Breaking News

अंबिकापुर@आयुष्मान कार्ड से पूरा भुगतान बुक, फिर भी परिजनों से लिए ₹87,300; महावीर हॉस्पिटल का लाइसेंस एक माह के लिए हुआ निलंबित

Share

न्यूरो सर्जरी के लिए पंजीयन में विशेषज्ञ का नाम नहीं, रेफरल प्रक्रिया में भी मिली खामी; आयुष्मान योजना से तीन माह बाहर रखने की अनुशंसा

अंबिकापुर,13 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। मरीज की जान बचाने की उम्मीद में अस्पताल पहुंचने वाले परिवार को यदि इलाज के साथ आर्थिक बोझ भी उठाना पड़े, तो स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अंबिकापुर के श्री महावीर हॉस्पिटल में एक मरीज की मौत के बाद सामने आई शिकायत की जांच में स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर अनियमितताएं पाई हैं। आयुष्मान कार्ड से इलाज की पूरी राशि बुक किए जाने के बावजूद मरीज के परिजनों से अलग से 87,300 रुपये लेने की बात जांच में सामने आई है। इसके अलावा न्यूरो सर्जरी करने वाले चिकित्सक का नाम अस्पताल के पंजीयन दस्तावेजों में दर्ज नहीं होने और मरीज के रेफरल की प्रक्रिया में खामियां मिलने पर अस्पताल का लाइसेंस एक माह के लिए निलंबित कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के 13 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार, अस्पताल का लाइसेंस 17 अक्टूबर से 16 नवंबर 2026 तक निलंबित रहेगा। साथ ही, आयुष्मान योजना और खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत अस्पताल का पंजीयन तीन महीने के लिए निलंबित करने की कार्रवाई हेतु शासन को प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए गए हैं। परिजनों से ली गई 87,300 रुपये की राशि वापस कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

शिकायत में इलाज से लेकर मेडिकल रिकॉर्ड तक पर सवाल
मामला शिकायतकर्ता मृण्मयी पाण्डेय की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके परिजन को समुचित इलाज नहीं मिला और इसी कारण उनकी मृत्यु हुई। शिकायत में सीटी स्कैन, एक्स-रे, रेफरल और डेथ समरी जैसे महत्वपूर्ण मेडिकल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने तथा आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद इलाज के नाम पर छह से सात लाख रुपये वसूलने के आरोप भी लगाए गए थे। शिकायतकर्ता ने दस्तावेजों को छिपाने या नष्ट किए जाने की आशंका भी जताई थी।
इन आरोपों की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, अंबिकापुर के माध्यम से टीम गठित की गई। जांच प्रतिवेदन और अस्पताल के स्पष्टीकरण का परीक्षण करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग होम एक्ट के उल्लंघन तथा आयुष्मान योजना के पालन में अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई की।

न्यूरो सर्जरी हुई, लेकिन पंजीयन में विशेषज्ञ का नाम नहीं
जांच में सामने आया कि मरीज के मस्तिष्क की न्यूरो सर्जरी करने वाले चिकित्सक का नाम अस्पताल के पंजीयन दस्तावेजों में दर्ज नहीं था। विभागीय आदेश के अनुसार, न्यूरो सर्जरी जैसी उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा का उल्लेख भी अस्पताल के पंजीयन दस्तावेजों में नहीं मिला। इस तरह की चिकित्सा सेवा लेने से पहले स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक सूचना दिए जाने का पालन भी नहीं किया गया।
अस्पताल प्रबंधन ने अपने जवाब में कहा कि शिकायतकर्ता ने अस्पताल के प्रोपराइटर डॉ. सुधांशु किरण को गलत इलाज के लिए जिम्मेदार ठहराया है, जबकि मरीज का उपचार अन्य चिकित्सकों की टीम ने किया था। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी प्रोपराइटर की होती है। विभाग ने मरीज के रेफरल की प्रक्रिया में भी खामियां पाईं।
यह मामला केवल किसी एक चिकित्सक की भूमिका तक सीमित नहीं रह जाता। जब किसी अस्पताल में गंभीर ऑपरेशन किया जाता है, तो संबंधित सुविधा की अनुमति, विशेषज्ञ चिकित्सक की उपलब्धता और उपचार की जवाबदेही से जुड़े रिकॉर्ड का स्पष्ट होना जरूरी है। जांच में इन बिंदुओं पर खामियां मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हुए हैं।

