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मनेंद्रगढ़@ मनेंद्रगढ़ के पालना घर में बड़ा खेल!

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कागजों में संचालन जमीनी हकीकत में ताला-लाखों की गड़बड़ी के आरोप
पालना घर योजना पर उठे गंभीर सवाल…..
मनेंद्रगढ़,23 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)।
शहरी क्षेत्र मनेंद्रगढ़ के वार्ड क्रमांक 1 ब/21 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में संचालित ‘पालना घर’ योजना अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है, सूत्रों के अनुसार यह योजना केवल कागजों में संचालित दिखाई जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर यहां कोई गतिविधि नजर नहीं आ रही, बताया जा रहा है कि जिस पालना घर का उद्देश्य बच्चों की देखरेख और सुविधा सुनिश्चित करना है, वहां न तो नियमित संचालन हो रहा है और न ही बच्चों की उपस्थिति देखने को मिल रही है।
कागजों में चल रहा संचालन,जमीन पर ताला
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र में पालना घर का संचालन दिखाया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता में केंद्र अधिकांश समय बंद रहता है, इस स्थिति ने यह संदेह पैदा कर दिया है कि योजना का क्रियान्वयन केवल दस्तावेजों तक सीमित कर दिया गया है, जबकि लाभार्थियों तक इसका फायदा नहीं पहुंच रहा।
राशि आहरण पर उठे सवाल- सबसे बड़ा सवाल योजना की राशि को लेकर उठ रहा है, सूत्रों का दावा है कि पालना घर के नाम पर शासन से मिलने वाली राशि का नियमित आहरण किया जा रहा है,जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस गतिविधि नहीं हो रही, ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि लाखों रुपये की राशि में वित्तीय अनियमितता की जा रही है।
संपर्क करने पर नहीं मिला जवाब
इस संबंध में जब परियोजना अधिकारी शशि जायसवाल से मोबाइल नंबर 9424263267 पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, इससे पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर और भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच की मांग और प्रशासन पर सवाल
क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?
क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

योजना या घोटाला?
मनेंद्रगढ़ के इस पालना घर का मामला केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं,बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है, यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग है, बल्कि बच्चों के अधिकारों के साथ भी खिलवाड़ है, अब नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है क्योंकि यहां सवाल केवल एक योजना का नहीं, बल्कि भरोसे का है।
परियोजना अधिकारी और सुपरवाइजर की भूमिका संदिग्ध
सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी शशि जायसवाल और संबंधित सेक्टर की सुपरवाइजर की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है,आरोप है कि दोनों की कथित मिलीभगत से योजना की राशि में बंदरबांट किया जा रहा है और शासन की महत्वपूर्ण योजना को केवल कागजों तक सीमित कर दिया गया है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है, लोगों का कहना है कि बच्चों के हित में बनाई गई योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है, उनका आरोप है कि अगर समय रहते जांच नहीं हुई, तो इस तरह की अनियमितताएं और बढ़ सकती हैं।


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