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रायपुर@इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार पर विधानसभा में हंगामा

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महंत ने उठाए सवाल…वन मंत्री बोले- किसी को नहीं बचाया,41 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर,15 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार और वन्यजीव तस्करी का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल से जुड़े जवान का नाम पहले सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक संरक्षण या सिंडिकेट काम कर रहा है। महंत ने कहा कि वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो पहले ही संवेदनशील इलाकों में शिकार और तस्करी को लेकर अलर्ट जारी कर चुका था, इसके बावजूद वन विभाग प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सका। उन्होंने आरोप लगाया कि टाइगर रिजर्व में चोरी की घटना के दौरान कैमरे दो घंटे तक बंद रहे और सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि पिछले 30 महीनों में छह बाघों की मौत हुई है। इसके जवाब में वन मंत्री केदार कश्यप ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को बचाने या उसका नाम छिपाने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में लगे 126 कैमरे पूरी तरह कार्यरत हैं और कैमरे बंद होने की बात तथ्यहीन है। सरकार बाघ संरक्षण को लेकर गंभीर है तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की मौजूदा संख्या और बजट की जानकारी मांगी। मंत्री कश्यप ने बताया कि वर्ष 2022 के आकलन के अनुसार रिजर्व में पांच बाघों की पुष्टि हुई थी।सरकार चरणदास महंत ने कहा कि बस्तर में नक्सल गतिविधियां कम होने के बाद अब वन्यजीव तस्कर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के महीनों में कई बाघों का शिकार हुआ और महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद विभाग ने पारदर्शिता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बाघ संरक्षण पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, फिर भी लगातार शिकार की घटनाएं चिंता का विषय हैं। वन मंत्री ने सदन में बताया कि मार्च 2026 में दर्ज एक मामले में एक बाघ की खाल बरामद होने के बाद 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। वहीं 29 जून को मिली सूचना के आधार पर कांकेर जिले में संयुक्त अभियान चलाकर महाराष्ट्र के गढ़चिरौली निवासी बियेश्वर गेड़ाम और बाबूराव मडावी को दो बाघों की खाल, 13 मूंछें और एक मोटरसाइकिल के साथ गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि बियेश्वर गेड़ाम महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल में सिपाही है, जबकि बाबूराव मडावी पुलिस का गोपनीय मुखबिर था।शहर और स्थानीय मार्गदर्शिका मंत्री ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ के बाद छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर नेतीवाड़ा गांव में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे, चाकू,12 नाखून,चार कैनाइन दांत और इंद्रावती नदी किनारे छिपाकर रखी गई एक और बाघ की खाल बरामद की गई। बरामद सभी नमूनों को डीएनए और वैज्ञानिक जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून भेजा गया है।
नकटी मामले में विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव
नकटी मामले को लेकर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाकर आरोप लगाया कि गरीब परिवारों के मकानों पर की गई कार्रवाई मानवाधिकारों का उल्लंघन है। कांग्रेस ने कहा कि बुलडोजर कल्चर बीजेपी शासित राज्यों में बढ़ रहा है। सरकार ने अपनी ही पार्टी के सांसद का मान नहीं रखा। विपक्ष ने पूरे मामले पर सदन में चर्चा कर सरकार से जवाब मांगा। स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद विपक्ष ने गर्भगृह में जाकर नारेबाजी की। सभी कांग्रेस विधायक निलंबित कर दिए गए।
सरकार बोली…नकटी बुलडोजर कार्रवाई संवैधानिक
सदन में मंत्री टंकराम वर्मा ने नकटी में हुई बुलडोजर कार्रवाई को संवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि सभी अतिक्रमणकारियों को विधिवत नोटिस जारी किया गया था। कब्जा हटाने से पहले सभी को सूचना दी गई थी। बेदखली की कार्रवाई न्यायालयीन प्रक्रिया और कानून के अनुरूप की गई। अतिक्रमणकारियों का पुनर्वास भी किया गया। कार्रवाई के दौरान किसी के घरेलू सामान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। यह कहना सही नहीं है कि तोड़फोड़ के दौरान क्षेत्र बारिश से प्रभावित था।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री घिरे… अमानक दवा खरीद और भर्ती पर तीखी बहस

