाने वाली समस्त जीव जंतु प्रत्यक्ष रूप से प्रकृति के गोद में ही खेलते पलते और बढ़ते है। मनुष्य प्रकृति से बहुत सारी अपेक्षाएं रखना है और जब उनके अनुकूल प्रकृति प्रदत्त घटनाएं होती है तो व्यक्ति बहुत खुश होता है, लेकिन यदि कोई घटनाएं मनुष्य के प्रतिकूल होता है तो व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से …
Read More »लेख@ मानव मात्र एक समान देश है सबसे ऊपर
हमें ज्ञान देने वाला कौन है।आप जब एक कौवा को एकबार बिजली के तार से गिर कर मरते देखा तो शायद उसके शोक में सैकड़ो कौवा चिल्लाते हुए आ गए और कॉव कॉव करने लगे। ना तो उसकी क़ोई जाति ना क़ोई धर्म मानो सिर्फ मुश्किल में एकजुटता ही उसके प्रति संवेदना थी ना तो वो किसी पैसे को लेता …
Read More »लेख@ अधिसंख्य आबादी तक पहुंचें सस्ती दवाइयां
पिछले काफी समय से जेनेरिक या ब्रांडेड दवाओं पर बहस छिड़ी है। पिछले साल नेशनल मेडिकल कमीशन ने एक नियम लागू किया था। इसमें कहा गया था कि डॉक्टरों को जेनेरिक दवाएं भी लिखनी होंगी। नियम न मानने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एनएमसी के इस फैसले के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस नियम पर सवाल खड़े किए थे। …
Read More »लेख@ कर्मठता के साथ बड़ी सफलता प्राप्त कीजिये
अकर्मण्यता जीवन की उन्नती का बड़ा अवरोधयह बात चाहे मनुष्य के जीवन की हो यह राष्ट्र के उत्थान से संदर्भित हो,जीवन में मनुष्य के संदर्भ में अकर्मण्यता एक बड़ी शारीरिक,मानसिक व्याधि और दशा है, यह जीवन को निर्रथक बनाती है। इसी तरह देश का शासन तंत्र यदि आक्रमण्य और निराशावादी हो तो देश की उन्नति में अवरोध और बढ़ाएं सदैव …
Read More »लेख@ शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव हैमहिला अध्यापिकाओं की बढ़ती संख्या
महिलाओं द्वारा संचालित कक्षाओं में समावेशी भागीदारी 20 प्रतिशत अधिक होती है। सामाजिक बाधाओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करके, महिला शिक्षकों की उपस्थिति लड़कियों के शैक्षिक अवसरों को बढ़ाती है। महिला शिक्षकों की संख्या में वृद्धि के कारण बिहार की कन्या उत्थान योजना में महिलाओं के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। लिंग भूमिकाओं, बाल विवाह और मासिक धर्म …
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