लंबित भुगतान को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग को दी चेतावनी,तत्काल राशि जारी करने की मांग
-संवाददाता-
एमसीबी,11 जून 2026 (घटती-घटना)। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लंबित भुगतान का मुद्दा अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में गूंजने लगा है, वर्षों से कम मानदेय में बच्चों,गर्भवती महिलाओं और कुपोषण से लड़ाई का जिम्मा संभाल रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्थन में पूर्व विधायक गुलाब कमरो खुलकर सामने आए हैं, उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव से मुलाकात कर लंबित प्रोत्साहन राशि एवं सुपोषण चौपाल भुगतान को लेकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
महीनों से अटका है भुगतान…
पूर्व विधायक द्वारा सौंपे गए पत्र के अनुसार मनेंद्रगढ़ परियोजना के अंतर्गत कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कई महीनों से विभिन्न मदों की राशि नहीं मिली है, पोषण ट्रैकर ऐप के तहत जून 2024 से फरवरी 2025 तथा मार्च 2026 से मई 2026 तक की प्रोत्साहन राशि लंबित बताई गई है,इसके अलावा सुपोषण चौपाल कार्यक्रम के तहत सितंबर 2024 से फरवरी 2025 और मार्च 2026 से मई 2026 तक का भुगतान भी कार्यकर्ताओं को नहीं मिल पाया है, लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण कई कार्यकर्ताओं के सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
जेब से खर्च कर रही हैं कार्यकर्ता
गुलाब कमरो ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहले से ही सीमित मानदेय पर कार्य कर रही हैं,इसके बावजूद शासन की विभिन्न योजनाओं को सफल बनाने के लिए उन्हें मोबाइल, इंटरनेट रिचार्ज और अन्य तकनीकी खर्च स्वयं वहन करने पड़ रहे हैं,उन्होंने कहा कि पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से प्रतिदिन ऑनलाइन जानकारी अपलोड करने की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं पर है,लेकिन इसके लिए आवश्यक संसाधनों का खर्च भी उन्हें अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है, इसके बावजूद प्रोत्साहन राशि समय पर नहीं मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
तत्काल भुगतान की मांग…
गुलाब कमरो ने महिला एवं बाल विकास विभाग से मांग की है कि सभी लंबित प्रोत्साहन राशि और सुपोषण चौपाल भुगतान तत्काल जारी किया जाए ताकि कार्यकर्ताओं को राहत मिल सके, उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में भुगतान में देरी सीधे तौर पर उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रही है।
सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल…
पूर्व विधायक ने शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण और पोषण अभियान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को उनके मेहनताने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है,उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम करती हैं और उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार उचित नहीं कहा जा सकता।
दी आंदोलन की चेतावनी…
पूर्व विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मेहनत का पैसा हर हाल में उन्हें मिलना चाहिए,यदि भुगतान में और देरी होती है तो कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा और सरकार को जवाब देना होगा,उन्होंने कहा कि यह केवल भुगतान का मुद्दा नहीं बल्कि उन महिलाओं के सम्मान और अधिकारों का प्रश्न है, जो वर्षों से समाज और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कार्य कर रही हैं।
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