पूर्व उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र,एनएसयूआई ने विधिक परिषद को सौंपा ज्ञापन,कहा…120 सीटों से सैकड़ों विद्यार्थी हो रहे वंचित,निजी कॉलेजों का बढ़ेगा दबाव
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,03 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अम्बिकापुर के एलएलबी पाठ्यक्रम की सीटें 240 से घटाकर 120 किए जाने का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीटें पूर्ववत 240 करने की मांग उठाई थी,वहीं अब भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) भी छात्रों के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर आया है। संगठन ने छत्तीसगढ़ राज्य विधिक परिषद के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर सीटें बढ़ाने की मांग की है। राजनीतिक और छात्र संगठनों के एक साथ मुखर होने से यह मुद्दा अब केवल कॉलेज प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरगुजा संभाग के विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा बड़ा शिक्षा का मुद्दा बनता जा रहा है।
सिंहदेव बोले…गरीब और आदिवासी छात्रों का छिन जाएगा अवसर : पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि राजीव गांधी पीजी कॉलेज सरगुजा संभाग का प्रमुख और ऐतिहासिक शासकीय महाविद्यालय है, जहां दूरस्थ ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के हजारों छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि लॉ की सीटें 240 से घटाकर 120 करना आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। उन्होंने चेताया कि सीटों में कटौती से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को मजबूरन महंगे निजी लॉ कॉलेजों का रुख करना पड़ेगा, जो अधिकांश परिवारों की आर्थिक क्षमता से बाहर है। सिंहदेव ने यह भी कहा कि आदिवासी बहुल सरगुजा में कानूनी जागरूकता और स्थानीय स्तर पर विधि स्नातकों की आवश्यकता को देखते हुए सीटें कम करना क्षेत्रहित के विपरीत निर्णय है।
एनएसयूआई ने कहा…हर साल योग्य छात्र रह जाते हैं प्रवेश से वंचित : इधर, प्रदेश आरटीआई अध्यक्ष हिमांशु जायसवाल के मार्गदर्शन में एनएसयूआई के संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष सुरेंद्र गुप्ता एवं उपाध्यक्ष गौतम गुप्ता के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ राज्य विधिक परिषद, बिलासपुर के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि राजीव गांधी पीजी कॉलेज सरगुजा संभाग का प्रमुख लॉ कॉलेज है,जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एलएलबी में प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं,लेकिन केवल 120 सीटें होने के कारण अनेक योग्य और इच्छुक विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रह जाते हैं। पहले 240 सीटें होने से अधिक विद्यार्थियों को विधि शिक्षा का अवसर मिलता था। एनएसयूआई ने यह भी कहा कि सरगुजा संभाग के पांच जिलों के अधिकांश विद्यार्थी आर्थिक कारणों से दूसरे शहरों में जाकर पढ़ाई नहीं कर सकते। ऐसे में सरकारी कॉलेज की सीटें कम होना हजारों छात्रों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।
एक मुद्दे पर कांग्रेस और छात्र संगठन की एक जैसी मांग
दिलचस्प बात यह है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव और एनएसयूआई,दोनों ने अलग-अलग माध्यमों से लगभग एक जैसी मांग उठाई है। दोनों का कहना है कि सीटों में कटौती से गरीब, ग्रामीण और आदिवासी विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा के अवसर प्रभावित होंगे तथा निजी संस्थानों पर निर्भरता बढ़ेगी।
अब सरकार के फैसले
पर टिकी निगाहें
लगातार बढ़ रहे विरोध और मांगों के बीच अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं। यदि सरकार जल्द कोई निर्णय नहीं लेती है तो यह मुद्दा छात्र आंदोलन का रूप ले सकता है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का भी मानना है कि सरगुजा जैसे बड़े संभाग में विधि शिक्षा की बढ़ती मांग को देखते हुए सीटों की संख्या कम करने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
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