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन बेहद हंगामेदार रहा। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने राज्य में अमानक दवाओं की खरीद का संवेदनशील मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि आखिर गुजरात की ‘यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड’ कंपनी की उन दवाओं को छत्तीसगढ़ में क्यों खरीदा गया, जो पहले से ही अमानक घोषित की जा चुकी थीं। इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी सरकार को घेरा और पूछा कि जो दवाइयां गुजरात में प्रतिबंधित हैं,उन्हें छत्तीसगढ़ में अनुमति कैसे मिली? उन्होंने गुजरात की परिपाटी से अलग हटकर छत्तीसगढ़ में अपनाई गई खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाए। विपक्ष के तीखे हमलों के बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य में एहतियात के तौर पर उन दवाओं को बैन कर दिया गया है। मंत्री ने स्वीकार किया कि मेसर्स यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन टैबलेट्स को गुणवत्ता मानकों पर विफल रहने के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था, जिसकी सूचना 25 मार्च 2026 को प्राप्त हुई थी। हालांकि, मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित दवाओं और खरीदी गई दवाओं की कैटेगरी अलग है। उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित दवाओं की खरीद नहीं की गई है, बल्कि नियम के अनुसार एक कंपनी की दो दवाएं बैन होने पर ही पूर्ण कार्रवाई की जाती है। कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुए आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ के मरीजों को बिना क्वालिटी की दवाइयां दी जा रही हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या दवाइयों की खरीद से पहले कोई ‘प्री-टेस्ट’ नहीं कराया जाता? इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सीजीएमएससी के नियमों के तहत पहले से प्री-टेस्ट की व्यवस्था नहीं है,लेकिन दवा आपूर्ति होने के बाद विभागीय लैब में उनकी गुणवत्ता की जांच की जाती है। विपक्ष ने इसे जनता की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ बताते हुए 6 करोड़ रुपये से अधिक की ‘अनकोटेड’ दवा खरीद पर सवाल खड़े किए। प्रश्नकाल के दौरान वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक ने सरकारी मेडिकल संस्थानों में आउटसोर्सिंग के जरिए की जा रही भर्ती के नियमों में धांधली का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात किए जाने वाले कर्मियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है? सदन में उन्होंने गंभीर खुलासा किया कि मेडिकल कॉलेजों में सफाई कर्मचारियों द्वारा मरीजों के गहने चोरी करने,शवगृह से गहने गायब होने और पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। कौशिक ने आरोप लगाया कि एजेंसियों को लाभ पहुंचाने के लिए पुलिस सत्यापन के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
नियमों की अनदेखी और करोड़ों के भुगतान पर जवाब-तलब
धरमलाल कौशिक ने सदन में आंकड़े पेश करते हुए बताया कि सरकार द्वारा 80 में से केवल 40 कर्मियों का ही पुलिस सत्यापन कराया गया है। उन्होंने जून 2026 तक बिना सत्यापन वाले कर्मचारियों को किए गए 14 करोड़ रुपये के भुगतान पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि बिना शर्तों के पालन के भुगतान करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सरकार कब कार्रवाई करेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों और दोषी प्लेसमेंट एजेंसियों के खिलाफ निश्चित रूप से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
खैरागढ़ में दवा खरीदी में कथित गड़बड़ी और भौतिक सत्यापन की मांग
वहीं, खैरागढ़ की विधायक यशोदा वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग पर अपने क्षेत्र में दवा खरीद में बड़ा घोटाला करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में 1 करोड़ रुपये की दवा खरीद के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। यशोदा वर्मा ने दावा किया कि जब उन्होंने मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) की मांग की, तो अधिकारी बिल जनरेट न होने का बहाना बनाने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि दवाएं कागजों पर बंट जाती हैं और बिल महीनों बाद बनते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने की पुरजोर मांग की है।
नकटी गांव मामले पर कांग्रेस का प्रदर्शन और निलंबन
सदन की कार्यवाही के दौरान शून्यकाल में नकटी गांव में हुई तोड़फोड़ का मुद्दा छाया रहा। कांग्रेस सदस्यों ने इसे अमानवीय कार्रवाई बताते हुए इस पर चर्चा की मांग की, जिसे लेकर सदन में भारी हंगामा हुआ। राजस्व मंत्री ने इसे केवल अतिक्रमण हटाने की नियमित कार्रवाई बताया और आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। सरकार के रुख से नाराज कांग्रेस के 30 विधायकों ने वेल में आकर जोरदार नारेबाजी की, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें सदन की गरिमा के उल्लंघन के चलते निलंबित कर दिया। यह घटना मानसून सत्र के तीसरे दिन का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम रही।


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