कोलकाता,01 मई 2026। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदान के दौरान मिली गड़बडि़यों की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए निर्वाचन आयोग ने दो विधानसभा क्षेत्र के 15 बूथों पर पुनर्मतदान का फैसला लिया है। पुनर्मतदान के तहत मगराहट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के 11 बूथों और डायमंड हार्बर के 4 बूथ शामिल हैं। यह पुनर्मतदान 2 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पुनर्मतदान कराया जाएगा। आयोग ने यह निर्णय 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान मिली शिकायतों और रिपोर्टों की समीक्षा के बाद लिया। रिटर्निंग अधिकारियों, पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट, वीडियो फुटेज और जमीनी हालात के आधार पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 58(2) के तहत मतदान रद्द किया गया। सूत्रों के मुताबिक, मतदान के दिन ईवीएम खराबी, बूथ कैप्चरिंग और हिंसा जैसी घटनाओं की शिकायतें सामने आई थीं। निर्देश के अनुसार, पुनर्मतदान वाले सभी बूथों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की कड़ी तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही वेबकास्टिंग और माइक्रो ऑब्जर्वरों की निगरानी में मतदान प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। जिला निर्वाचन अधिकारी को सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि जिन क्षेत्रों में पुनर्मतदान होना है, वहां मुनादी और अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार किया जाए और सभी उम्मीदवारों को लिखित सूचना दी जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। पुनर्मतदान के तहत मगराहट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के 11 बूथों और डायमंड हार्बर के 4 बूथ शामिल हैं। मगराहट पश्चिम के जिन बूथों पर मतदान होगा,उनमें उत्तर इयरपुर एफपी स्कूल,नजरापुर स्कूल,देवहाट एफपी स्कूल,घोला नयापाड़ा गर्ल्स हाई मदरसा,एकतारा मल्लिक फ्री प्राइमरी स्कूल और बहिरपुर कुरकुरिया फ्री प्राइमरी स्कूल के विभिन्न कक्ष शामिल हैं। वहीं डायमंड हार्बर में बागड़ा जूनियर हाई स्कूल, चांदना फ्री प्राइमरी स्कूल, हरिदेवपुर फ्री प्राइमरी स्कूल और रायनगर हैप्पी स्कूल के बूथों पर पुनर्मतदान कराया जाएगा। इस बीच फलता विधानसभा क्षेत्र के कुछ बूथों पर भी पुनर्मतदान की मांग उठी है। चुनाव आयोग ने कहा है कि यह मामला अभी विचाराधीन है और रिपोर्ट की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
टीएमसी केंद्रीय कर्मचारियों को मतगणना
पर्यवेक्षक नियुक्त करने के खिलाफ पहुंची सुप्रीम कोर्ट
पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों की मतगणना 4 मई को होगी। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विधानसभा चुनाव में मतगणना पर्यवेक्षकों के रूप में केवल केंद्र सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों की नियुक्ति के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। टीएमसी ने 4 मई को होने वाली मतगणना का हवाला देते हुए याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की है। आइए जानते हैं याचिका में क्या कहा गया है। टीएमसी ने याचिका दायर कर मतगणना पर्यवेक्षकों के रूप में की जा रही नियुक्ति में पश्चिम बंगाल राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी शामिल करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया में केवल केंद्रीय कर्मचारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों की ही नियुक्ति करने का निर्णय कर भेदभाव करने का काम किया है। ऐसे में मतगणना तारीख की नजदीकी को देखते हुए इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की जानी चाहिए। इससे पहले टीएमसी ने मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था, लेकिन गुरुवार को हाई कोर्ट ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया। टीएमसी की याचिका के खिलाफ आयोग ने तर्क दिया था कि यह निर्देश मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता के बारे में आशंकाओं के आधार पर जारी किया गया था और इसी तरह के निर्देश केरल जैसे अन्य राज्यों में भी लागू किए गए हैं। उसके बाद हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रत्येक मतगणना केंद्र पर कम से कम एक व्यक्ति, विशेष रूप से मतगणना पर्यवेक्षक केंद्र सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का अधिकारी की ही नियुक्ति करने के आदेश दिए थे।
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