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खड़गवां (एमसीबी)@करोड़ों की नहर बनी या भ्रष्टाचार की मिसाल? हाथ लगाते ही झड़ रही कंक्रीट

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  • करोड़ों खर्च,लेकिन पहली बारिश में बहने लगी गुणवत्ता! नहर निर्माण पर उठे बड़े सवाल…
  • खड़गवां में करोड़ों की नहर पर सवाल…आधा निर्माण…पहले ही उखड़ने लगी कंक्रीट…
  • नहर निर्माण में बड़ा खेल… 8 इंच की जगह 4 इंच ढलाई का आरोप…जांच की मांग…
  • कागजों में मजबूत…जमीन पर कमजोर…करोड़ों की नहर निर्माण पर भ्रष्टाचार के आरोप…
  • नहर निर्माण में कथित गड़बड़ी…ठेकेदार-इंजीनियर की मिलीभगत के आरोप…ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
  • करोड़ों की परियोजना पर सवाल…हाथ लगाने से झड़ रही कंक्रीट… जिम्मेदार कौन?
  • सिंचाई परियोजना या सरकारी धन की बर्बादी… नहर निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल…

-राजेन्द्र शर्मा –
खड़गवां (एमसीबी),15 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के खड़गवां विकासखंड में किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से कराए जा रहे नहर लाइनिंग एवं आरसीसी चैनल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं,स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता,घटिया सामग्री के उपयोग और गुणवत्ता से समझौता किए जाने का आरोप लगाया है, उनका कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही कई स्थानों पर कंक्रीट झड़ने लगी है और पहली ही बारिश में नहर का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने लगा है, ग्रामीणों का आरोप है कि जिस परियोजना से वर्षों तक किसानों को लाभ मिलना था,वह निर्माण के दौरान ही दम तोड़ती दिखाई दे रही है, ऐसे में करोड़ों रुपये के सरकारी धन के उपयोग और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
हाथ लगाते ही झड़ रही कंक्रीट…
स्थानीय लोगों के अनुसार सगम जलाशय से जुड़ी प्रस्तावित लगभग एक किलोमीटर लंबी नहर में अभी करीब 600 मीटर तक ही निर्माण कार्य हुआ है,लेकिन तैयार हो चुके हिस्से की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कंक्रीट इतनी कमजोर है कि हाथ से रगड़ने पर ही रेत की तरह झड़ने लगती है,कई स्थानों पर दरारें भी दिखाई दे रही हैं,ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर निर्माण कार्य जारी है,वहीं दूसरी ओर पहले से निर्मित हिस्सा टूटना शुरू हो गया है,इससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्योरिंग नहीं होने और घटिया मिश्रण का आरोप-ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के बाद कंक्रीट की आवश्यक तराई (क्योरिंग) नहीं कराई गई, साथ ही सीमेंट, रेत और गिट्टी का अनुपात भी मानकों के अनुरूप नहीं रखा गया,उनका कहना है कि यही कारण है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही कंक्रीट कमजोर पड़ने लगी है और पहली बारिश में ही कई स्थानों पर क्षति दिखाई देने लगी,यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
जनपद सदस्य पहुंचे मौके पर- मामले की जानकारी मिलने के बाद जनपद सदस्य युगांतर श्रीवास्तव निर्माण स्थल पहुंचे और कार्य का निरीक्षण किया,उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा है तो इसकी उच्चस्तरीय तकनीकी जांच होनी चाहिए,उन्होंने सूचना पटल नहीं लगाए जाने,निर्माण कार्य के समय से पहले क्षतिग्रस्त होने और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों की जांच कर दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।
किसानों में चिंता-क्षेत्र के किसानों का कहना है कि वर्षों की मांग के बाद नहर निर्माण कार्य शुरू हुआ था, यदि निर्माण ही घटिया होगा तो भविष्य में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होगी और किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा, ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य का थर्ड पार्टी तकनीकी परीक्षण कराया जाए और यदि गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी से दोबारा मानक के अनुरूप निर्माण कराया जाए।
तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप…
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में निर्धारित तकनीकी मापदंडों का पालन नहीं किया गया,उनका कहना है कि जहां नहर के बेस की मोटाई लगभग 8 इंच होनी चाहिए थी,वहां कथित तौर पर केवल लगभग 4 इंच की ढलाई की गई, इसी प्रकार नहर की साइड स्लोप की मोटाई भी निर्धारित मानकों से कम रखी गई है,यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे निर्माण की मजबूती और परियोजना की दीर्घकालिक उपयोगिता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सूचना पटल तक नहीं लगाया गया…
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर सूचना पटल (डिस्प्ले बोर्ड) नहीं लगाया गया है,इससे परियोजना की लागत,स्वीकृत कार्य,तकनीकी मापदंड, निर्माण एजेंसी और कार्य अवधि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां आम लोगों से छिपी हुई हैं,स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सूचना पटल लगाया जाना आवश्यक होता है, लेकिन यहां इसका पालन नहीं किया गया।
इंजीनियर और ठेकेदार की कथित मिलीभगत पर सवाल…
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले विभागीय अधिकारियों ने समय पर गुणवत्ता परीक्षण नहीं किया,आरोप लगाया जा रहा है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण घटिया निर्माण कार्य को नजरअंदाज किया जा रहा है,हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।
मुख्यालय से नदारद रहने का भी आरोप…
स्थानीय लोगों ने जल संसाधन विभाग खड़गवां में पदस्थ इंजीनियर एवं एसडीओ पर भी सवाल उठाए हैं, उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी अक्सर मुख्यालय में उपलब्ध नहीं रहते, जिसके कारण करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों की प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है,ग्रामीणों का कहना है कि यदि अधिकारी नियमित निरीक्षण करते तो निर्माण की गुणवत्ता को लेकर इतनी शिकायतें सामने नहीं आतीं।
अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल…
करोड़ों रुपये की परियोजना में गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है?
क्या निर्माण कार्य स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुसार हो रहा है?
सूचना पटल क्यों नहीं लगाया गया?
यदि कंक्रीट हाथ लगाने से झड़ रही है तो गुणवत्ता परीक्षण किसने किया?
पहली बारिश में निर्माण क्षतिग्रस्त होने की जिम्मेदारी किसकी होगी?
क्या विभाग स्वतंत्र तकनीकी जांच कराएगा?

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग…
ग्रामीणों और किसानों ने जिला प्रशासन तथा जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है, उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता या गुणवत्ता में कमी सामने आती है तो दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए,ताकि सरकारी धन की बर्बादी रोकी जा सके और किसानों को गुणवत्तापूर्ण सिंचाई सुविधा मिल सके।


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