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अम्बिकापुर@महापौर के निर्देश भी हवा में,पुलिस की पेट्रोलिंग भी गायब!

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स्थानीय निवासी राकेश पांडेय का आरोप-‘शिकायत की तो दबंग किराएदार बोला… बाबूपारा के लड़कों से पिटवा दूंगा…पुलिस और प्रशासन आज तक मूकदर्शक


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,03 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक-4 स्थित एनडब्ल्यूजीएल चर्च के सामने शांतिपारा मैदान,जो शहर की प्रथम नागरिक महापौर मंजूषा भगत के निवास से कुछ ही दूरी पर स्थित है,वहां शाम ढलते ही कथित रूप से शराबखोरी,हुड़दंग, संदिग्ध गतिविधियों और दबंगई का अड्डा बन जाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्थानीय लोगों की लगातार शिकायतों, पुलिस को दिए गए आवेदन और महापौर द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देने के बावजूद आज तक हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। स्थानीय कलाकार एवं वार्डवासी राकेश पांडेय का आरोप है कि अब स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि असामाजिक तत्वों का विरोध करने वाले लोगों को खुलेआम धमकियां दी जा रही हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
सूरज ढलते ही अंधेरा ही नहीं,डर भी उतर आता है…ः राकेश पांडेय बताते हैं कि सूर्यास्त के बाद क्षेत्र की अधिकांश स्ट्रीट लाइटें बंद हो जाती हैं। अंधेरे का फायदा उठाकर बाहरी लोग मैदान में जुटने लगते हैं। उनका कहना है कि वे सामाजिक विषयों पर वीडियो बनाते हैं,लेकिन अंधेरा और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी के कारण उनका काम भी प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है, ‘सूरज ढलते ही रोशनी चली जाती है और मेरे वीडियो बनाने का सपना अंधेरे में खो जाता है। लेकिन असली डर अंधेरे से नहीं, उन लोगों से है जो कैमरा देखते ही विरोध करने लगते हैं। बात केवल मना करने तक नहीं रहती, सीधे मारपीट और धमकी तक पहुंच जाती है।
घर के पीछे तीन घंटे तक खड़े रहे वाहन,पुलिस का कहीं पता नहीं : राकेश पांडेय बताते हैं कि हाल ही में उनके घर के पीछे महज 10 फीट की दूरी पर एक कार और दो मोटरसाइकिल करीब तीन घंटे तक खड़ी रहीं। इसके बावजूद न पुलिस की पेट्रोलिंग हुई और न किसी ने पूछताछ की। उनका कहना है कि यदि उसी दौरान कोई गंभीर अपराध हो जाता,तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
शराबखोरी रोकने पर मिली मारपीट और जान से मारने की धमकी : राकेश पांडेय ने एक और गंभीर आरोप लगाया है कि जब उन्होंने अपने घर के पीछे खुलेआम शराब पी रहे युवकों का विरोध किया तो एक किराएदार युवक ने नशे की हालत में उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और खुलेआम धमकी दी कि ‘बाबूपारा के लड़कों से पिटवा दूंगा। ‘उन्होंने बताया कि मामला केवल गाली-गलौज तक सीमित नहीं रहा,बल्कि उन्हें मारपीट कराने और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई।
शिकायत लेकर पहुंचे तो मां ने भी बेटे का साथ दिया : राकेश पांडेय के अनुसार जब वे शिकायत लेकर आरोपी युवक के किराए के मकान पहुंचे तो वहां मौजूद उसकी मां संगीता ने भी उल्टा उनसे अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि उसने अपने बेटे का पक्ष लेते हुए कहा…‘जाओ, जो करना है कर लो। ‘राकेश पांडेय का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम मकान मालकिन मंजू रानी श्रीवास्तव की मौजूदगी में हुआ।
