बिलासपुर,21 अप्रैल 2026 । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सात साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पीडि़ता की गवाही स्पष्ट, सुसंगत और विश्वसनीय है, तो केवल मेडिकल या वैज्ञानिक साक्ष्य के अभाव या निगेटिव होने के आधार पर आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता। जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने आरोपी की अपील पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक टिप्पणी की। मामले में आरोपी ने अपनी सजा को चुनौती दी थी और तर्क दिया था कि मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए उसे बरी किया जाना चाहिए।
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