
- चोरी गए पाइप मिले या बाजार से खरीदकर जब्ती दिखाई गई, अब सीसीटीवी फुटेज पर टिकी सबकी नजर
- चोरी के माल से ज्यादा चमकदार निकली बरामदगी, अब कोरिया पुलिस के दावे पर उठ रहे बड़े सवाल
- न्यायालय, बैंक और एसईसीएल में चोरी के बाद पुलिस ने किया खुलासा, लेकिन बरामद पाइपों की चमक ने ही खड़ी कर दी नई कहानी
- चोरी के पाइप मिले या बाजार से खरीदकर बना दी गई कहानी?
- कॉपर पाइप कांड, चोर पकड़े गए, पर बरामदगी पर क्यों उठ रहे सवाल?
- चमचमाते पाइपों ने बिगाड़ा खेल, खुलासे पर खड़े हुए नए सवाल
- बरामदगी के चमकते पाइप और पुलिस की फीकी पड़ती कहानी
- कॉपर पाइप कांड, CCTV खोलेगा सच या फाइलों में दब जाएगा राज?
- चोरी का माल या बाजार का माल? कॉपर पाइप कांड में उठते सवालों का पहाड़
-रवि सिंह-
कोरिया,11 जून 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में जिला एवं सत्र न्यायालय, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया,छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक और एसईसीएल के साकेत सदन से एयर कंडीशनरों के कॉपर पाइप चोरी होने का मामला पहले ही चर्चा में था,लेकिन अब चोरी से ज्यादा चर्चा उस ‘बरामदगी’की हो रही है जिसे पुलिस अपनी बड़ी उपलब्धि बताकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत कर चुकी है।
कोरिया पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि उसने चार अलग-अलग चोरी के मामलों का खुलासा कर लिया है,पुलिस के अनुसार देवेन्द्र कुमार रजक उर्फ दीपू, एक अपचारी बालक तथा चोरी का सामान खरीदने वाले नासिर खान, जय सिंह और मोहम्मद गफ्फार के खिलाफ कार्रवाई की गई है,करीब 92 हजार रुपये मूल्य के 18 एसी कॉपर पाइप बरामद कर लिए गए हैं और शत-प्रतिशत माल की जब्ती भी कर ली गई है,प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त हुई,फोटो जारी हुए,पुलिस ने सफलता का दावा किया और अधिकारियों-कर्मचारियों की पीठ थपथपाई गई, लेकिन तभी लोगों की नजर बरामद किए गए कॉपर पाइपों की तस्वीरों पर गई और यहीं से कहानी में नया मोड़ आ गया।
चोरी का माल था या दुकान का नया स्टॉक?
जिन पाइपों को पुलिस चोरी का माल बताकर प्रस्तुत कर रही थी,उनकी तस्वीरें देखने के बाद कई लोगों के मन में पहला सवाल यही उठा कि आखिर वर्षों से उपयोग में रहे एसी के कॉपर पाइप इतने चमकदार कैसे हो सकते हैं? तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि किसी भी एयर कंडीशनर में लंबे समय तक लगे रहने वाले कॉपर पाइपों का रंग समय के साथ बदल जाता है,उन पर धूल, जंगनुमा ऑक्सीकरण और उपयोग के निशान दिखाई देते हैं, लेकिन पुलिस द्वारा दिखाए गए पाइप ऐसे दिखाई दे रहे थे मानो अभी-अभी किसी हार्डवेयर या एसी पार्ट्स की दुकान से खरीदे गए हों, बस फिर क्या था, थाने के सामने चाय की दुकानों तक एक ही चर्चा शुरू हो गई—ये चोरी के पाइप हैं या नई खरीदारी का माल?