आयुष्मान का पूरा पैकेज बुक, फिर अतिरिक्त भुगतान क्यों?
इस प्रकरण का सबसे गंभीर पहलू आयुष्मान योजना से जुड़ा है। विभागीय जांच के अनुसार, मरीज के उपचार के लिए आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पूरी राशि बुक की गई थी। इसके बाद भी परिजनों से 87,300 रुपये लिए गए। विभाग ने इसे अनियमित वसूली मानते हुए राशि वापस कराने के निर्देश दिए हैं।
आयुष्मान जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को निर्धारित पैकेज के तहत इलाज उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि उपचार का पूरा भुगतान योजना के तहत दर्ज हो और इसके बाद भी मरीज के परिजनों से अतिरिक्त रकम ली जाए, तो यह जांच का गंभीर विषय है। सवाल यह है कि अतिरिक्त राशि किस मद में ली गई, उसका हिसाब क्या था और भुगतान के समय परिजनों को क्या जानकारी दी गई थी?
विभागीय आदेश में यह भी उल्लेख है कि इससे पहले भी अस्पताल में मरीज से अधिक राशि लेने की शिकायत मिली थी, जिस पर अस्पताल को कड़ी चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद दोबारा अनियमितता सामने आने से अस्पताल की कार्यप्रणाली और पूर्व कार्रवाई के प्रभाव पर सवाल उठते हैं।

एक माह का लाइसेंस निलंबन, योजना से तीन माह बाहर रखने की प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन के आधार पर अस्पताल का लाइसेंस एक माह के लिए निलंबित करने का आदेश दिया है। आयुष्मान योजना में मिली अनियमितताओं को देखते हुए तीन महीने के लिए योजना से अस्पताल का पंजीयन निलंबित करने हेतु शासन को प्रतिवेदन भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हालांकि, लाइसेंस निलंबन और आयुष्मान योजना से संबद्धता निलंबित करने की कार्रवाई अलग-अलग हैं। उपलब्ध आदेश के अनुसार, एक माह के लाइसेंस निलंबन का निर्णय लिया जा चुका है, जबकि योजना के तहत तीन महीने के निलंबन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया निर्देशित की गई है।

अब इन सवालों के जवाब भी जरूरी
इस कार्रवाई के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शिकायतकर्ता को सभी मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराए गए या नहीं, 87,300 रुपये की वापसी कब तक होगी और न्यूरो सर्जरी से संबंधित पंजीयन तथा विशेषज्ञ चिकित्सक की उपलब्धता की जिम्मेदारी तय करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि मरीज की मृत्यु के कारणों और कथित चिकित्सकीय लापरवाही की जांच में क्या निष्कर्ष निकला। अस्पताल के खिलाफ हुई विभागीय कार्रवाई अनियमितताओं की गंभीरता को रेखांकित करती है, लेकिन मरीज की मृत्यु के लिए चिकित्सकीय लापरवाही को अंतिम रूप से जिम्मेदार ठहराने का निष्कर्ष अलग जांच और उपलब्ध चिकित्सकीय साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। स्वास्थ्य विभाग को शिकायतकर्ता को जांच की स्थिति, मेडिकल रिकॉर्ड और राशि वापसी के संबंध में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
स्वास्थ्य सेवा में मरीज केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि भरोसे के साथ अस्पताल पहुंचने वाला व्यक्ति होता है। सरकारी योजना के नाम पर उपचार का भुगतान दर्ज होने के बाद भी अतिरिक्त रकम वसूलने और गंभीर चिकित्सा सुविधा के पंजीयन में खामियां मिलने जैसे मामलों में केवल औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। जरूरी है कि जांच के निष्कर्षों पर समयबद्ध अमल हो, जिम्मेदारी तय हो और ऐसी व्यवस्था बने जिससे किसी दूसरे परिवार को इलाज के दौरान इसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


Share

Check Also

अंबिकापुर@ग्लैमर के साथ समाजसेवा की झलक,अंबिकापुर में उर्वशी रौतेला वअक्षरा सिंह का दिखेगा जलवा

Share 15 को बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला,16 को भोजपुरी स्टार अक्षरा सिंह करेंगी शिरकत,सरगवां पैलेस …

Leave a Reply