- सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर पर लगाई रोक
- सीबीआई से मांगा जवाब,उम्रकैद-अपील दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई
रायपुर,23 अप्रैल 2026। सुप्रीम कोर्ट ने 23 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड मामले में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी(जेसीसी-जे) सुप्रीमो अमित जोगी को बड़ी राहत दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 25 मार्च 2026 (जिसमें अपील दायर करने की अनुमति दी गई) और दो अप्रैल 2026 (जिसमें अपील को स्वीकार किया गया) को संयुक्त रुप से स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिये सूचीबद्ध किया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जोगी के सरेंडर करने के आदेश पर फिलहाल रोक(स्टे) लगा दिया है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से जवाब मांगा है। सीबीआई का जवाब आने तक अमित जोगी के सरेंडर पर रोक लगी रहेगी। अमित जोगी की दोनों अपील पर सुप्रीम कोर्ट में एक साथ सुनवाई हुई। अमित जोगी की ओर से दो हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने अमित जोगी को तीन हफ्ते में सरेंडर करने के निर्देश दिये थे। हाईकोर्ट ने उन्हें हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। सुप्रीम कोर्ट में दोनों मामले की एक साथ सुनवाई चल रही है। इस मामले में जेसीसी-जे का कहना है कि अमित जोगी के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिया गया निर्णय ऐतिहासिक है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जोगी को दिए गए आजीवन कारावास के आदेश पर रोक (स्टे) लगा दी है। यह निर्णय न केवल न्यायपालिका में विश्वास को और मजबूत करता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि सत्य को अस्थायी रूप से परेशान किया जा सकता है, परंतु उसे पराजित नहीं किया जा सकता। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ इस न्यायपूर्ण निर्णय के लिए सुप्रीम कोर्ट का हृदय से आभार व्यक्त करती है। पार्टी का मानना है कि यह सत्य और न्याय की ऐतिहासिक विजय है, जिसने लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय की गरिमा को पुनः स्थापित किया है। मुख्य प्रवक्ता अधिवक्ता भगवानू नायक ने कहा कि हमारी पार्टी न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास रखती है और आज का यह फैसला उसी विश्वास को और सुदृढ़ करता है।
2003 में गोली मारकर की गई थी हत्या
4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे। जिनमें से बुल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। हालांकि,31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया। हाईकोर्ट ने ट्रॉयल कोर्ट के फैसले को गलत बताया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा था कि यह मानना हास्यास्पद है कि बाकी दोषियों ने अमित जोगी को खुश करने के लिए उनकी जानकारी के बिना इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया।
अमित जोगी बोले…न्यायपालिका पर मुझे पूरा विश्वास
अमित जोगी ने पिछली बार फेसबुक पर लिखा था कि, सर्वोच्च न्यायालय ने आज दोनों मामलों को एक साथ टैग कर दिया है। मेरी कानूनी टीम का हृदय से आभार। न्यायपालिका पर मुझे पूर्ण विश्वास है।
सतीश जग्गी का आरोप…तत्कालीन राज्य सरकार की प्रायोजित थी हत्या
हाईकोर्ट में अपील पर रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ पेश क्रिमिनल अपील पर उनके अधिवक्ता बीपी शर्मा ने तर्क दिया था। उन्होंने बताया था कि हत्याकांड की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित थी। जब सीबीआई की जांच शुरू हुई,तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं,बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है। लिहाजा,इस केस के आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जा सकता।
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