सलवार उतारना और ब्रेस्ट दबाना दुष्कर्म की कोशिश नहीं
पटना,15 जुलाई 2026। किसी महिला का सलवार उतारने की कोशिश करना और उसके सीने को दबाकर शारीरिक छेड़छाड़ करना दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना जा सकता। पटना हाई कोर्ट के इस हालिया फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई की। संकेत दिया कि अदालत पटना हाई कोर्ट के आदेश पर विस्तृत टिप्पणी करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल थे। यह सुनवाई उस स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) मामले में हो रही थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले के बाद शुरू किया था। उसी मामले में अदालत ने यौन अपराधों की सुनवाई के दौरान न्यायिक संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने अदालत का ध्यान पटना हाई कोर्ट के हालिया आदेश की ओर आकर्षित किया था। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट का विवादित फैसला रद किए जाने के बावजूद पटना हाई कोर्ट ने लगभग समान परिस्थितियों में वैसी ही टिप्पणियां की हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट रुख के बावजूद इस तरह के आदेश बार-बार सामने आ रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फूलका ने भी इस मुद्दे पर उनका समर्थन किया।इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कई बार पर्याप्त शोध और कानूनी अध्ययन के अभाव में ऐसे फैसले सामने आ जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पटना हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट भी विस्तृत आदेश पारित करेगा।
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