चोरी की घटना से बड़ा बन गया खुलासे का विवाद…
विडंबना देखिए कि शुरुआत में चर्चा चोरी की थी,लोग पूछ रहे थे कि न्यायालय और बैंक तक चोर कैसे पहुंच गए,फिर चर्चा इस बात की हुई कि आरोपी कौन हैं,और अब पूरा फोकस इस बात पर आ गया है कि बरामदगी असली थी या प्रतीकात्मक,यानी जिस चोरी के खुलासे से पुलिस अपनी सफलता साबित करना चाहती थी,वही खुलासा अब खुद सवालों के घेरे में खड़ा दिखाई दे रहा है।
सीसीटीवी फुटेज से खुल सकता है पूरा राज…
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी सीसीटीवी फुटेज साबित हो सकती है,स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यदि वास्तव में 6 जून को दोपहर 3 बजे से 4 बजे के बीच पुराने बस स्टैंड क्षेत्र स्थित किसी दुकान से कॉपर पाइप खरीदे गए थे और उन्हें थाने तक ले जाया गया था,तो रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों में इसकी तस्वीरें दर्ज हो सकती हैं,पुराने बस स्टैंड,आसपास की दुकानों,प्रमुख चौक-चौराहों और थाना परिसर में लगे कैमरों की फुटेज की निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि पुलिस द्वारा जब्त दिखाए गए पाइप वास्तव में चोरी के थे या फिर बाजार से खरीदे गए थे,यदि पुलिस का दावा सही है तो सीसीटीवी फुटेज उनकी कार्रवाई को मजबूत करेगी,वहीं यदि स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों में सच्चाई है तो वही फुटेज पूरे मामले का सबसे बड़ा खुलासा भी कर सकती है,यही कारण है कि अब लोगों की नजर जांच से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों में कैद उन तस्वीरों पर टिकी हुई है, जो इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने ला सकती हैं।
जनता मांग रही है पारदर्शिता, कहानी नहीं…
कोरिया जिले के लोगों का कहना है कि यदि पुलिस ने वास्तव में चोरी का पूरा माल बरामद किया है तो उसे विस्तार से सार्वजनिक किया जाए,कहां से बरामद हुआ? किसके कब्जे से मिला? क्या बरामद सामग्री का तकनीकी सत्यापन हुआ? क्या यह वही पाइप हैं जो संबंधित एसी से चोरी हुए थे? इन सवालों का जवाब देना किसी भी जांच एजेंसी की विश्वसनीयता के लिए जरूरी माना जाता है।
अंत में सबसे बड़ा सवाल…
कोरिया पुलिस कह रही है कि मामला सुलझ गया है,आरोपी गिरफ्तार हैं,माल बरामद है,प्रकरण का खुलासा हो चुका है,लेकिन जनता का एक वर्ग अभी भी पूछ रहा है क्या वास्तव में चोरी गया कॉपर पाइप बरामद हुआ था,या फिर बरामदगी की तस्वीरों में जो चमक दिखाई दे रही है,वही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा रहस्य है? जब तक इन सवालों का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब सामने नहीं आता,तब तक यह मामला कॉपर पाइप चोरी से ज्यादा कॉपर पाइप बरामदगी रहस्य के नाम से याद किया जाएगा,और तब तक जिले में यह व्यंग्य चलता रहेगा कि चोर तो पकड़ लिया गया,लेकिन जनता अभी भी बरामदगी को पकड़ने की कोशिश कर रही है।
देवेन्द्र रजक ने चोरी कबूली,कहानी यहीं तक ठीक थी…
पुलिस की कहानी के अनुसार देवेन्द्र कुमार रजक उर्फ दीपू और एक अपचारी बालक ने चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया था,पूछताछ में देवेन्द्र ने चोरी स्वीकार की और बताया कि उसने कॉपर पाइप अलग-अलग लोगों को बेच दिए,यहीं तक पुलिस की कहानी पर किसी को विशेष आपत्ति नहीं थी, चोरी हुई, आरोपी पकड़ा गया, आरोपी ने अपराध स्वीकार किया—यह जांच का सामान्य क्रम माना जा सकता है,लेकिन असली सवाल तब शुरू हुए जब बरामदगी की बारी आई।
