Breaking News

सूरजपुर@नवाचार से निखरी शिक्षा रामानुजनगर के शिक्षकों ने ‘शिक्षा गौरव अलंकरण 2025’ में रचा इतिहास

Share


तीन शिक्षकों को ‘शिक्षादूत’ और एक को ‘शिक्षा श्री’ सम्मान,प्रयोगधर्मी शिक्षण बना सफलता की पहचान
सूरजपुर,25 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)।
सीमित संसाधनों में भी अगर सोच नई हो और इरादे मजबूत,तो शिक्षा की तस्वीर बदली जा सकती है—रामानुजनगर के शिक्षकों ने इसे साबित कर दिखाया है,जिला स्तरीय मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण 2025 में विकासखंड के शिक्षकों ने अपने नवाचारों और समर्पण से ऐसा मुकाम हासिल किया, जो अब पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन गया है। मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण 2025 ने यह साबित कर दिया है कि शिक्षा में बदलाव के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े विचारों की जरूरत होती है,रामानुजनगर के इन शिक्षकों ने अपने समर्पण और नवाचार से यह दिखा दिया कि अगर शिक्षक ठान लें, तो किसी भी परिस्थिति में शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है,उनकी यह सफलता आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बनेगी।
भव्य आयोजन में मिला सम्मान
शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस गरिमामय समारोह में रामानुजनगर विकासखंड के तीन शिक्षकों को ‘शिक्षादूत’ और एक शिक्षक को ‘शिक्षा श्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया, कार्यक्रम जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसमें केबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और विधायक भुलन सिंह मरावी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, अतिथियों ने शिक्षकों के नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि आज के शिक्षक सिर्फ पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले असली निर्माता हैं।
व्यक्तिगत शिक्षण से बेहतर परिणामः राहुल कुमार निषाद- सहायक शिक्षक राहुल कुमार निषाद ने बच्चों के लिए व्यक्तिगत शिक्षण योजना तैयार की, उन्होंने कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देते हुए दीवार लेखन, चित्र आधारित शिक्षा और नियमित मूल्यांकन के माध्यम से सीखने के स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया।
बालिकाओं को मिला नया आत्मविश्वासः मंजुलता सतपाती
सहायक शिक्षिका मंजुलता सतपाती ने बालिकाओं की शिक्षा और सहभागिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, सांस्कृतिक कार्यक्रम, रचनात्मक गतिविधियां और स्वच्छता अभियान के माध्यम से उन्होंने बच्चों में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित की।
प्रयोग आधारित शिक्षा : दिलीप कुमार श्रीवास्तव का योगदान
माध्यमिक शाला बकाना के शिक्षक दिलीप कुमार श्रीवास्तव ने विज्ञान और गणित को आसान बनाने के लिए प्रयोग आधारित शिक्षण को अपनाया, कम लागत वाले मॉडल और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से उन्होंने बच्चों में जिज्ञासा और तार्किक सोच को बढ़ावा दिया, जिससे परीक्षा परिणामों में भी सुधार हुआ।
विद्यालय और समाज के बीच मजबूत संबंध
इन शिक्षकों ने कक्षा तक सीमित न रहकर समाज के साथ भी मजबूत जुड़ाव बनाया,पालक-शिक्षक बैठक, जनजागरूकता अभियान और सामुदायिक सहयोग के जरिए विद्यालयों को एक सशक्त शिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया गया।
अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा
इस सम्मान के बाद पूरे रामानुजनगर विकासखंड में उत्साह का माहौल है, यह उपलब्धि अन्य शिक्षकों को भी नवाचार अपनाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रेरित कर रही है, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत बताया।
नवाचारों ने बदली कक्षा की तस्वीर
सम्मानित शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों में ऐसे प्रयोग किए, जिन्होंने पढ़ाई को न सिर्फ आसान, बल्कि रोचक और प्रभावी बना दिया।
खेल-खेल में सीखना : संजय कुमार साहू की पहल
प्रधान पाठक संजय कुमार साहू ने ‘खेल-खेल में सीखना’ पद्धति को अपनाकर बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाई, स्थानीय संसाधनों से टीएलएम तैयार कर उन्होंने गणित और भाषा जैसे विषयों को सरल बनाया, कोरोना काल में मोहल्ला क्लास और ऑनलाइन माध्यम से बच्चों को पढ़ाना उनकी खास पहल रही, यूट्यूब के जरिए बच्चों को जोड़कर उन्होंने पढ़ाई को डिजिटल रूप दिया, जिसके लिए उन्हें ‘छत्तीसगढ़ नायक’ के रूप में भी पहचान मिली।


Share

Check Also

अम्बिकापुर@नदी में नहाने गए मामा-भांजी की डूबने से मौत…परिवार में मातम

Share अम्बिकापुर,25 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। शहर से लगे मेन्ड्राकला स्थित नदी में नहाने के दौरान …

Leave a Reply