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रायपुर@छत्तीसगढ़ में अब जमीन खरीदना हुआ आसान,रजिस्ट्री की दरें घटीं

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रायपुर,20 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का अंतिम दिन, 20 मार्च 2026,प्रदेश की जनता और युवाओं के लिए बड़े निर्णयों का गवाह बना। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ उपकर संशोधन विधेयक 2026’ और ‘नकल विरोधी विधेयक’ पारित कर दोहरी राहत दी है। इन फैसलों से न केवल रियल एस्टेट सेक्टर को गति मिलेगी, बल्कि सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों परीक्षार्थियों का भविष्य भी सुरक्षित होगा।
जमीन रजिस्ट्री पर 12′ उपकर खत्म,
जनता को 150 करोड़ की राहत

साय सरकार ने एक. ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जमीनों की खरीद-बिक्री पर लगने वाले 12′ अतिरिक्त उपकर को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इस संशोधन विधेयक के पारित होने से अब प्रदेशवासियों को जमीन की रजिस्ट्री कराते समय केवल निर्धारित स्टांप शुल्क देना होगा, अतिरिक्त बोझ नहीं। अनुमान है कि इस फैसले से राज्य की लगभग 3 करोड़ जनता को सीधे तौर पर सालाना 147 से 150 करोड़ रुपये की बड़ी आर्थिक बचत होगी। सरकार का मानना है कि इस टैक्स कटौती से निवेश बढ़ेगा और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अपना घर या जमीन खरीदना आसान हो जाएगा।
पिछली सरकार के
‘युवा मितान क्लब’ उपकर पर तीखी बहस

सदन में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि यह 12′ उपकर पूर्ववर्ती सरकार द्वारा ‘राजीव गांधी युवा मितान क्लब योजना’ के वित्तपोषण के लिए लगाया गया था। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर सहित अन्य सत्तापक्ष के सदस्यों ने आरोप लगाया कि इस योजना के तहत लगभग 52 करोड़ रुपये का उपयोग पारदर्शी तरीके से नहीं किया गया। ऑडिट की कमी और अपारदर्शी पंजीकरण का मुद्दा उठाते हुए सरकार ने इस उपकर को जनहित में अनावश्यक बताया और इसे समाप्त करने का निर्णय लिया। विपक्ष के साथ तीखी बहस के बाद आखिरकार जनता को राहत देने वाला यह बिल पास हो गया।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के
बीच तीखी बहस और समर्थन

विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली कार्यप्रणाली में हुई खामियों के कारण प्रदेश के लाखों युवाओं के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि यह बिल अभ्यर्थियों की मेहनत का सही मूल्यांकन सुनिश्चित करेगा। वहीं,नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी बिल की आवश्यकता का समर्थन किया। उन्होंने सहमति जताई कि संगठित अपराध रोकने के लिए ऐसा कानून जरूरी है, परंतु उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि हर विफलता के लिए पुरानी सरकार को कोसने के बजाय वर्तमान क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए।


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