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नई दिल्ली@कैबिनेट ने वाराणसी में 14,448 करोड़ रुपये की गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दी

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नई दिल्ली,15 जुलाई 2026। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत से 46.039 किलोमीटर लंबे छह लेन के ग्रीनफील्ड गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इस परियोजना पर मुहर लगाई गई। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (एनएच-19) को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने वाली यह परियोजना शहर में यातायात जाम कम करने, गंगा तट के साथ बेहतर संपर्क स्थापित करने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत विकसित की जाएगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि वाराणसी में हर वर्ष 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। काशी में बढ़ते आवागमन और यातायात दबाव को देखते हुए सरकार ने शहर के परिवहन ढांचे को नई ऊंचाई देने के लिए इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि परियोजना में छह लेन का एलिवेटेड मुख्य मार्ग, 910 मीटर लंबा शानदार केबल-स्टेयड ब्रिज, 1.32 किलोमीटर लंबा एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवरब्रिज-सह-प्रमुख पुल, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा। परियोजना की कुल लागत में 6,037.85 करोड़ रुपये निर्माण कार्य तथा 541.11 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण पर खर्च किए जाएंगे। यह कॉरिडोर एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराएगा तथा शहर के सड़क नेटवर्क पर यातायात का दबाव काफी कम करेगा। 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति वाले इस मार्ग के बनने से परियोजना क्षेत्र में औसत यात्रा समय 60 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा। वहीं, एनएच-19 से काशी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने का समय 50 मिनट से घटकर लगभग 25 मिनट हो जाएगा। यह परियोजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप वाराणसी के बहु-माध्यमीय परिवहन नेटवर्क को मजबूत करेगी। इससे एनएच-19, वाराणसी रिंग रोड, लालबहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, काशी रेलवे स्टेशन, बनारस रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और रामनगर अंतर्देशीय जलमार्ग (आईडब्ल्यूएआई) पोर्ट के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा।
केंद्र ने ओडिशा व झारखंड में रेलवे की दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को दी मंजूरी
केंद्र सरकार ने ओडिशा और झारखंड में रेल मंत्रालय की 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को बुधवार को मंजूरी दी। ओडिशा और झारखंड के चार जिलों में प्रस्तावित इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क में करीब 145 किलोमीटर की वृद्धि होगी तथा इन्हें वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इस परियोजना पर मुहर लगाई गई। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में पत्रकार वार्ता में मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड के दोहरीकरण तथा राजखरसावां-डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी लाइन बिछाने की परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन परियोजनाओं से लाइन क्षमता बढ़ेगी, जिससे रेल परिचालन अधिक कुशल और विश्वसनीय बनेगा तथा यातायात का दबाव कम होगा।
उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है, जिससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं का आवागमन अधिक सुगम हो सकेगा।
इन परियोजनाओं से ओडिशा और झारखंड के चार जिलों में स्थित लगभग 1,526 गांवों, जिनकी कुल आबादी करीब 14 लाख है, को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। साथ ही क्षेत्र के आर्थिक विकास, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा, जो प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है। रेल मंत्रालय के अनुसार क्षमता विस्तार से ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवज्यू मंदिर और मेघाहातुबुरु पहाडि़यों जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने बताया कि ये रेल मार्ग कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर और जिप्सम जैसी प्रमुख खनिज एवं औद्योगिक वस्तुओं के परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। परियोजनाओं के पूरा होने पर माल ढुलाई क्षमता में 44 मिलियन टन प्रतिवर्ष की अतिरिक्त वृद्धि होगी। सरकार के अनुसार रेल परिवहन ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल माध्यम है। इन परियोजनाओं से देश की लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, लगभग 6 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत होगी तथा 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ के समान है।
चिप उत्पादन को बढ़ावा देने के
लिए सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी

केन्द्र सरकार ने सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी है और इसके लिए कुल बजट 1.27 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी। मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय मीडिया केन्द्र में अश्वनी वैष्णव ने कहा कि देश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को सतत और दीर्घकालिक समर्थन की आवश्यकता को पहचानते हुए और सेमीकॉन 1.0 के तहत आई गति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी गई है। इसका लक्ष्य देश को विश्व के सेमीकंडक्टर मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को और आगे बढ़ाना है। सेमिकॉन 2.0 के तहत भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए छह प्रमुख स्तंभ तय किए गए हैं। पहले स्तंभ में चिप डिजाइन को बढ़ावा देकर भारतीय कंपनियों को नई तकनीक और बौद्धिक संपदा (आईपी) विकसित करने में सहायता दी जाएगी। दूसरे स्तंभ के तहत चिप बनाने में काम आने वाली मशीनों, रसायनों, गैसों और अन्य सामग्री के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। तीसरे स्तंभ में देश में अधिक सेमीकंडक्टर फैब (चिप निर्माण संयंत्र) स्थापित करने पर जोर होगा। इतिहास चौथे स्तंभ के अंतर्गत चिप पैकेजिंग और परीक्षण (एटीएमपी/ओसैट) उद्योग को मजबूत किया जाएगा। पांचवें स्तंभ में देश-विदेश के प्रमुख संस्थानों के सहयोग से उन्नत चिप तकनीकों पर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
छठे स्तंभ के तहत विश्वविद्यालयों और उद्योगों के सहयोग से छात्रों और इंजीनियरों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देकर कुशल मानव संसाधन तैयार किए जाएंगे। वैष्णव ने कहा कि इससे भारत में संपूर्ण सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा, रोजगार बढ़ेगा और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी। उल्लेखनीय है कि अब तक 12 विनिर्माण इकाइयों को 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के संचयी निवेश के साथ मंजूरी दी गई है। स्वीकृत 12 प्रस्तावों में से तीन कंपनियों, माइक्रोन, केन्स और सीजी सेमी ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है और एक अन्य कंपनी के 2026 में शुरू होने की उम्मीद है। स्टार्टअप और एमएसएमई से चौबीस (24) सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता के लिए मंजूरी दी गई है, जबकि 105 स्टार्ट-अप/एमएसएमई को उद्योग-मानक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन स्वचालन (ईडीए) उपकरणों तक पहुंच प्रदान की गई है।


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