बदले में के्रडिट-रॉयल्टी भी नहीं ली,देश पहली बार ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का मेजबान
नई दिल्ली,13 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि सस्ती दवाओं से लेकर प्रतिभा तक, दुनिया भारत पर भरोसा करती है। भारत ने दुनिया को शून्य दिया,लेकिन कभी इसका श्रेय या रॉयल्टी नहीं मांगी। दिल्ली में पहली बार हो रहे ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में मोदी ने 25 मिनट स्पीच दी। कहा कि भारत की ताकत दूसरों को सक्षम बनाने में है। उन्होंने डिजिटल तकनीक,वैक्सीन सप्लाई, आर्थिक सुधारों और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत की भूमिका का जिक्र किया। तीन दिन का यह कार्यक्रम 15 अक्टूबर को खत्म होगा। इस साल फोरम की थीम‘बदलती दुनिया में ताकत के नए स्रोत तय करना’ है।
पीएम बोले…सरकार का उद्देश्य नागरिकों को निर्भर बनाना नहीं
मोदी ने कहा…सरकार के पास अधिकार है, लेकिन उसका उद्देश्य अपने नागरिकों को व्यवस्था पर निर्भर बनाना नहीं होना चाहिए। बल्कि,उसका उद्देश्य अपने नागरिकों को सशक्त और सशक्त बनाना होना चाहिए, और भारत इसी राह पर चल रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा…भारत की स्टार्टअप जर्नी इसी बदलाव का उदाहरण है। 2014 से पहले भारत में 100 स्टार्टअप थे, अब उससे ज्यादा हैं। इसमें से आधे छोटे शहरों में आते हैं। यानी इनोवेशन के अवसर ज्यादा लोगों तक पहुंच रहे हैं। नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। पावर के पर्पज पर जो फोकस है,यही गवर्नेंस में भी जरूरी है। सरकार के पावर अथॉरिटी है,लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि नागरिक,सरकार पर ही निर्भर हो जाए। इसी पर चलते हुए भारत ने एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला।
मोदी बोले…ब्लूमबर्ग न्यू
इकोनॉमी फोरम दुनिया का एक प्रमुख वैश्विक मंच
पीएम ने कहा,ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम दुनिया का एक प्रमुख वैश्विक मंच है,जहां अलग-अलग देशों के नेता,बड़े उद्योगपति,निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ अर्थव्यवस्था, कारोबार, निवेश,तकनीक और दुनिया में बदलते राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा करते हैं। इसकी शुरुआत 2018 में हुई थी। खास बात यह है कि भारत पहली बार इस फोरम की मेजबानी कर रहा है। इस साल की थीम ‘एक बदलती दुनिया में ताकत के नए स्रोत तय करना’ है।
चर्चा का मुख्य फोकस यह होगा कि बदलते वैश्विक समीकरण, तकनीक, व्यापार और निवेश दुनिया की अर्थव्यवस्था को किस तरह प्रभावित कर रहे हैं।
मोदी ने कहा… हमने 100 से ज्यादा देशों में वैक्सीन की सप्लाई की
पीएम ने कहा… हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए पैसा सीधे अकाउंट में पहुंचाने की व्यवस्था बनाई है। गवर्नमेंट और सिटिजन के बीच सीधा रास्ता बना है। कोविड के दौरान वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा महत्व था। तब कहा गया कि जिनके पास इसे बनाने की सामर्थ्य नहीं है,उन तक भी पहुंचेगी।
पावर दूसरों को एम्पावर करने के लिए होती है…
पीएम ने कहा- इतिहास में अनेक वैश्विक संगठन बने। उनके अपने-अपने हित रहे हैं। हमने इंटरनेशनल सोलर अलायंस, लाइफस्टाइल फॉर एन्वायर्नमेंट जैसे इनीशिएटिव लिए। भारत किन विचारों को लेकर सामने आया,ये सबके सामने है। भारत जोड़ने और जुड़ने पर बल देता है। पावर दूसरों को एम्पावर करने के लिए ही है। भारत रिलायबिलिटी और स्टेबिलिटी की बात करता है।
भारत ने जीरो के लिए रॉयल्टी नहीं मांगी…
पीएम मोदी ने कहा…जब दुनिया को अफोर्डेबल मेडिसिन की जरूरत होती है,तब यह भारत से आती है। जब दुनिया को टैलेंट की जरूरत होती है,तब भारत के युवाओं पर भरोसा होता है। ये स्पष्ट है कि दुनिया को एक स्टीडी पिलर की जरूरत होती है,तब भारत अपना दायित्व समझते हुए हाथ आगे बढ़ाता है।
एआई हर सेक्टर में काम करने के तरीके बदल रहा…
पीएम ने कहा…दुनिया एक संकट से बाहर निकलने का रास्ता तलाशती है, तभी दूसरा सामने आ जाता है। सप्लाई चेन हो,एनर्जी हो,मिनरल,पेमेंट्स या टेक्नोलॉजी,दबाव-दबदबे का माध्यम बन रहे हैं। इन सबके बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर सेक्टर में काम करने के तरीके बदल रहा है। दुनिया के सामने बड़ा सवाल भरोसे का है। भरोसा ये कि जरूरत के समय सप्लाई जारी रहेगी। भरोसा ये कि जो वादे किए वो निभाए जाएंगे। संकट के समय पार्टनर कंट्री साथ रहेगी। भारत इसी सोच के साथ सामने है।
प्रधानमंत्री ने कहा- एनर्जी ट्रांजिशन के नए अवसर भी बन रहे
पीएम ने कहा- फॉसिल फ्यूल का लक्ष्य हासिल करने वाला भारत पहला जी-20 देश बना। ये केवल कमिटमेंट पूरा करने की बात नहीं थी, ये अपनी जर्नी पूरी करने की बात थी।
ब्लूमबर्ग फोरम में कई विदेशी हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद
प्रधानमंत्री ने कहा- ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में विदेश से कई बड़ी हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, इटली के पूर्व प्रधानमंत्री और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के पूर्व अध्यक्ष मारियो द्रागी, अमेरिका की पूर्व वाणिज्य मंत्री जीना रायमोंडो, मॉडर्ना के सह-संस्थापक नौबार अफेयान, सिस्को के सीईओ चक रॉबिंस, ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष जोनाथन ग्रे और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर शामिल हैं। ये नेता और कारोबारी वैश्विक अर्थव्यवस्था, निवेश, तकनीक और बदलते अंतरराष्ट्रीय आर्थिक समीकरणों पर चर्चा करेंगे।
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