पाइप कहां गए और बरामद क्या हुआ?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि देवेन्द्र ने पूछताछ में जिन लोगों के नाम बताए,उनमें एक बर्तन व्यवसायी का नाम भी शामिल था,इसके अलावा मोहम्मद गफ्फार,नासिर खान और जय सिंह के नाम सामने आए,लोग पूछ रहे हैं कि यदि चोरी का सामान वास्तव में इन लोगों को बेचा गया था तो फिर बरामदगी उन्हीं स्थानों से क्यों नहीं दिखाई गई? यदि पाइप पिघला दिए गए थे तो पुलिस ने शत-प्रतिशत बरामदगी कैसे दिखा दी? यदि पाइप सुरक्षित थे तो बरामदगी की तस्वीरों और पंचनामे का पूरा विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? इन सवालों का कोई स्पष्ट उत्तर अब तक सामने नहीं आया है।
सूत्रों का दावा और बढ़ाता है संदेह…
मामले को लेकर चर्चा का सबसे बड़ा कारण कुछ स्थानीय सूत्रों द्वारा किए जा रहे दावे हैं, सूत्रों का कहना है कि कथित रूप से बरामद दिखाए गए पाइप बाजार से खरीदकर लाए गए थे ताकि जब्ती पूरी दिखाई जा सके,यह दावा कितना सही है और कितना गलत, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि ऐसा दावा सार्वजनिक रूप से फैल रहा है तो यह अपने आप में पुलिस की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है,कहा जा रहा है कि 6 जून को पुराने बस स्टैंड क्षेत्र के पास स्थित एक दुकान से पाइप खरीदे गए और बाद में उन्हें बरामदगी का हिस्सा बनाया गया, यदि ऐसा नहीं हुआ तो पुलिस के पास इन आरोपों का खंडन करने का पूरा अवसर है, लेकिन जब तक स्पष्ट जवाब नहीं आता,चर्चा जारी रहेगी।
बर्तन व्यवसायी पर चुप्पी क्यों?
पूरे मामले में सबसे दिलचस्प सवाल उस कथित बर्तन व्यवसायी को लेकर उठ रहा है जिसका नाम स्थानीय चर्चाओं में बार-बार लिया जा रहा है,लोग पूछ रहे हैं कि यदि चोरी का सामान वहां बेचा गया था तो क्या उसके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई? क्या उससे पूछताछ हुई? क्या उसके यहां से कोई जब्ती हुई? यदि नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई? व्यंग्य में लोग कह रहे हैं कि शायद वह इस कहानी का ऐसा पात्र है जिसका नाम पटकथा में था लेकिन फिल्म रिलीज होने से पहले काट दिया गया।
नासिर खान और जय सिंह जेल,लेकिन सवाल बाकी…
मामले में एक बड़ा प्रश्न यह भी उठ रहा है कि यदि सभी कथित खरीददारों की भूमिका समान थी तो कार्रवाई अलग-अलग क्यों दिखाई दी? नासिर खान और जय सिंह को जेल भेजा गया, जबकि मोहम्मद गफ्फार को कथित रूप से अलग प्रक्रिया के तहत राहत मिली,वहीं स्थानीय चर्चाओं में एक बर्तन व्यवसायी का नाम भी सामने आ रहा है, लेकिन उसके संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई,इससे लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या जांच में सभी संबंधित पक्षों के साथ समान व्यवहार किया गया या नहीं,लेकिन अब चर्चा यह है कि सभी खरीददारों के साथ कार्रवाई का स्वरूप एक जैसा क्यों नहीं दिखाई दिया? यदि सभी ने चोरी का माल खरीदा था तो फिर प्रक्रिया में अंतर क्यों दिखाई दिया? हालांकि इसका उत्तर केवल जांच एजेंसी और न्यायिक रिकॉर्ड ही दे सकते हैं, लेकिन जनता के बीच उठ रहे सवाल पुलिस के लिए असहज स्थिति जरूर पैदा कर रहे हैं।
डिस्क्लेमर-यह समाचार पुलिस प्रेस विज्ञप्ति,उपलब्ध दस्तावेजों,स्थानीय सूत्रों एवं जनचर्चाओं पर आधारित है,समाचार में व्यक्त आरोप,शंकाएं एवं दावे संबंधित पक्षों और सूत्रों के हैं,जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है,समाचार का उद्देश्य केवल जनहित में उठ रहे सवालों को सामने रखना है,किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पूर्व सक्षम जांच एवं न्यायालय के अंतिम निर्णय को ही मान्य माना जाए…
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