मकान मालकिन ने समझाया, लेकिन किराएदार नहीं माने : पीडि़त के अनुसार मकान मालकिन ने स्थिति संभालने का प्रयास किया और आरोपियों को समझाया भी,लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं मानी। पीडि़त ने तत्काल ऐसे किराएदारों से मकान खाली कराने की मांग भी की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
किराएदारों का सत्यापन भी नहीं, सुरक्षा पर गंभीर सवाल
राकेश पांडेय का आरोप है कि मोहल्ले के कई किराएदारों का आज तक पुलिस सत्यापन नहीं हुआ है। ऐसे में कौन व्यक्ति किस उद्देश्य से रह रहा है,इसकी जानकारी प्रशासन के पास भी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते किराएदारों का सत्यापन और निगरानी होती, तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकती थी।
कचरे से पटा मैदान,गंदगी के बीच उग आई झाडि़यां : मैदान में शराब की बोतलें,प्लास्टिक,डिस्पोजल,गुटखा पाउच, सिगरेट के पैकेट,कंडोम,चिकन दुकानों का कचरा और अन्य अपशिष्ट खुलेआम पड़े रहते हैं। लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण अब वहां झाडि़यां और घास भी उग आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम की सफाई व्यवस्था भी यहां पूरी तरह नदारद है।
वार्डवासियों का सवाल-क्या किसी बड़ी वारदात के बाद जागेगा प्रशासन?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी वे असामाजिक तत्वों का विरोध करते हैं तो उन्हें धमकियां मिलती हैं। ऐसे माहौल में महिलाएं और बच्चे भय के साये में जी रहे हैं। लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि शिकायतें,आवेदन,पुलिस को फोन,थाने में गुहार और महापौर के निर्देशों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती,तो क्या प्रशासन किसी बड़ी वारदात का इंतजार कर रहा है?
महापौर ने दिए निर्देश,फिर भी कार्रवाई शून्य
राकेश पांडेय का कहना है कि उनकी शिकायत के बाद महापौर मंजूषा भगत ने स्वयं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को फोन कर असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार कर जेल भेजने के निर्देश दिए थे। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी मैदान में न तो नियमित पुलिस गश्त शुरू हुई और न ही असामाजिक तत्वों के खिलाफ कोई प्रभावी अभियान चलाया गया। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि शहर की प्रथम नागरिक के निर्देशों का भी पालन नहीं हो रहा, तो आम नागरिक की शिकायतों का क्या महत्व रह जाता है?
शाम 7 बजे के बाद मैदान में लगता है बाहरी लोगों का जमावड़ा
स्थानीय लोगों के अनुसार दिन में मैदान लगभग खाली रहता है, लेकिन शाम सात बजे के बाद रात 11ः30 से 12 बजे तक दोपहिया और चारपहिया वाहनों की कतार लग जाती है। अधिकांश लोग आसपास के मोहल्लों के नहीं,बल्कि गांधीनगर,गोधनपुर,बाबूपारा और शहर के अन्य इलाकों से आते हैं। आरोप है कि यहां शराब पीना,तेज आवाज में संगीत बजाना, जन्मदिन पार्टियां मनाना, स्काई शॉट जैसे पटाखे चलाना और बुलेट मोटरसाइकिल से जानबूझकर मिसफायर कर पूरे क्षेत्र में दहशत फैलाना आम बात हो गई है।

प्रशासन से मांग…
वार्डवासियों ने आईजी,एसपी और कलेक्टर से मांग की है कि…

– मैदान में नियमित रात्रिकालीन पुलिस पेट्रोलिंग तत्काल शुरू की जाए।
– असामाजिक तत्वों और शराबखोरी करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए।
– सभी किराएदारों का तत्काल पुलिस सत्यापन कराया जाए।
– धमकी देने वाले आरोपियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
– हाईमास्ट लाइट,सीसीटीवी कैमरे और मैदान की घेराबंदी की जाए।
– नगर निगम नियमित सफाई कराए और अवैध कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना लगाए।
– शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।


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